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कठूली और सीकू में चाय बागान बनेंगे

Tue, 15 Dec 2015 09:46 PM IST
पौड़ी
पौड़ी Updated Tue, 15 Dec 2015 09:46 PM IST
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पौड़ी जिले के कठूूली और सीकू गांव में चाय की खेती लहलहाएगी। उत्तराखंड चाय विकास बोर्ड ने इन गांवों में चाय के पौधे लगाने का कार्य शुरू कर दिया। इसके अंतर्गत कठूली गांव में जर्मिनेशन पिट भी तैयार कर लिया है। उत्तराखंड चाय विकास बोर्ड की  योजना सफल रही तो कुछ सालों में इन दोनों गांवों में चाय बागान लहलहाते  नजर आएंगे।
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उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में चाय की  खेती की काफी संभावनाएं है। इसको देखते हुए उत्तराखंड चाय विकास बोर्ड की  ओर से चंपावत, बागेश्वर, अल्मोड़ा, चमोली जिले के गैरसैण क्षेत्र समेत कई  जगहों में चाय बागान तैयार किए हैं। कुछ जगहों पर चाय का उत्पादन भी शुरू हो गया है।
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पौड़ी जिले में भी चाय के उत्पादन की अपार संभावनाओं  को देखते हुए उत्तराखंड चाय विकास बोर्ड ने यहां भी इसकी खेती लगाने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। इसके शुरुआती चरण में जिले में खिर्सू ब्लाक के  कठूली गांव और पाबौ ब्लाक की खातस्यूं पट्टी के सीकू गांव में पौधे लगाए जा रहे हैं। इन दोनों गांवों में बोर्ड की ओर से पंद्रह हजार पौध प्रति हेक्टेयर के हिसाब से तीन-तीन लाख चाय के पौधे लगाए जाने हैं।
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उत्तराखंड चाय विकास बोर्ड के पौड़ी जिले के प्रबंधक दिनेश भंडारी ने बताया कि कठूली गांव में पौध तैयार करने के लिए चाय के तीन लाख बीज भी आ गए हैं। इन बीजों को पहले जर्मिनेशन पिट में अंकुरण कराया जाएगा।  इसके बाद इन्हें पैकेटों में लगाकर पौध तैयार की जाएगी। उन्होंने बताया दोनों गांवों में चाय की पौध लगाने के लिए जमीन तैयार करने का कार्य शुरू कर दिया गया है। जिसमें गांव के कई लोगों को लगाया गया है।

सात साल तक लीज में ली जा रही जमीन
पौड़ी। उत्तराखंड चाय विकास बोर्ड के पौड़ी के प्रबंधक दिनेश भंडारी के अनुसार इन गांवों में चाय के बागान बनाने के लिए लोगों से सात साल तक जमीन लीज पर ली जा रही है। एक हेक्टेयर जमीन के एवज में संबंधित परिवार के एक व्यक्ति को सात साल तक रोजगार दिया जा रहा है। इस दौरान उसे चाय के पौधों की गुड़ाई, निराई, चाय निकालने समेत कई कार्यों को सिखाया जाएगा। सात साल बाद संबंधित जमीन में चाय का बागान तैयार होने पर उसे संबंधित व्यक्ति को लौटा दिया जाएगा। बागान से तैयार होने वाली चाय को बोर्ड किसानों से खरीदेगा।


रोजगार का नया साधन मिला
मिदांड गांव की क्षेत्र पंचायत सदस्य सुदामा देवी, कठूली गांव निवासी मनवर सिंह समेत कई लोगों ने उत्तराखंड चाय विकास बोर्ड की इस पहल को सराहनीय बताया। कहा इससे ग्रामीणों को रोजगार का नया साधन मिल रहा है। जंगली जानवरों की डर से अधिकांश किसानों ने अपने खेत बंजर छोड़ दिए थे। बंजर खेतों में अब चाय की बागवानी होगी।
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