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गांव गांव जाकर लोक कलाकार खोजेगी संस्कार भारती
Updated Mon, 21 Aug 2017 02:27 AM IST
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हल्द्वानी। संस्कार भारती गांव-गांव जाकर लोक कलाकारों को खोजने के लिए सर्वे शुरू करने जा रही है। इस सर्वे में गांव, जिला से प्रांत स्तर पर कलाकारों को चिह्नित किया जाएगा ताकि देश भर में उत्तराखंड की लोक संस्कृति की झलक देखने को मिल सके।
संस्कार भारती के संरक्षक योगेंद्र बाबा ने रविवार को पत्रकारों से कहा कि संस्कार भारती की प्रांत में 47 इकाइयां, 22 जिले, सात विभाग है। हर इकाईअब प्रांत के हर गांव के कोने कोने तक सर्वे करेगी। 28 से 20 अक्तूबर तक कुरूक्षेत्र में होने वाले कार्यक्रम में उत्तराखंड के लोक कलाकारों को प्रोत्साहित किया जाएगा।
अखिल भारतीय सह संयोजक साहित्य देवेंद्र देव ने बताया कि देश भर में प्रांतीय साहित्य संयोजक बनाए गए हैं जो आंचलिक भाषा में घरों में जन्म, शादी, वधू आगमन, त्योहार आदि पर गाए जाने वाले गीतों को काव्य तैयार करेंगे। ऐसे गुमनाम वीर जो देश के लिए बलिदान हो गए लेकिन नाम नहीं मिल सका। उनकी गाथा को उन्हीं के क्षेत्रों की भाषा में काव्य साहित्य बना कर संजोने की कोशिश भी की जा रही है। संस्कृति को बचाने के मकसद से नए नए साहित्यकारों को प्रेरित किया जा रहा है कि वो नए सिरे से नाटक, काव्य की रचना करे ताकि संस्कृति को विकृति से बचाया जा सके। इस दौरान बांके लाल गौड़, देवेंद्र देव, देवेंद्र रावत, केके जोशी, रोशन लाल, पंकज अग्रवाल, कमल उप्रेती, संदीप कुकसाल आदि मौजूद थे।
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संस्कार भारती के संरक्षक योगेंद्र बाबा ने रविवार को पत्रकारों से कहा कि संस्कार भारती की प्रांत में 47 इकाइयां, 22 जिले, सात विभाग है। हर इकाईअब प्रांत के हर गांव के कोने कोने तक सर्वे करेगी। 28 से 20 अक्तूबर तक कुरूक्षेत्र में होने वाले कार्यक्रम में उत्तराखंड के लोक कलाकारों को प्रोत्साहित किया जाएगा।
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अखिल भारतीय सह संयोजक साहित्य देवेंद्र देव ने बताया कि देश भर में प्रांतीय साहित्य संयोजक बनाए गए हैं जो आंचलिक भाषा में घरों में जन्म, शादी, वधू आगमन, त्योहार आदि पर गाए जाने वाले गीतों को काव्य तैयार करेंगे। ऐसे गुमनाम वीर जो देश के लिए बलिदान हो गए लेकिन नाम नहीं मिल सका। उनकी गाथा को उन्हीं के क्षेत्रों की भाषा में काव्य साहित्य बना कर संजोने की कोशिश भी की जा रही है। संस्कृति को बचाने के मकसद से नए नए साहित्यकारों को प्रेरित किया जा रहा है कि वो नए सिरे से नाटक, काव्य की रचना करे ताकि संस्कृति को विकृति से बचाया जा सके। इस दौरान बांके लाल गौड़, देवेंद्र देव, देवेंद्र रावत, केके जोशी, रोशन लाल, पंकज अग्रवाल, कमल उप्रेती, संदीप कुकसाल आदि मौजूद थे।
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