{"_id":"6ae0a06dd87296daf40a1240","slug":"wildlife-destroying-crops-farmers-in-dalmisain-distressed-kotdwar-news-c-49-1-sdrn1009-127657-2026-10-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kotdwar News: वन्यजीव उजाड़ रहे फसल, दालमीसैंण के काश्तकार परेशान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kotdwar News: वन्यजीव उजाड़ रहे फसल, दालमीसैंण के काश्तकार परेशान
Tue, 27 Oct 2026 06:30 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
Updated Tue, 27 Oct 2026 06:30 PM IST
विज्ञापन
दुगड्डा (कोटद्वार)। ब्लॉक के दालमीसैंण गांव में वन्यजीवों ने काश्तकारों की फसलों को नुकसान पहुंचाया है। जंगली सुअर और सांभर मंडुवा व धान की फसलों को नष्ट कर रहे हैं। इससे ग्रामीणों के सामने खेती को बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। काश्तकारों ने वन विभाग से गांव की कृषि भूमि की सुरक्षा के लिए सोलर फेंसिंग लगाने की मांग की है।
दालमीसैंण गांव पहले कृषि कार्यों के लिए अपनी पहचान रखता था। वन्यजीवों की बढ़ती संख्या और फसलों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं होने से ग्रामीणों की खेती के प्रति रुचि कम होने लगी थी। एक ओर पलायन के कारण कई क्षेत्रों में कृषि भूमि बंजर होने के कगार पर है वहीं दालमीसैंण के किसान खेतीबाड़ी को महत्व देते हुए खेतों में फसलें उगा रहे हैं। रबी और खरीफ की फसलों को वन्यजीवों से बचाना किसानों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
पूर्व ब्लॉक प्रमुख रुचि कैंतुरा ने भी दालमीसैंण की कृषि भूमि को वन्यजीवों से सुरक्षित रखने के लिए प्रस्ताव भेजा था। ग्रामीणों का कहना है कि फसलों को लगातार नुकसान होने से उनकी मेहनत पर पानी फिर रहा है। काश्तकार कैलाश चंद्र, दिगंबर सिंह, मेहरबान सिंह, सत्येंद्र सिंह, प्रकाश चंद्र, गोविंद सिंह, सरोजनी देवी और आशा देवी सहित अन्य ग्रामीणों के खेतों में वन्यजीवों ने फसलों को क्षति पहुंचाई है। उन्होंने वन विभाग से गांव की कृषि भूमि की सुरक्षा के लिए सोलर फेंसिंग लगाने की मांग की है।
विज्ञापन
दालमीसैंण में वन्यजीवों की ओर से फसलों को नुकसान पहुंचाने का मामला संज्ञान में नहीं है। संबंधित क्षेत्र के वन बीट अधिकारी को नुकसान की रिपोर्ट जल्द प्रस्तुत करने के निर्देश दिए जा रहे हैं।
-रमेश चंद्र सिंह नेगी, रेंजर दुगड्डा।
विज्ञापन
दालमीसैंण गांव पहले कृषि कार्यों के लिए अपनी पहचान रखता था। वन्यजीवों की बढ़ती संख्या और फसलों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं होने से ग्रामीणों की खेती के प्रति रुचि कम होने लगी थी। एक ओर पलायन के कारण कई क्षेत्रों में कृषि भूमि बंजर होने के कगार पर है वहीं दालमीसैंण के किसान खेतीबाड़ी को महत्व देते हुए खेतों में फसलें उगा रहे हैं। रबी और खरीफ की फसलों को वन्यजीवों से बचाना किसानों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
विज्ञापन
पूर्व ब्लॉक प्रमुख रुचि कैंतुरा ने भी दालमीसैंण की कृषि भूमि को वन्यजीवों से सुरक्षित रखने के लिए प्रस्ताव भेजा था। ग्रामीणों का कहना है कि फसलों को लगातार नुकसान होने से उनकी मेहनत पर पानी फिर रहा है। काश्तकार कैलाश चंद्र, दिगंबर सिंह, मेहरबान सिंह, सत्येंद्र सिंह, प्रकाश चंद्र, गोविंद सिंह, सरोजनी देवी और आशा देवी सहित अन्य ग्रामीणों के खेतों में वन्यजीवों ने फसलों को क्षति पहुंचाई है। उन्होंने वन विभाग से गांव की कृषि भूमि की सुरक्षा के लिए सोलर फेंसिंग लगाने की मांग की है।
विज्ञापन
दालमीसैंण में वन्यजीवों की ओर से फसलों को नुकसान पहुंचाने का मामला संज्ञान में नहीं है। संबंधित क्षेत्र के वन बीट अधिकारी को नुकसान की रिपोर्ट जल्द प्रस्तुत करने के निर्देश दिए जा रहे हैं।
-रमेश चंद्र सिंह नेगी, रेंजर दुगड्डा।