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‘हल्द्वानी मंडी’ बसी है मुख्यमंत्री के मन में
Updated Tue, 02 Jan 2018 01:53 AM IST
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हल्द्वानी। सियासी तूफान का सबब बने अंतरराज्यीय बस अड्डे की नई जमीन के जरिये प्रदेश सरकार एक तीर से दो शिकार करने की तैयारी में है। हल्द्वानी की मंडी को शिफ्ट करके और इस जगह पर अंतरराज्यीय बस अड्डा बनाने के प्रस्ताव पर भी विचार किया जा रहा है। कृषि विभाग मंडी को शिफ्ट करने के लिए जी जान से लगा हुआ है और अंतरराज्यीय बस अड्डे के बहाने वह बहती गंगा में हाथ धोने की कोशिश में है।
रविवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने हल्द्वानी में एक समारोह में ऐलान किया था कि अंतरराज्यीय बस अड्डा हल्द्वानी में ही बनेगा और गौलापार से बेहतर जगह पर बनेगा। इस हिसाब से हल्द्वानी मंडी स्थल सरकार को रास आ रहा है। मंडी इस समय रामपुर रोड और बरेली रोड के बीच में है और बरेली रोड को फोर लेन भी किया जा रहा है। मंडी को शिफ्ट करने की कृषि मंत्रालय पूरी कोशिश में है और ऐसे में इस जगह को अंतरराज्यीय बस अड्डे के लिए लेने में सरकार को खास कसरत भी नहीं करनी होगी। मंडी में अंतरराज्यीय बस अड्डा बनेगा तो गौलापार से कनेक्टिविटी भी बढ़ेगी और हल्द्वानी शहर के यातायात की समस्या का समाधान भी हो जाएगा। इसी मंडी स्थल से लगती हुई वन प्रशिक्षण अकादमी के नियंत्रण की वन भूमि भी है। इस जमीन के लिए भी अलग से प्रस्ताव तैयार करने पर विचार किया जा रहा है।
अभी इस मामले में पेच है तो सिर्फ इतना कि मंडी के लिए राज्य सरकार को कोई जमीन नहीं मिल पाई है। माना जा रहा है कि यह काम ज्यादा चुनौतीपूर्ण नहीं होगा। कारण यह है कि मंडी के लिए वन भूमि भी अगर प्रदेश सरकार लेती है तो इसके लिए यह नया प्रस्ताव होगा जबकि अंतरराज्यीय बस अड्डे के लिए वन भूमि का प्रस्ताव तैयार करने में एक ही परियोजना के लिए दो अलग-अलग स्थानों पर वन भूमि लेने लगभग असंभव है।
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साफ है कि मंडी के बहाने प्रदेश सरकार एक तीर से दो शिकार करने की कोशिश में है। मंडी भी शिफ्ट हो जाएगी और बस अड्डा भी बन जाएगा। प्रदेश सरकार यह भी कह सकती है कि अब शहर के बीच में होने के कारण बस अड्डा पहले से बेहतर जगह पर है। मंडी में इस समय करीब 44 एकड़ भूमि है। इसके पास से बह रही नहर को कवर कर दिया जाए तो यहां तक चौड़ी सड़क भी लाई जा सकती है।
सूत्रों के मुताबिक अंतरराज्यीय बस अड्डे के निर्माण कार्य पर रोक से पहले ही सियासी तूफान उठा हुआ है। ऐसे में मंडी को शिफ्ट करने की बात जगजाहिर होने पर कुमाऊं की इस सबसे बड़ी थोक मंडी के व्यापारियों की ओर से विरोध की आशंका है। इसलिए मंडी के लिए जमीन की तलाश कर लेने के बाद ही मंडी को शिफ्ट कर इस जगह बस अड्डा बनाए जाने की योजना को सार्वजनिक करने का मन बनाया गया है।
इतना आसान भी नहीं है यह प्रस्ताव
प्रदेश सरकार की इस योजना का दारोमदार मंडी के लिए जमीन की तलाश पर है। नई मंडी ऐसी जगह होनी चाहिए जो व्यापारियों को रास आए। जाहिर है कि सुविधाजनक जगह न मिलने पर व्यापारी भी विरोध में लामबंद हो सकते हैं। एक तरीका गौलापार आईएसबीटी में नई मंडी का निर्माण करने का भी है। अभी यह भी देखना होगा कि मंडी में निर्मित अवस्थापना सुविधाओं का क्या किया जाएगा।
