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Kotdwar News: दीवारों में कैद बैरिस्टर मुकुंदी लाल की प्रतिमा
Sun, 09 Aug 2026 06:25 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
Updated Sun, 09 Aug 2026 06:25 PM IST
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कोटद्वार। जिन बैरिस्टर मुकुंदी लाल की प्रतिमा को देखकर भावी पीढ़ी को उनके आदर्शों और योगदान से प्रेरणा लेनी थी। शासन-प्रशासन की अनदेखी के चलते वही प्रतिमा पिछले करीब 19 वर्षों से दीवारों में कैद होकर रही गई है। हैरानी की बात यह है कि प्रतिमा को अन्यत्र शिफ्ट करने की अब तक कोई योजना नहीं है। अब लोग न्यायालय परिसर में स्थापित करने की मांग उठा रहे हैं।
गढ़वाल के भीष्म कहे जाने वाले बैरिस्टर मुकुंदी लाल गढ़वाल कमिश्नरी के जनक और गढ़वाली चित्रशैली के उन्नायकों में शामिल थे। भावी पीढ़ी को उनके व्यक्तित्व और कृतित्व से परिचित कराने के उद्देश्य से वर्ष 1987 में बदरीनाथ मार्ग स्थित बच्चा पार्क में उनकी प्रतिमा स्थापित की गई थी। पार्क के लिए संत स्वामीराम ने सत्तर के दशक में तत्कालीन नगर पालिका को तीन लाख रुपये दिए थे। इसके बाद डाकघर के समीप करीब एक बीघा भूमि पर बच्चा पार्क बनाया गया।
वर्ष 2006 में विरोध के बावजूद पालिका ने पार्क की भूमि प्रेक्षागृह निर्माण के लिए दे दी। वर्ष 2015 में प्रेक्षागृह बनकर तैयार हुआ और भूतल की दुकानें भी लीज पर आवंटित कर दी गईं। निर्माण के दौरान प्रतिमा हटाने के बजाय उसे चाहर दीवारी से घेर दिया गया। वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण कुमार भट्ट ने कहा कि प्रेक्षागृह बनने के बाद प्रतिमा दीवारों में कैद हो गई। क्षेत्र के करीब 90 फीसदी लोगों को इसकी जानकारी तक नहीं है। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी और मेयर शैलेंद्र रावत से प्रतिमा को न्यायालय परिसर में सम्मानजनक स्थान पर स्थापित करने की मांग की है।
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जनप्रतिनिधियों और प्रबुद्धजनों की ओर से प्रस्ताव मिलने पर इस मामले को नगर निगम बोर्ड के समक्ष रखा जाएगा जिसमें प्रतिमा को अन्यत्र शिफ्ट करने पर विचार किया जाएगा।
- पीएल शाह, नगर आयुक्त कोटद्वार।
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गढ़वाल के भीष्म कहे जाने वाले बैरिस्टर मुकुंदी लाल गढ़वाल कमिश्नरी के जनक और गढ़वाली चित्रशैली के उन्नायकों में शामिल थे। भावी पीढ़ी को उनके व्यक्तित्व और कृतित्व से परिचित कराने के उद्देश्य से वर्ष 1987 में बदरीनाथ मार्ग स्थित बच्चा पार्क में उनकी प्रतिमा स्थापित की गई थी। पार्क के लिए संत स्वामीराम ने सत्तर के दशक में तत्कालीन नगर पालिका को तीन लाख रुपये दिए थे। इसके बाद डाकघर के समीप करीब एक बीघा भूमि पर बच्चा पार्क बनाया गया।
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वर्ष 2006 में विरोध के बावजूद पालिका ने पार्क की भूमि प्रेक्षागृह निर्माण के लिए दे दी। वर्ष 2015 में प्रेक्षागृह बनकर तैयार हुआ और भूतल की दुकानें भी लीज पर आवंटित कर दी गईं। निर्माण के दौरान प्रतिमा हटाने के बजाय उसे चाहर दीवारी से घेर दिया गया। वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण कुमार भट्ट ने कहा कि प्रेक्षागृह बनने के बाद प्रतिमा दीवारों में कैद हो गई। क्षेत्र के करीब 90 फीसदी लोगों को इसकी जानकारी तक नहीं है। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी और मेयर शैलेंद्र रावत से प्रतिमा को न्यायालय परिसर में सम्मानजनक स्थान पर स्थापित करने की मांग की है।
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जनप्रतिनिधियों और प्रबुद्धजनों की ओर से प्रस्ताव मिलने पर इस मामले को नगर निगम बोर्ड के समक्ष रखा जाएगा जिसमें प्रतिमा को अन्यत्र शिफ्ट करने पर विचार किया जाएगा।
- पीएल शाह, नगर आयुक्त कोटद्वार।