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सुभारती विवि अधिनियम को निरस्त करने की मांग संबंधी याचिका खारिज
Updated Sun, 10 Dec 2017 02:22 AM IST
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सुभारती विवि अधिनियम 2016 को निरस्त
करने की मांग करने वाली याचिका खारिज
अमर उजाला ब्यूरो
नैनीताल।
उच्च न्यायालय ने सुभारती विश्वविद्यालय अधिनियम 2016 को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति मनोज तिवारी की एकल पीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। नारायण स्वामी चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रतिनिधि मनीष वर्मा ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर मांग की थी कि सुभारती विश्वविद्यालय अधिनियम 2016 को अवैधानिक घोषित किया जाए। याची के मुताबिक डॉ. जगत नारायण सुभारती चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से सुभारती मेडिकल समेत कई संस्थाएं एक ही परिसर में संचालित की जा रही हैं। इस ट्रस्ट की ओर से जमीन की खरीद में भी नियमों का पालन नहीं किया गया। ट्रस्ट ने नारायण स्वामी चैरिटेबल ट्रस्ट के साथ हुए करार का भी अनुपालन नहीं किया है। नारायण स्वामी चैरिटेबल ट्रस्ट को कई छात्रों को विभिन्न मदों में धनराशि की वापसी करनी है, लेकिन अनुबंध के बावजूद उन्हें सुभारती चैरिटेबल ट्रस्ट से धनराशि नहीं मिल रही है। ऐसे में वह छात्रों को धनराशि नहीं दे पा रहे हैं । सुभारती चैरिटेबल ट्रस्ट और सरकार का पक्ष रखते हुए अधिवक्ता ने कहा कि अधिनियम बनाने में किसी भी प्रकार से संविधान के अनुच्छेदों का उल्लंघन नहीं हुआ है। सरकार ने निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए अधिनियम बनाया है। इस अधिनियम से याची के अधिकारों का भी कहीं कोई उल्लंघन नहीं हो रहा है। पक्षों की सुनवाई के बाद याचिका को खारिज कर दिया।
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सुभारती विवि अधिनियम 2016 को निरस्त
करने की मांग करने वाली याचिका खारिज
अमर उजाला ब्यूरो
नैनीताल।
उच्च न्यायालय ने सुभारती विश्वविद्यालय अधिनियम 2016 को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति मनोज तिवारी की एकल पीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। नारायण स्वामी चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रतिनिधि मनीष वर्मा ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर मांग की थी कि सुभारती विश्वविद्यालय अधिनियम 2016 को अवैधानिक घोषित किया जाए। याची के मुताबिक डॉ. जगत नारायण सुभारती चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से सुभारती मेडिकल समेत कई संस्थाएं एक ही परिसर में संचालित की जा रही हैं। इस ट्रस्ट की ओर से जमीन की खरीद में भी नियमों का पालन नहीं किया गया। ट्रस्ट ने नारायण स्वामी चैरिटेबल ट्रस्ट के साथ हुए करार का भी अनुपालन नहीं किया है। नारायण स्वामी चैरिटेबल ट्रस्ट को कई छात्रों को विभिन्न मदों में धनराशि की वापसी करनी है, लेकिन अनुबंध के बावजूद उन्हें सुभारती चैरिटेबल ट्रस्ट से धनराशि नहीं मिल रही है। ऐसे में वह छात्रों को धनराशि नहीं दे पा रहे हैं । सुभारती चैरिटेबल ट्रस्ट और सरकार का पक्ष रखते हुए अधिवक्ता ने कहा कि अधिनियम बनाने में किसी भी प्रकार से संविधान के अनुच्छेदों का उल्लंघन नहीं हुआ है। सरकार ने निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए अधिनियम बनाया है। इस अधिनियम से याची के अधिकारों का भी कहीं कोई उल्लंघन नहीं हो रहा है। पक्षों की सुनवाई के बाद याचिका को खारिज कर दिया।