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नौकरियों से हो गई 25 एएनएम की छुट्टी
Updated Fri, 20 Apr 2018 02:28 AM IST
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हल्द्वानी। शहरी क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बंद होने के साथ ही 25 एएनएम की छुट्टी हो गई है। केंद्र सरकार के बजट न देने के कारण पांचों शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बंद हुए हैं।
काठगोदाम, शनिबाजार, मंगलपड़ाव, बनभूलपुरा और रामनगर को शहरी क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मार्च में बंद करने के आदेश हो गए थे। एक केंद्र पर पांच एएनएम कार्यरत थीं। यह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एनजीओ के माध्यम से यह निजी अस्पताल के माध्यम से संचालित हो रहे थे।
बता दें कि उत्तराखंड में एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का खर्च लगभग 37 लाख रुपये था। जबकि आंध्र प्रदेश में एक केंद्र का खर्च 47 लाख रुपये था। सूत्रों की मानें तो आंध्र प्रदेश में अपने 220 केंद्रों की धनराशि ले ली। पश्चिम बंगाल ने चार सौ केंद्रों की धनराशि ले ली। राज्य में संचालित 39 केंद्रों का लगभग 10 करोड़ रुपये लाने में शासन सफल नहीं हुआ। एमओयू की मानें तो प्रत्येक माह का भुगतान करने की बात है मगर नौ माह से भुगतान नहीं हुआ। हर माह आश्वासन मिलता रहा कि भुगतान कर रहे हैं। ऐसे में उक्त केंद्रों के बंद होने के साथ ही कार्यरत 25 एएनएम की नौकरी से भी छुट्टी हो गई।
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केंद्र सरकार के बजट न देने के कारण पांच शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बंद
आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल ले आए धनराशि, उत्तराखंड 39 पीएचसी की धनराशि नहीं ला पाया
हल्द्वानी में संचालित चार शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का नौ माह में लगभग सवा करोड़ रुपये बकाया है। अभी तक बकाए का भुगतान नहीं हुआ है। नौ माह का बकाया तो नहीं मिला मगर 31 मार्च को केंद्रों को बंद करने का आदेश आ गया।
डॉ. शैलेंद्र मिश्रा, प्रबंध निदेशक बांबे हास्पिटल
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एनजीओ या किसी निजी हास्पिटल के माध्यम से संचालित हो रहे थे। केंद्र से धनराशि न मिलने के कारण पांचों केंद्र बंद हो गए और एएनएम की नौकरी भी संकट में पड़ गई।
डॉ. एमएम तिवारी, मुख्य चिकित्साधिकारी, नैनीताल
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काठगोदाम, शनिबाजार, मंगलपड़ाव, बनभूलपुरा और रामनगर को शहरी क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मार्च में बंद करने के आदेश हो गए थे। एक केंद्र पर पांच एएनएम कार्यरत थीं। यह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एनजीओ के माध्यम से यह निजी अस्पताल के माध्यम से संचालित हो रहे थे।
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बता दें कि उत्तराखंड में एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का खर्च लगभग 37 लाख रुपये था। जबकि आंध्र प्रदेश में एक केंद्र का खर्च 47 लाख रुपये था। सूत्रों की मानें तो आंध्र प्रदेश में अपने 220 केंद्रों की धनराशि ले ली। पश्चिम बंगाल ने चार सौ केंद्रों की धनराशि ले ली। राज्य में संचालित 39 केंद्रों का लगभग 10 करोड़ रुपये लाने में शासन सफल नहीं हुआ। एमओयू की मानें तो प्रत्येक माह का भुगतान करने की बात है मगर नौ माह से भुगतान नहीं हुआ। हर माह आश्वासन मिलता रहा कि भुगतान कर रहे हैं। ऐसे में उक्त केंद्रों के बंद होने के साथ ही कार्यरत 25 एएनएम की नौकरी से भी छुट्टी हो गई।
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केंद्र सरकार के बजट न देने के कारण पांच शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बंद
आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल ले आए धनराशि, उत्तराखंड 39 पीएचसी की धनराशि नहीं ला पाया
हल्द्वानी में संचालित चार शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का नौ माह में लगभग सवा करोड़ रुपये बकाया है। अभी तक बकाए का भुगतान नहीं हुआ है। नौ माह का बकाया तो नहीं मिला मगर 31 मार्च को केंद्रों को बंद करने का आदेश आ गया।
डॉ. शैलेंद्र मिश्रा, प्रबंध निदेशक बांबे हास्पिटल
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एनजीओ या किसी निजी हास्पिटल के माध्यम से संचालित हो रहे थे। केंद्र से धनराशि न मिलने के कारण पांचों केंद्र बंद हो गए और एएनएम की नौकरी भी संकट में पड़ गई।
डॉ. एमएम तिवारी, मुख्य चिकित्साधिकारी, नैनीताल