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Kotdwar News: जल संस्थान को बजट और ग्रामीणों को पानी का इंतजार
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द्वारीखाल विकासखंड के जुड और देववाड़ी में दर्जनों परिवार पानी के लिए तरस रहे हैं। वहीं जल संस्थान बजट न होने का कारण बताकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है।
द्वारीखाल के जुड-देववाड़ी गांवों की पेयजल लाइन आपदा में क्षतिग्रस्त हो गई थी। तभी से जुड निवासी 40 और देववाड़ी निवासी चार परिवार प्राकृतिक स्रोत पर ही निर्भर हैं। अमर उजाला ने 15 नवंबर के अंक में द्वारीखाल के जुड-देववाड़ी गांवों में बूंद-बूंद पानी को तरसे लोग खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद जल संस्थान से तकनीकी कर्मचारियों को दोनों गांवों में समस्या के समाधान के लिए भेजा गया। क्षेत्रवासियों ने बताया कि कर्मचारियों ने मौके पर मलबे में दबी पाइप लाइनों को तलाशकर उन्हें जोड़ने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिलने पर कर्मचारी बैरंग लौट गए। जब उनसे जानकारी ली गई तो कर्मचारियों ने बताया कि पाइप लाइन जगह-जगह क्षतिग्रस्त है और मलबे में दबी है। यह बड़ा काम है, इसके लिए बजट नहीं है। बजट मिलने पर ही लाइन की मरम्मत हो पाएगी। इससे ग्रामीणों में निराशा छा गई।
वहीं, जल संस्थान के अधिशासी अभियंता अभिषेक वर्मा ने बताया कि संबंधित जेई को मौका मुआयना कर वास्तविक रिपोर्ट मांगी जा रही है। आपदा से प्रभावित क्षेत्रों में कार्य कराने के लिए बजट नहीं मिला है। फिर भी दो गांवों के ग्रामीणों के सामने पेयजल संकट की स्थिति को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी।
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द्वारीखाल के जुड-देववाड़ी गांवों की पेयजल लाइन आपदा में क्षतिग्रस्त हो गई थी। तभी से जुड निवासी 40 और देववाड़ी निवासी चार परिवार प्राकृतिक स्रोत पर ही निर्भर हैं। अमर उजाला ने 15 नवंबर के अंक में द्वारीखाल के जुड-देववाड़ी गांवों में बूंद-बूंद पानी को तरसे लोग खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद जल संस्थान से तकनीकी कर्मचारियों को दोनों गांवों में समस्या के समाधान के लिए भेजा गया। क्षेत्रवासियों ने बताया कि कर्मचारियों ने मौके पर मलबे में दबी पाइप लाइनों को तलाशकर उन्हें जोड़ने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिलने पर कर्मचारी बैरंग लौट गए। जब उनसे जानकारी ली गई तो कर्मचारियों ने बताया कि पाइप लाइन जगह-जगह क्षतिग्रस्त है और मलबे में दबी है। यह बड़ा काम है, इसके लिए बजट नहीं है। बजट मिलने पर ही लाइन की मरम्मत हो पाएगी। इससे ग्रामीणों में निराशा छा गई।
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वहीं, जल संस्थान के अधिशासी अभियंता अभिषेक वर्मा ने बताया कि संबंधित जेई को मौका मुआयना कर वास्तविक रिपोर्ट मांगी जा रही है। आपदा से प्रभावित क्षेत्रों में कार्य कराने के लिए बजट नहीं मिला है। फिर भी दो गांवों के ग्रामीणों के सामने पेयजल संकट की स्थिति को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी।
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