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...न जाने कब पूरा गांव नदी में समा जाए

Wed, 26 Jun 2013 06:21 PM IST
सुधाकर भट्ट
सुधाकर भट्ट Updated Wed, 26 Jun 2013 06:21 PM IST
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more than half a dozen villages are in problem

गोविंदघाट और लामबगड़ के बीच के आधा दर्जन से अधिक गांवों के लोगों की नींद गायब है। अंधेरा होते ही इन गांवों के लोग जंगल की शरण में चले जाते हैं।

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गांव के तबाह होने और फिर बच्चों के बीमार होने की आशंका के बीच इन्हें कोई पूछने वाला दूर दूर तक नजर नहीं आ रहा है।

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बड़गासी में ही पहला भूस्खलन 1997 में हुआ था। पर उस समय एक माह बाद ही जिंदगी पटरी पर आ गई थी। अब गांव के नीचे से जा रहा बदरीनाथ हाईवे पूरी तरह से बह चुका है लिहाजा इसका असर गांव पर भी पड़ा है। गांव के नीचे एक दरार उभर आई है और पूरा गांव दशहत की जद में है।
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इसी गांव के ईश्वर सिंह के मुताबिक पूरा गांव नीचे की ओर धंस रहा है। ऐसे में गांव के लोगों के सामने रात जंगल में बिताने के अलावा कोई चारा नहीं है। गांव के लोग जंगल में तिरपाल लगाकर रात बिताने के लिए मजबूर हैं। न जाने कब पूरा गांव नदी की गोद में समा जाए।

बदरीनाथ हाईवे बह चुका है

लामबगड़ का भी हाल कुछ ऐसा ही हैं। इस गांव के नीचे से अलकनंदा के तट से सटा बदरीनाथ हाईवे बह चुका है। नदी ने अपना रुख बदल लिया है और अब इसकी धारा का रुख गांव की ओर हो है। 17 जून की सुबह इस जगह से करीब बीस घर, स्कूल, अस्पताल बह गए थे। तब से गांव वाले रात जंगल में ही बिता रहे हैं।

पांडवों के गांव पांडुकेश्वर के भी हाल इससे अलग नहीं है। पांडुकेश्वर गांव में भी नदी ने खासा नुकसान किया है। यहां भी नदी की धारा का रुख अब गांव की ओर है। पांडुकेश्वर में कई दुकान और घर बह गए हैं। अस्पताल भी इस लायक नहीं बचा है कि उसमें रहा जा सके।


खीरों गाड़ ने ढहाया यह कहर
17 जून को अलकनंदा में तबाही मचाने में खीरों गाड़ का बड़ा हाथ रहा। खीरों में जमकर पानी आया था। इससे भ्यूंडार और खीरों तो तबाह हुए ही पूरे बदरीनाथ हाइवे से सटकर बहती अलकनंदा ने भी जमकर उत्पात मचाया।

गांव के लोगों के मुताबिक 14 जून से ही बरसात शुरू हो गई थी। यह बरसात लगातर होती रही पर अलकनंदा ने तबाही 17 जून को मचाई। यही वह दिन था जिस दिन केदारनाथ में तबाही हुई। खीरों गाड़ में केदार से ही पानी आता है। यह ठीक उसी तरह है जैसे कि डोडीताल से हनुमान गंगा भी निकलती है और उत्तरकाशी में असी वैली में भी वहीं से पानी आता है।

अलकनंदा में भी पानी आ गया
खीरों में ऊफान आया तो अलकनंदा में भी पानी आ गया। खीरों गांव के लोगों के मुताबिक रात डेढ़ बजे से ही इस नदी में ऊफान आना शुरू हो गया था। भयंकर बरसात के बीच में जिसे जो मिला वही समेटकर ऊपर की ओर निकल भागा। सुबह होते-होते खीरों का पानी इतना बढ़ा कि आसपास जो भी जद में आया बह गया।

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