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Kotdwar News: आबादी के बीच स्टील फैक्टरियां उगल रही जहरीला धुंआ
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आए दिन आग लगने से उठती है दुर्गंध व धुएं के गुबार
कोटद्वार भाबर के क्षेत्र में चार औद्योगिक क्षेत्र बलभद्रपुर, जशोधरपुर, सिताबपुर और सिगड्डी हैं। इनमें बलभद्रपुर और जशोधरपुर में लोहा गलाकर सरिया व लोहे के एंगल बनाने का काम होता है। जहां पूरे साल फैक्टरियां जहरीला धुआं छोड़ती हैं। इन फैक्टरियों के आसपास के इलाके के लोग यहां मानक के अनुरुप चिमनियां व प्रदूषण कम करने के उपकरणों के न लगे होने की शिकायत जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से करते आ रहे हैं। कई बार के निरीक्षण व छापेमारी के बाद भी प्रदूषण कम होने का नाम नहीं ले रहा है। क्षेत्रीय पार्षद मनीष भट्ट, स्थानीय निवासी उमेश बडोला, देवेंद्र ध्यानी का कहना है कि क्षेत्रवासियों की शिकायत पर स्थानीय प्रशासन यहां कई बार फैक्टरियों को सील कर कार्रवाई करता रहा है, लेकिन ज्यादा काम के लालच में रात के समय लोग प्रदूषण की मार झेलने को विवश हैं। अब इन फैक्टरियों को आबादी से दूर ले जाने की मांग जोर पकड़ने लगी है।
एसडीएम प्रमोद कुमार का कहना है कि इस साल जनवरी व फरवरी में कई फैक्टरियों का निरीक्षण कर उन्हें प्रदूषण नियंत्रण के उपकरण लगाने की हिदायत दी गई। वर्तमान में जनता की ओर से कोई शिकायत नहीं मिली है।
खोह नदी के तट पर स्थित नगर निगम के ट्रंचिंग ग्राउंड में डंप कचरे का निस्तारण न होने से वहां कूड़े का पहाड़ खड़ा हो गया है। गर्मियों में आए दिन आग लगने से आसपास की आबादी दुर्गंध व धुएं के गुबार से परेशान रहती है।
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कोटद्वार भाबर के क्षेत्र में चार औद्योगिक क्षेत्र बलभद्रपुर, जशोधरपुर, सिताबपुर और सिगड्डी हैं। इनमें बलभद्रपुर और जशोधरपुर में लोहा गलाकर सरिया व लोहे के एंगल बनाने का काम होता है। जहां पूरे साल फैक्टरियां जहरीला धुआं छोड़ती हैं। इन फैक्टरियों के आसपास के इलाके के लोग यहां मानक के अनुरुप चिमनियां व प्रदूषण कम करने के उपकरणों के न लगे होने की शिकायत जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से करते आ रहे हैं। कई बार के निरीक्षण व छापेमारी के बाद भी प्रदूषण कम होने का नाम नहीं ले रहा है। क्षेत्रीय पार्षद मनीष भट्ट, स्थानीय निवासी उमेश बडोला, देवेंद्र ध्यानी का कहना है कि क्षेत्रवासियों की शिकायत पर स्थानीय प्रशासन यहां कई बार फैक्टरियों को सील कर कार्रवाई करता रहा है, लेकिन ज्यादा काम के लालच में रात के समय लोग प्रदूषण की मार झेलने को विवश हैं। अब इन फैक्टरियों को आबादी से दूर ले जाने की मांग जोर पकड़ने लगी है।
एसडीएम प्रमोद कुमार का कहना है कि इस साल जनवरी व फरवरी में कई फैक्टरियों का निरीक्षण कर उन्हें प्रदूषण नियंत्रण के उपकरण लगाने की हिदायत दी गई। वर्तमान में जनता की ओर से कोई शिकायत नहीं मिली है।
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खोह नदी के तट पर स्थित नगर निगम के ट्रंचिंग ग्राउंड में डंप कचरे का निस्तारण न होने से वहां कूड़े का पहाड़ खड़ा हो गया है। गर्मियों में आए दिन आग लगने से आसपास की आबादी दुर्गंध व धुएं के गुबार से परेशान रहती है।
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