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या तो टाइगर बचा लो या फिर पैसा ही कमा लो!
अमर उजाला, हल्द्वानी, रामनगर
Updated Sun, 27 Oct 2013 12:01 PM IST
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शासन भले ही दाबका नदी में खनन का काम निजी क्षेत्र को देने की तैयारी कर रहा हो, लेकिन खनन शुरू होने से पहले दाबका क्षेत्र में टाइगर हैबीटेड का पेच लग गया है।
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नेशनल बोर्ड ऑफ वाइल्ड लाइफ (एनबीडब्ल्यूएल) ने बाघ का इलाका प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए खनन प्रतिबंधित करने को कहा है। इसके बाद केंद्रीय वन मंत्रालय की फॉरेस्ट एडवाइजरी कमेटी (एफएसी) ने रिपोर्ट जंगलात से मांगी है।
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दाबका क्षेत्र का निरीक्षण
इसके तहत वैज्ञानिक और जंगलात के अधिकारियों ने शनिवार को दाबका क्षेत्र का निरीक्षण किया है। अब रिपोर्ट के बाद ही खनन पर तस्वीर साफ हो सकेगी।
दाबका का इलाका टाइगर हैबीटेड रहा है। इसी के मद्देनजर जब केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने खनन की 10 साल की अनुमति दी थी तो खनन इलाका कम करने के साथ उत्तरी क्षेत्र में खनन प्रतिबंध कर दिया था।
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नेशनल बोर्ड ऑफ वाइल्ड लाइफ
इससे बाघ और दूसरे वन्यजीवों का मूवमेंट प्रभावित न हो लेकिन नेशनल बोर्ड ऑफ वाइल्ड लाइफ इससे भी संतुष्ट नहीं है। जंगलात के सूत्रों के अनुसार मई में एफएसी को पत्र भेजते हुए खनन प्रतिबंधित करने को कहा गया।
इसके बाद मंत्रालय ने राज्य सरकार से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी है। बाद में प्रमुख वन संरक्षक डा. आरबीएस रावत ने मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं परमजीत सिंह की अध्यक्षता में जंगलात और वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट आफ इंडिया (डब्ल्यूआईआई देहरादून) में कमेटी बनाकर अध्ययन रिपोर्ट देने को कहा।
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दाबका खनन क्षेत्र में निरीक्षण
इसी के तहत टीम ने दाबका खनन क्षेत्र में निरीक्षण किया। टीम ने स्थानीय लोगों से भी बातचीत की है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी जाएगी, जहां से एफएसी को रिपोर्ट जाएगी।
अंतिम फैसला केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय करेगा। निरीक्षण टीम में वैज्ञानिक एस सेन, सीसीएफ धनंजय मोहन, सीएफ विवेक पांडे, डीएफओ कहकशां, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के प्रतिनिधि भी शामिल थे।
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इसी इलाके में हुआ था बाघ का शिकार
दाबका का इलाका बाघ से भरपूर रहा है। 18 अप्रैल को छोई गांव के पास एक बाघ का शिकार किया गया था। उसका शत-विक्षत शव बरामद हुआ था। इस केस के अपराधी आज तक पकड़े नहीं जा सके हैं।