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उत्तराखंड में दवा खरीद पर फिलहाल रोक

Fri, 08 Apr 2016 10:52 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 08 Apr 2016 10:52 PM IST
सार

  • सीएमओ के स्तर से नहीं खरीदी जा सकी दवाएं
  • अभी तक नहीं हो पाई मुख्य चिकित्साधिकारी स्तर से दवा खरीद
  • नीति के अनुसार सीएमओ स्तर से खरीदी जाएंगी 30 फीसदी दवाएं

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 Medicine purchases on hold in uttarakhand. 
दवा

विस्तार

प्रदेश में जिला स्तर से दवाओं की खरीद पर फिलहाल रोक लग गई है। लंबा समय बीतने के बाद भी मुख्य चिकित्साधिकारियों के स्तर से दवा की खरीद नहीं हो सकी है। नई औषधि क्रय नीति के अनुसार कुल दवाओं की 30 फीसदी जिला स्तर से ही खरीदी जानी है। शेष 70 फीसदी दवाओं की खरीद स्वास्थ्य महानिदेशालय के स्तर से होनी है।

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नई औषधि क्रय नीति लागू होने के बाद से प्रदेश में दवाओं की खरीद काफी कम हुई है। नीति में 70 फीसदी दवाओं की खरीद महानिदेशालय और 30 फीसदी सीएमओ कार्यालय के स्तर से करने का प्रावधान है। इसके लिए नियम काफी सख्त किए गए हैं। 
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23 फीसदी कम कीमत पर करानी होगी दवा उपलब्ध 
राज्य से बाहर की फर्म का 70 करोड़ और राज्य की फर्म का 20 करोड़ रुपये का टर्नओवर होने की अनिवार्यता रखी गई है। आपूर्ति करने वाली फर्म को 23 फीसदी कम कीमत पर दवा उपलब्ध करानी होगी। 
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इसके चलते सीएमओ स्तर पर दवा उपलब्ध कराने में कोई भी फर्म दिलचस्पी नहीं दिखा रही है। ई टेंडरिंग की जटिलताओं के चलते भी पूरी प्रक्रिया में देरी हो रही है। ई टेंडरिंग की शर्तों के अनुसार डिजिटल सिग्नेचर समेत अन्य शर्तों में पहले की तुलना में काफी अधिक समय लग रहा है। 

महानिदेशालय स्तर से भी सभी दवाओं की खरीद नहीं हो पाई है। इसके चलते अस्पतालों में कुछ दवाओं की कमी लगातार बनी हुई है। जिससे मरीज बाजार से महंगे दामों पर दवा खरीदने को मजबूर हैं। 

क्रय नीति में संशोधन की कवायद में जुटा में विभाग

 Medicine purchases on hold in uttarakhand. 
मानव शरीर पर प्रतिकूल असर के मद्देनजर इन फिक्स डोज कांबिनेशन ड्रग्स को बैन किया गया है।

सीएमओ स्तर से दवा खरीद में नाकाम रहा स्वास्थ्य विभाग अब औषधि क्रय नीति में संशोधन की कवायद में जुटा है। दवाओं की खरीद ना हो पाने के पीछे नई औषधि क्रय नीति के जटिल प्रावधानों को सबसे प्रमुख कारण माना जा रहा है। 

प्रदेश की फर्म के 20 करोड़ व बाहरी फर्म के 70 करोड़ टर्नओवर और 23 फीसदी कम कीमत पर दवा उपलब्ध कराने जैसी शर्तों के चलते कोई भी टेंडर में दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है। तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री से लेकर सचिव स्वास्थ्य तक को मानना पड़ा है कि नीति में बदलाव की जरूरत है। इसको लेकर कवायद भी शुरू हो गई है। इसमें फर्म के टर्न ओवर की लिमिट और दवाओं की कीमत में बदलाव का मामला प्रमुख है। 

दवा खरीद की ई टेंडरिंग की प्रक्रिया जटिल और विस्तृत है। डिजिटल सिग्नेचर जैसी प्रक्रिया भी काफी समय लेती है। अगर नीति में बदलाव होगा तो उसी के अनुसार दवाओं की खरीद की जाएगी। 
- डा. सुशील अग्रवाल, सीएमओ

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