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एसडीओ ने मांगा स्पष्टीकरण
Updated Wed, 06 Jun 2018 02:16 AM IST
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हल्द्वानी। रेलवे ठेकेदार की ओर से लालकुआं से रुद्रपुर तक पेड़ उखाड़ने के मामले में वन अधिकारी सख्त हो गए हैं। उप प्रभागीय वनाधिकारी किच्छा ने मौका मुआयना के बाद रेंजर टांडा से स्पष्टीकरण मांगा है।
रेलवे का लालकुआं से रुद्रपुर के बीच ट्रैक किनारे मिट्टी डालने का काम चल रहा है। इसके लिए रेलवे के ठेकेदार ने वन विभाग से अनुमति ली है। ठेकेदार ने रामपुर रोड से बरेली रोड के बीच पोकलैंड से रेलवे ट्रैक पर मिट्टी डालने के दौरान 265 से ज्यादा पेड़ उखाड़ दिए। इस पर हंगामा हो गया। एसडीओ किच्छा उमेश चंद्र तिवारी ने मौके पर निरीक्षण किया तो वहां सैकड़ों पेड़ धराशायी मिले। उन्होंने टांडा रेंजर भूपाल सिंह मेहता से इस घटना का लिखित स्पष्टीकरण मांगा है। स्पष्टीकरण में पेड़ कटने की सूचना वन अधिकारियों को नहीं देना, पेड़ कटने से नहीं रोकना आदि बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है।
...तो वन कर्मियों ने ही बेचे थे सागौन के पेड़
सूत्रों की माने तो रेलवे ठेकेदार ने जो 265 से ज्यादा पेड़ काटे थे। उनके सौदे में वन कर्मियों की संलिप्तता ही नजर आ रही है। सामने आया है कि ठेकेदार के पेड़ काटने के बाद सौदेबाजी वन कर्मियों ने की इसलिए ट्राली की चेकिंग नहीं की गई। बाद में सिडकुल चौकी पुलिस ने ट्रॉली पकड़ ली तो मामला खुला। हालांकि बाद में ट्राली में लट्ठे बदलने का भी खेल हुआ। वन अधिकारियों की फौरी जांच में भी सामने आया है।
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डीएफओ ने रेलवे से की शिकायत, सात को होगा संयुक्त मुआयना
वन भूमि हस्तांतरण की शर्त के अनुसार पहले तो रेलवे बगैर अनुमति पेड़ नहीं काट सकता। यदि पेड़ काट भी दिए तो नियमानुसार वन विभाग के ही होंगे। इन पेड़ों को बिना अनुमति कटान और सौदेबाजी को लेकर रेलवे इंजीनियर को लिखित शिकायत की है। उन्होंने सात जून को वन और रेलवे अधिकारियों के संयुक्त मुआयने की बात भी कही है।
दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी
पेड़ काटने के लिए एसडीओ जांच कर रहे हैं, उन्होंने रेंजर से लिखित में स्पष्टीकरण मांगा है। जो भी जांच में दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
- कल्याणी नेगी, डीएफओ तराई केंद्रीय
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रेलवे का लालकुआं से रुद्रपुर के बीच ट्रैक किनारे मिट्टी डालने का काम चल रहा है। इसके लिए रेलवे के ठेकेदार ने वन विभाग से अनुमति ली है। ठेकेदार ने रामपुर रोड से बरेली रोड के बीच पोकलैंड से रेलवे ट्रैक पर मिट्टी डालने के दौरान 265 से ज्यादा पेड़ उखाड़ दिए। इस पर हंगामा हो गया। एसडीओ किच्छा उमेश चंद्र तिवारी ने मौके पर निरीक्षण किया तो वहां सैकड़ों पेड़ धराशायी मिले। उन्होंने टांडा रेंजर भूपाल सिंह मेहता से इस घटना का लिखित स्पष्टीकरण मांगा है। स्पष्टीकरण में पेड़ कटने की सूचना वन अधिकारियों को नहीं देना, पेड़ कटने से नहीं रोकना आदि बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है।
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...तो वन कर्मियों ने ही बेचे थे सागौन के पेड़
सूत्रों की माने तो रेलवे ठेकेदार ने जो 265 से ज्यादा पेड़ काटे थे। उनके सौदे में वन कर्मियों की संलिप्तता ही नजर आ रही है। सामने आया है कि ठेकेदार के पेड़ काटने के बाद सौदेबाजी वन कर्मियों ने की इसलिए ट्राली की चेकिंग नहीं की गई। बाद में सिडकुल चौकी पुलिस ने ट्रॉली पकड़ ली तो मामला खुला। हालांकि बाद में ट्राली में लट्ठे बदलने का भी खेल हुआ। वन अधिकारियों की फौरी जांच में भी सामने आया है।
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डीएफओ ने रेलवे से की शिकायत, सात को होगा संयुक्त मुआयना
वन भूमि हस्तांतरण की शर्त के अनुसार पहले तो रेलवे बगैर अनुमति पेड़ नहीं काट सकता। यदि पेड़ काट भी दिए तो नियमानुसार वन विभाग के ही होंगे। इन पेड़ों को बिना अनुमति कटान और सौदेबाजी को लेकर रेलवे इंजीनियर को लिखित शिकायत की है। उन्होंने सात जून को वन और रेलवे अधिकारियों के संयुक्त मुआयने की बात भी कही है।
दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी
पेड़ काटने के लिए एसडीओ जांच कर रहे हैं, उन्होंने रेंजर से लिखित में स्पष्टीकरण मांगा है। जो भी जांच में दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
- कल्याणी नेगी, डीएफओ तराई केंद्रीय