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आयकर रिटर्न की मियाद घटी
Updated Fri, 23 Mar 2018 02:29 AM IST
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हल्द्वानी। आयकर विभाग ने कर निर्धारण वर्ष की अवधि दो साल से घटा कर एक साल कर दी है। इस तरह वित्तीय वर्ष 2015-16 और 2016-17 के लिए करदाताओं को रिटर्न जमा करने का सिर्फ 31 मार्च तक अवसर मिलेगा। नए नियमों में यदि इन आठ दिनों में रिटर्न जमा नहीं किया तो पेनाल्टी के साथ भी नहीं होगा।
पूर्व में हर वित्तीय वर्ष के लिए दो साल की अवधि कर निर्धारण के लिए होती थी। यानी वित्तीय वर्ष 2015-16 का रिटर्न करदाता 2017-18 तक जमा कर सकता है। हाल ही में केंद्र ने इस अवधि को दो साल से घटाकर एक साल कर दी गई है। अब 2015-16 के करदाताओं को अभी यह रियायत दी गई है कि वे इस साल तक रिटर्न जमा कर सकते हैं।
रिटर्न में पूरा होना चाहिए विवरण
सीए दिनेश पांडेय का कहना है कि करदाता रिटर्न जमा करते समय कभी-कभी कई मदों में आय का विवरण देना भूल जाते हैं जिन पर बाद में जुर्माना और ब्याज भुगतना होता है इसलिए रिटर्न जमा करते समय विशेष सावधानियां बरतनी चाहिए।
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ये बरतें सावधानियां
1. नोटबंदी के दौरान जितना रुपया भी बैंक में जमा किया हो उसका पूरा विवरण दे।
2. प्रापर्टी का सौदा करने में मुनाफा होता है तो इस पर भी कैपिटल गेन टैक्स लगता है
3. फिक्सड डिपोजिट, रिकरिंग डिपोजिट, मासिक आय योजना आदि में ब्याज की आय का भी विवरण दें
4. गोल्ड, म्यूचुअल फंड्स, प्रापर्टी में निवेश की गई रकम का भी पूरा ब्योरा दे
5. रक्त संबंधों को छोड़कर किसी भी रिश्तेदार से उपहार में मिली बड़ी रकम, प्रापर्टी का ब्योरा
6. जीवन बीमा निगम, ऋण के ब्याज का भी ब्योरा पेश करें
7. विदेश यात्रा में किए गए खर्च का भी ब्योरा
8. अगले साल के एडवांस कर का आकलन कर जमा करें
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पूर्व में हर वित्तीय वर्ष के लिए दो साल की अवधि कर निर्धारण के लिए होती थी। यानी वित्तीय वर्ष 2015-16 का रिटर्न करदाता 2017-18 तक जमा कर सकता है। हाल ही में केंद्र ने इस अवधि को दो साल से घटाकर एक साल कर दी गई है। अब 2015-16 के करदाताओं को अभी यह रियायत दी गई है कि वे इस साल तक रिटर्न जमा कर सकते हैं।
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रिटर्न में पूरा होना चाहिए विवरण
सीए दिनेश पांडेय का कहना है कि करदाता रिटर्न जमा करते समय कभी-कभी कई मदों में आय का विवरण देना भूल जाते हैं जिन पर बाद में जुर्माना और ब्याज भुगतना होता है इसलिए रिटर्न जमा करते समय विशेष सावधानियां बरतनी चाहिए।
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ये बरतें सावधानियां
1. नोटबंदी के दौरान जितना रुपया भी बैंक में जमा किया हो उसका पूरा विवरण दे।
2. प्रापर्टी का सौदा करने में मुनाफा होता है तो इस पर भी कैपिटल गेन टैक्स लगता है
3. फिक्सड डिपोजिट, रिकरिंग डिपोजिट, मासिक आय योजना आदि में ब्याज की आय का भी विवरण दें
4. गोल्ड, म्यूचुअल फंड्स, प्रापर्टी में निवेश की गई रकम का भी पूरा ब्योरा दे
5. रक्त संबंधों को छोड़कर किसी भी रिश्तेदार से उपहार में मिली बड़ी रकम, प्रापर्टी का ब्योरा
6. जीवन बीमा निगम, ऋण के ब्याज का भी ब्योरा पेश करें
7. विदेश यात्रा में किए गए खर्च का भी ब्योरा
8. अगले साल के एडवांस कर का आकलन कर जमा करें