सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने और न्यूनतम 21 हजार रुपये वेतन देने समेत 12 सूत्री मांगों के समर्थन में उत्तराखंड आशा स्वास्थ्य कार्यकर्ता यूनियन का कार्य बहिष्कार 22वें दिन भी जारी रहा।
सोमवार को तहसील में आशा कार्यकर्ताओं ने जिस देश की बहनें सड़कों पर उस देश का आलम क्या होगा... और बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ... जैसे नारों के साथ धरना दिया। उन्होंने प्रदेश सरकार पर हठधर्मिता का आरोप लगाया। कहा कि उनके आंदोलन को 22 दिन हो गए हैं, लेकिन अभी तक सरकार उनकी सुध नहीं ले रही है। कहा कि वर्ष 2006 से कार्यरत आशाओं का वेतन अभी तक निर्धारित नहीं किया गया है, जिससे उन्हें आर्थिक संकट से जूझना पड़ रहा है। उन्होंने मांगों का समाधान नहीं होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी। इस अवसर पर दुगड्डा ब्लाक अध्यक्ष प्रभा चौधरी, आशा ढौंडियाल, कलावती देवी, सरस्वती काला कल्पना काला, मीना रावत, रोशनी जदली, बबीता, हेमलता, प्रमिला गुसाईं, भागीरथी भंडारी, यशोदा जखमोला और कल्पना बिष्ट आदि मौजूद थे।