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दस साल में भी नहीं बन सका घराट-मुंडला मार्ग
अमर उजाला, कोटद्वार
Updated Sun, 24 Apr 2016 06:56 PM IST
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mugal road
- फोटो : Amar Ujala
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आजादी के 69 वर्ष और उत्तराखंड राज्य निर्माण के 16 साल बाद भी घाड़ क्षेत्र के दस गांवों को यातायात सुविधा नहीं मिल सकी है। क्षेत्र की जनता की मांग पर वर्ष 2005 में एनडी तिवारी सरकार ने लालपुर स्थित घराट से मुंडला के लिए दस किमी सड़क स्वीकृत की थी, लेकिन जटिल वन कानूनों के पेच में सड़क फंस गई। हाल यह है कि इन गांवों के लोगों को कई किमी के फेर में कोटद्वार-रामड़ी मार्ग से आवाजाही करनी पड़ रही है। इसमें उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहा है।
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स्व. सरोजनी देवी लोक विकास समिति के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह नेगी, गजे सिंह, हर्षवर्धन सिंह, संजय सिंह, कुंवर सिंह, धीरज सिंह एवं हरिदत्त का कहना है कि पुराने हरिद्वार मार्ग पर स्थित लालपुर घराट से इन गांवों की पैदल दूरी मात्र छह किमी पड़ती है। लोग आज भी इसी पैदल मार्ग का उपयोग रोजमर्रा के कामों के लिए करते हैं। पैदल न चल पाने वाले लोगों को रामणी-पुलिंडा मार्ग की 21 किमी की दूरी तय करके कोटद्वार पहुंचना पड़ता है। ग्रामीणों के अनुसार, उपजाऊ भूमि होने के कारण इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर साग-सब्जी, फल और खाद्यान्न उत्पादन होता है। यदि इस क्षेत्र को सीधे सड़क सुविधा मिल जाए तो ग्रामीणों को गढ़वाल के प्रवेश द्वार कोटद्वार आने जाने में सुविधा हो जाएगी। लोग गांव में रहकर ही अपना रोजगार स्थापित कर सकते हैं। सड़क व मूलभूत सुविधाओं के अभाव में बढ़ते पलायन के कारण इस इलाके के खेत बंजर व गांव वीरान होते जा रहे हैं।
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ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2005 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी द्वारा घराट-मुंडला मोटर मार्ग दस किमी निर्माण के लिए करीब 1.40 करोड़ रूपये स्वीकृत किए थे। उक्त पैसा लोनिवि दुगड्डा के पास पड़ा है। वर्ष 2009 में लोनिवि, राजस्व विभाग व वन विभाग द्वारा 8.10 हेक्टेयर वन भूमि का संयुक्त सर्वे भी किया गया। लेकिन इसके बाद आगे बात नहीं बढ़ी। मंजूर होने के बाद भी एक इंच मार्ग का निर्माण नहीं हो सका है।
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सड़क निर्माण की मंजूरी शासन से मिली है। इसका पैसा भी विभाग के पास पड़ा है। ऐलीफेंट कॉरीडोर होने के कारण वन विभाग ने सड़क निर्माण की मंजूरी वन्यजीव बोर्ड से मांगी है। वन्यजीव बोर्ड की मंजूरी मिलने के बाद आगे कार्रवाई की जाएगी।
- राजेश चंद्रा, अधिशासी अभियंता लोनिवि दुगड्डा।