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Kotdwar News: ईको सेंसिटिव जोन में शामिल करने का ग्रामीणों ने किया विरोध
Sun, 19 Oct 2025 03:36 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
Updated Sun, 19 Oct 2025 03:36 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कोटद्वार। रिखणीखाल ब्लॉक के पैनों पट्टी-2 के अंतर्गत बंजा देवी, रथुवाढाब, तैड़िया, कांडानाला, कालिकों गांव के ग्रामीणों की बंजा देवी में बैठक हुई। बैठक में ग्रामीणों ने क्षेत्र के इन गांवों को ईको सेंसिटिव जोन में शामिल करने का पुरजोर विरोध किया। कहा कि किसी भी गांव को इको सेंसिटिव जोन में शामिल नहीं होने दिया जाएगा।
बैठक में राजस्व उपनिरीक्षक विवेक शाह ने इस संबंध में एसडीएम की ओर से प्रेषित पत्र का हवाला दिया। कहा कि हाईकोर्ट नैनीताल में इस संबंध में इंडिपेंडेंट मेडिकल इनिशिएटिव सोसाइटी की ओर से याचिका दायर की गई है। न्यायालय ने इस संबंध में कार्बेट टाइगर रिजर्व प्रशासन को मामले में जनसुनवाई के आदेश दिए हैं। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि इन गांवों के ईको सेंसिटिव जोन में शामिल होने से ग्रामीणों के मूल अधिकार प्रभावित होंगे। विकास कार्यों के लिए वन विभाग की अनुमति जरूरी हो जाएगी, जिससे गांव के विकास कार्य पूरी तरह से प्रभावित होंगे। क्षेत्र के किसी भी गांव को ईको सेंसिटिव जोन में शामिल नहीं होने दिया जाएगा।
बैठक में शामिल लोगों ने चेतावनी दी कि भविष्य में सरकार ने इन गांवों में ईको सेंसिटिव जोन लागू करने के लिए बाध्य किया गया तो क्षेत्रीय जनता व जनप्रतिनिधि आंदोलन को बाध्य होंगे। बैठक में कांडा की ग्राम प्रधान विनीता ध्यानी, कर्तिया की प्रधान पिंकी देवी, जितेंद्र सिंह, चमन सिंह, अंबिका प्रसाद, शिशुपाल सिंह, सूरज कुमार, हरपाल सिंह, कुलदीप, नंदलाल देवरानी आदि मौजूद रहे।
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कोटद्वार। रिखणीखाल ब्लॉक के पैनों पट्टी-2 के अंतर्गत बंजा देवी, रथुवाढाब, तैड़िया, कांडानाला, कालिकों गांव के ग्रामीणों की बंजा देवी में बैठक हुई। बैठक में ग्रामीणों ने क्षेत्र के इन गांवों को ईको सेंसिटिव जोन में शामिल करने का पुरजोर विरोध किया। कहा कि किसी भी गांव को इको सेंसिटिव जोन में शामिल नहीं होने दिया जाएगा।
बैठक में राजस्व उपनिरीक्षक विवेक शाह ने इस संबंध में एसडीएम की ओर से प्रेषित पत्र का हवाला दिया। कहा कि हाईकोर्ट नैनीताल में इस संबंध में इंडिपेंडेंट मेडिकल इनिशिएटिव सोसाइटी की ओर से याचिका दायर की गई है। न्यायालय ने इस संबंध में कार्बेट टाइगर रिजर्व प्रशासन को मामले में जनसुनवाई के आदेश दिए हैं। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि इन गांवों के ईको सेंसिटिव जोन में शामिल होने से ग्रामीणों के मूल अधिकार प्रभावित होंगे। विकास कार्यों के लिए वन विभाग की अनुमति जरूरी हो जाएगी, जिससे गांव के विकास कार्य पूरी तरह से प्रभावित होंगे। क्षेत्र के किसी भी गांव को ईको सेंसिटिव जोन में शामिल नहीं होने दिया जाएगा।
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बैठक में शामिल लोगों ने चेतावनी दी कि भविष्य में सरकार ने इन गांवों में ईको सेंसिटिव जोन लागू करने के लिए बाध्य किया गया तो क्षेत्रीय जनता व जनप्रतिनिधि आंदोलन को बाध्य होंगे। बैठक में कांडा की ग्राम प्रधान विनीता ध्यानी, कर्तिया की प्रधान पिंकी देवी, जितेंद्र सिंह, चमन सिंह, अंबिका प्रसाद, शिशुपाल सिंह, सूरज कुमार, हरपाल सिंह, कुलदीप, नंदलाल देवरानी आदि मौजूद रहे।
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