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उत्तराखंड में लगे राष्ट्रपति शासन पर गुरुवार को होगी अगली सुनवाई

Wed, 06 Apr 2016 07:59 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 06 Apr 2016 07:59 PM IST
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nainital high court last hearing on uttarakhand president rule

नैनीताल हाईकोर्ट ने उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन और वित्त विधेयक संबंधी अध्यादेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर बुधवार को दिनभर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से बहस की तैयारी के लिए बुधवार की कार्यवाही रोक कर कुछ समय और मांगा गया, लेकिन कोर्ट ने उन्हें समय न देते हुए मामले की सुनवाई जारी रखी।

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इस पर केंद्र सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल मुकुल रहतोगी बृहस्पतिवार को बहस करेंगे। उसके बाद कोर्ट का फैसला आ सकता है। मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ एवं न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की खंडपीठ के समक्ष बुधवार को मामले की सुनवाई हुई। निवर्तमान सीएम हरीश रावत की ओर से सुप्रीम कोर्ट से पैरवी करने आए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने बुधवार को दिनभर बहस की।
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मामले के अनुसार उत्तराखंड हाईकोर्ट की खंडपीठ में पूर्व में केंद्र सरकार की ओर से उत्तराखंड विधानसभा में 31 मार्च को मतदान किए जाने संबंधी एकलपीठ के आदेश को चुनौती दी गई थी। इस प्रकरण पर पूर्व में खंडपीठ ने दोनों पक्षों की सहमति से फ्लोर टेस्ट को स्थगित करते हुए 6 अप्रैल को सुनवाई की तिथि निर्धारित की थी।

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केंद्र सरकार की ओर से पारित वित्त अध्यादेश को भी चुनौती

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हरीश रावत और विधायक - फोटो : SanjayNegi/AmarUjala

निर्वतमान मुख्यमंत्री हरीश रावत ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि 27 मार्च 2016 को उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन केवल राजनैतिक आधारों पर लगाया है और उन्हें सदन में बहुमत साबित करने का मौका तक नहीं दिया गया। साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार की ओर से पारित वित्त अध्यादेश को भी चुनौती दी थी।

याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 356 तभी लगाई जा सकती है जब कोई इमरजेंसी आ जाती है, लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं है। रावत सरकार को 28 मार्च तक बहुमत साबित करने को कहा गया था फिर भी निर्धारित तिथि से एक दिन पूर्व ही रातों रात राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। याचिकाकर्ता की ओर से राष्ट्रपति शासन को राजनीति से प्रेरित बताया और निरस्त करने की मांग की।

सुप्रीम कोर्ट से लेकर कई अदालतों के कई निर्णयों का हवाला दिया गया, जिसमें एसआर बाम्बे, रघुवर प्रसाद, जगदंबिका पाल सहित कई निर्णयों की कॉपी कोर्ट में पेश की। बहस के दौरान कोर्ट ने याची के वकील से पूछा कि सदन में वित्त विधेयक पास करने के बाद उसे गवर्नर के पास क्यों नहीं भेजा गया। इस पर पूर्व सीएम के वकील जवाब नहीं दे पाए।

शक्ति परीक्षण के लिए तय की थी 31 मार्च की तिथि

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हरीश रावत और विधायक - फोटो : SanjayNegi/AmarUjala

केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता, मनिंदर सिंह चड्ढा शामिल रहे। दिनभर सुनवाई के बाद कोर्ट ने कहा कि इस मामले पर सुनवाई बृहस्पतिवार को भी जारी रहेगी। केंद्र सरकार बृहस्पतिवार को अपना पक्ष रखेगी। पैरवी करने के लिए मुकुल रहतोगी नैनीताल पहुंच गए हैं।

बता दें कि उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के खिलाफ निवर्तमान मुख्यमंत्री हरीश रावत की याचिका पर सुनवाई करते हुए पूर्व में हाईकोर्ट की एकलपीठ ने विधानसभा में शक्ति परीक्षण के लिए 31 मार्च की तिथि तय की थी।

कोर्ट ने शक्ति परीक्षण में बागी विधायक को भी शामिल करने के निर्देश दिए थे। एकलपीठ के इस आदेश को हाईकोर्ट की खंडपीठ के समक्ष केंद्र सरकार ने चुनौती दी थी।

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