मंडी को शिफ्ट करने की तैयारी की जा रही है। इसका कारण यह है कि हल्द्वानी मंडी का विस्तार नहीं हो पा रहा है। यहां जमीन भी काफी महंगी है। इस जमीन को बेच कर दोगुनी जमीन खरीदी जा सकती है। सिर्फ हल्द्वानी मंडी की बात नहीं है। बल्कि ऋषिकेश, देहरादून आदि की मंडियों को भी शिफ्ट करने की कोशिश है। - सुबोध उनियाल, कृषि मंत्री
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रविवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने हल्द्वानी में एक समारोह में ऐलान किया था कि अंतरराज्यीय बस अड्डा हल्द्वानी में ही बनेगा और गौलापार से बेहतर जगह पर बनेगा। इस हिसाब से हल्द्वानी मंडी स्थल सरकार को रास आ रहा है। मंडी इस समय रामपुर रोड और बरेली रोड के बीच में है और बरेली रोड को फोर लेन भी किया जा रहा है। मंडी को शिफ्ट करने की कृषि मंत्रालय पूरी कोशिश में है और ऐसे में इस जगह को अंतरराज्यीय बस अड्डे के लिए लेने में सरकार को खास कसरत भी नहीं करनी होगी। मंडी में अंतरराज्यीय बस अड्डा बनेगा तो गौलापार से कनेक्टिविटी भी बढ़ेगी और हल्द्वानी शहर के यातायात की समस्या का समाधान भी हो जाएगा। इसी मंडी स्थल से लगती हुई वन प्रशिक्षण अकादमी के नियंत्रण की वन भूमि भी है। इस जमीन के लिए भी अलग से प्रस्ताव तैयार करने पर विचार किया जा रहा है।
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अभी इस मामले में पेच है तो सिर्फ इतना कि मंडी के लिए राज्य सरकार को कोई जमीन नहीं मिल पाई है। माना जा रहा है कि यह काम ज्यादा चुनौतीपूर्ण नहीं होगा। कारण यह है कि मंडी के लिए वन भूमि भी अगर प्रदेश सरकार लेती है तो इसके लिए यह नया प्रस्ताव होगा जबकि अंतरराज्यीय बस अड्डे के लिए वन भूमि का प्रस्ताव तैयार करने में एक ही परियोजना के लिए दो अलग-अलग स्थानों पर वन भूमि लेने लगभग असंभव है।
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साफ है कि मंडी के बहाने प्रदेश सरकार एक तीर से दो शिकार करने की कोशिश में है। मंडी भी शिफ्ट हो जाएगी और बस अड्डा भी बन जाएगा। प्रदेश सरकार यह भी कह सकती है कि अब शहर के बीच में होने के कारण बस अड्डा पहले से बेहतर जगह पर है। मंडी में इस समय करीब 44 एकड़ भूमि है। इसके पास से बह रही नहर को कवर कर दिया जाए तो यहां तक चौड़ी सड़क भी लाई जा सकती है।
सूत्रों के मुताबिक अंतरराज्यीय बस अड्डे के निर्माण कार्य पर रोक से पहले ही सियासी तूफान उठा हुआ है। ऐसे में मंडी को शिफ्ट करने की बात जगजाहिर होने पर कुमाऊं की इस सबसे बड़ी थोक मंडी के व्यापारियों की ओर से विरोध की आशंका है। इसलिए मंडी के लिए जमीन की तलाश कर लेने के बाद ही मंडी को शिफ्ट कर इस जगह बस अड्डा बनाए जाने की योजना को सार्वजनिक करने का मन बनाया गया है।
इतना आसान भी नहीं है यह प्रस्ताव
प्रदेश सरकार की इस योजना का दारोमदार मंडी के लिए जमीन की तलाश पर है। नई मंडी ऐसी जगह होनी चाहिए जो व्यापारियों को रास आए। जाहिर है कि सुविधाजनक जगह न मिलने पर व्यापारी भी विरोध में लामबंद हो सकते हैं। एक तरीका गौलापार आईएसबीटी में नई मंडी का निर्माण करने का भी है। अभी यह भी देखना होगा कि मंडी में निर्मित अवस्थापना सुविधाओं का क्या किया जाएगा।
मंडी को शिफ्ट करने की तैयारी की जा रही है। इसका कारण यह है कि हल्द्वानी मंडी का विस्तार नहीं हो पा रहा है। यहां जमीन भी काफी महंगी है। इस जमीन को बेच कर दोगुनी जमीन खरीदी जा सकती है। सिर्फ हल्द्वानी मंडी की बात नहीं है। बल्कि ऋषिकेश, देहरादून आदि की मंडियों को भी शिफ्ट करने की कोशिश है। - सुबोध उनियाल, कृषि मंत्री