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Kotdwar News: नशाखोरी के खिलाफ 70 के दशक के शराब विरोधी आंदोलनों की जरूरत बताई
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पौड़ी। युवाओं में बढ़ती नशाखोरी, समस्या और समाधान के लिए आयोजित संगोष्ठी में शिक्षाविदों ने छात्रों में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता जताई। कहा कि युवाओं में नशे की लत से सड़क दुर्घटनाओं के साथ युवा विभिन्न प्रकार के अपराधों में लिप्त हो रहे हैं। उन्होंने नशे और नशा तस्करी के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाए जाने पर जोर दिया।
एचएनबी गढ़वाल केंद्रीय विवि के बीजीआर परिसर में राजनीति विज्ञान विभाग की ओर से आयोजित संगोष्ठी का उद्घाटन बतौर मुख्य अतिथि चौधरीचरण सिंह विवि मेरठ के एचओडी राजनीति विज्ञान प्रो. संजीव शर्मा ने किया। उन्होंने कहा कि मैदानी क्षेत्रों के साथ साथ देवभूमि में नशा की प्रवृत्ति लगातार बढ़ रही है। उन्होंने युवाओं में नशे की लत की तथ्यात्मक चर्चा की। मुख्य वक्ता प्रो. दुर्गा कांत चौधरी ने नशे के बहुआयामी प्रकृति और नशे की रोकथाम के मापदंडों को समझते हुए शिक्षण संस्थानों में नशे की स्थिति पर चिंता व्यक्त जताई।
बीजीआर परिसर निदेशक प्रो. यूसी गैरोला व वरिष्ठ शिक्षाविद प्रो. एमएम सेमवाल ने नशे के विरुद्ध 70 के दशक में उत्तराखंड में टिंचरी माई की ओर से शराब के विरुद्ध चलाए गए आंदोलन के साथ ही 1984 गढ़वाल शराब विरोधी जैसे आंदोलनों की वर्तमान में आवश्यकता पर जोर दिया। संगोष्ठी के संयोजक डॉ. मनोज कुमार ने संगोष्ठी के उद्देश्य और महत्व पर विस्तार से रोशनी डाली। इस मौके पर प्रो. रेहाना जैदी, प्रो. पीपी बडोनी, प्रो. अनीता रुडोला, प्रो. रेखा नैथानी और प्रो. पीयूष सिंहा आदि शामिल रहे।
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एचएनबी गढ़वाल केंद्रीय विवि के बीजीआर परिसर में राजनीति विज्ञान विभाग की ओर से आयोजित संगोष्ठी का उद्घाटन बतौर मुख्य अतिथि चौधरीचरण सिंह विवि मेरठ के एचओडी राजनीति विज्ञान प्रो. संजीव शर्मा ने किया। उन्होंने कहा कि मैदानी क्षेत्रों के साथ साथ देवभूमि में नशा की प्रवृत्ति लगातार बढ़ रही है। उन्होंने युवाओं में नशे की लत की तथ्यात्मक चर्चा की। मुख्य वक्ता प्रो. दुर्गा कांत चौधरी ने नशे के बहुआयामी प्रकृति और नशे की रोकथाम के मापदंडों को समझते हुए शिक्षण संस्थानों में नशे की स्थिति पर चिंता व्यक्त जताई।
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बीजीआर परिसर निदेशक प्रो. यूसी गैरोला व वरिष्ठ शिक्षाविद प्रो. एमएम सेमवाल ने नशे के विरुद्ध 70 के दशक में उत्तराखंड में टिंचरी माई की ओर से शराब के विरुद्ध चलाए गए आंदोलन के साथ ही 1984 गढ़वाल शराब विरोधी जैसे आंदोलनों की वर्तमान में आवश्यकता पर जोर दिया। संगोष्ठी के संयोजक डॉ. मनोज कुमार ने संगोष्ठी के उद्देश्य और महत्व पर विस्तार से रोशनी डाली। इस मौके पर प्रो. रेहाना जैदी, प्रो. पीपी बडोनी, प्रो. अनीता रुडोला, प्रो. रेखा नैथानी और प्रो. पीयूष सिंहा आदि शामिल रहे।
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