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रानीखेत-गनाई-दिल्ली सायंकालीन सेवा पर भी लटकी बंद होने की तलवार
Updated Mon, 23 Jul 2018 11:36 PM IST
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। सरकारी परिवहन सेवा बदहाली के दौर से गुजर रही है। कभी 65 बस बेड़े वाले रानीखेत रोडवेज डिपो वर्तमान में सिर्फ 26 बसों के भरोसे चल रहा है। अधिकांश आंतरिक रूटों पर सेवाएं बंद हो चुकी हैं। बसों की कमी के चलते अब रानीखेत-गनाई-दिल्ली सायंकालीन सेवा पर भी बंदी की तलवार लटकी हुई है। सेवाएं बंद होने से यात्रियों को परेशानी हो रही हैं।
रानीखेत रोडवेज डिपो से कभी क्षेत्र के लगभग सभी आंतरिक मोटर मार्गों पर बसों का संचालन होता था। यहां तक रानीखेत से मात्र 10 किमी की दूरी पर स्थित चौबटिया के लिए भी लोकल सेवा लागू की गई थी। एक तरफ परिवहन निगम यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने की बात करता है, दूसरी तरफ पहाड़ी रूटों पर सालों से बंद पड़ी सेवाओं को शुरू करने की तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा है। बताया गया है कि रानीखेत डिपो में अब 65 में से मात्र 26 बसें हैं। यह हाल तब हैं जब दो वर्ष पूर्व डिपो को कई बसें मिल चुकी हैं। इससे जहां यात्रियों को दिक्कतें हो रही हैं, वहीं डिपो को आर्थिक नुकसान भी हो रहा है।
राज्य बनने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि नए रूटों पर बसों का संचालन होगा, लेकिन लोगों की उम्मीदें धूमिल होती गईं। लोग टैक्सियों में महंगा किराया देकर सफर करने को विवश हो रहे हैं।
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रानीखेत रोडवेज डिपो से कभी क्षेत्र के लगभग सभी आंतरिक मोटर मार्गों पर बसों का संचालन होता था। यहां तक रानीखेत से मात्र 10 किमी की दूरी पर स्थित चौबटिया के लिए भी लोकल सेवा लागू की गई थी। एक तरफ परिवहन निगम यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने की बात करता है, दूसरी तरफ पहाड़ी रूटों पर सालों से बंद पड़ी सेवाओं को शुरू करने की तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा है। बताया गया है कि रानीखेत डिपो में अब 65 में से मात्र 26 बसें हैं। यह हाल तब हैं जब दो वर्ष पूर्व डिपो को कई बसें मिल चुकी हैं। इससे जहां यात्रियों को दिक्कतें हो रही हैं, वहीं डिपो को आर्थिक नुकसान भी हो रहा है।
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राज्य बनने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि नए रूटों पर बसों का संचालन होगा, लेकिन लोगों की उम्मीदें धूमिल होती गईं। लोग टैक्सियों में महंगा किराया देकर सफर करने को विवश हो रहे हैं।
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