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Kotdwar News: मसूरी कांड के शहीदों को यूकेडी ने दी श्रद्धांजलि
Sat, 02 Sep 2023 06:56 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
Updated Sat, 02 Sep 2023 06:56 PM IST
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फोटो
शहीदों के सपनों को साकार करने का लिया संकल्प
संवाद न्यूज एजेंसी
कोटद्वार। मसूरी कांड की 29वीं पुण्यतिथि पर यूकेडी की जिला इकाई ने मसूरी कांड के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यकर्ताओं ने दो मिनट का मौन रखा और उनके सपनों को साकार करने के लिए कार्य करने का संकल्प लिया।
शनिवार को पदमपुर स्थित पार्टी कार्यालय में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि वर्ष 1994 में बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक ने उत्तराखंड आंदोलन में भागीदारी की थी। तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार ने आंदोलनकारियों पर दमनकारी नीति अपनाते हुए एक सितंबर 1994 को खटीमा में निहत्थे आंदोलनकारियों पर गोली चला दी थी जिसमें सात आंदोलनकारी शहीद हो गए थे। दूसरी ओर दो सितंबर को मसूरी में शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे आंदोलनकारियों पर भी पुलिस ने गोलियां चला दी थीं जिसमें आंदोलनकारी हंसा धनाई और बेलमती चौहान के साथ चार अन्य आंदोलनकारी भी शहीद हो गए थे। कहा कि जिन सपनाें के लिए शहीदों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी वे आज भी पूरे होते दिखाई नहीं दे रहे हैं। आंदोलनकारी आज भी अपनी पहचान के लिए तरस रहे हैं। इस दौरान यूकेडी के केंद्रीय उपाध्यक्ष महेंद्र सिंह रावत, जिलाध्यक्ष मुकेश चंद्र बड़थ्वाल, गुलाब सिंह, जगमोहन सिंह बिष्ट, कमल किशोर खंतवाल, प्रेम सिंह बिंदवाल, हरि सिंह रावत, दिनेश गौड़, संजू कश्यप, इकरामुद्दीन, पुष्कर सिंह, शशिकांत, मुकेश कुकरेती, विनोद अग्रवाल, गिरधारी डबराल, अभिमन्यु रावत, अर्चना दुदपुड़ी और सरस्वती देवी आदि मौजूद रहे।
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शहीदों के सपनों को साकार करने का लिया संकल्प
संवाद न्यूज एजेंसी
कोटद्वार। मसूरी कांड की 29वीं पुण्यतिथि पर यूकेडी की जिला इकाई ने मसूरी कांड के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यकर्ताओं ने दो मिनट का मौन रखा और उनके सपनों को साकार करने के लिए कार्य करने का संकल्प लिया।
शनिवार को पदमपुर स्थित पार्टी कार्यालय में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि वर्ष 1994 में बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक ने उत्तराखंड आंदोलन में भागीदारी की थी। तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार ने आंदोलनकारियों पर दमनकारी नीति अपनाते हुए एक सितंबर 1994 को खटीमा में निहत्थे आंदोलनकारियों पर गोली चला दी थी जिसमें सात आंदोलनकारी शहीद हो गए थे। दूसरी ओर दो सितंबर को मसूरी में शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे आंदोलनकारियों पर भी पुलिस ने गोलियां चला दी थीं जिसमें आंदोलनकारी हंसा धनाई और बेलमती चौहान के साथ चार अन्य आंदोलनकारी भी शहीद हो गए थे। कहा कि जिन सपनाें के लिए शहीदों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी वे आज भी पूरे होते दिखाई नहीं दे रहे हैं। आंदोलनकारी आज भी अपनी पहचान के लिए तरस रहे हैं। इस दौरान यूकेडी के केंद्रीय उपाध्यक्ष महेंद्र सिंह रावत, जिलाध्यक्ष मुकेश चंद्र बड़थ्वाल, गुलाब सिंह, जगमोहन सिंह बिष्ट, कमल किशोर खंतवाल, प्रेम सिंह बिंदवाल, हरि सिंह रावत, दिनेश गौड़, संजू कश्यप, इकरामुद्दीन, पुष्कर सिंह, शशिकांत, मुकेश कुकरेती, विनोद अग्रवाल, गिरधारी डबराल, अभिमन्यु रावत, अर्चना दुदपुड़ी और सरस्वती देवी आदि मौजूद रहे।
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