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Kotdwar News: रोडवेज बसों में परिचालक यात्रियों को नहीं देते हैं ऑनलाइन टिकट
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कोटद्वार। अगर आप कोटद्वार डिपो की रोडवेज बस में पेटीएम से टिकट बनवाकर यात्रा करना चाहते हैं, तो परेशान हो सकते हैं। कोटद्वार रोडवेज डिपो की 76 बसों के बेड़े में एक भी बस ऐसी नहीं है, जिसमें परिचालक पेटीएम अथवा अन्य ऑनलाइन पेमेंट से यात्रियों के टिकट बना सकें।
कोटद्वार रोडवेज डिपो से प्रतिदिन 20 से ज्यादा बसें दिल्ली के लिए चलाई जाती हैं।
अन्य बसें दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्र और हरिद्वार, देहरादून, कालागढ़ आदि पर्वतीय एवं मैदानी क्षेत्रों के लिए चलती हैं। इन सभी बसों में इलेक्ट्रिक मशीनों में डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, पेटीएम आदि अन्य ऑनलाइन माध्यम से टिकट बनाने की सुविधा तो है, लेकिन परिचालकों द्वारा टिकट नहीं बनाए जाते हैं। उनका तर्क रहता है कि नेटवर्क न होने पर मशीन से टिकट नहीं बन पाता है। यात्री के खाते से टिकट की धनराशि कट जाती है। टिकट नहीं बनने पर यात्री को बस में सफर कराना संभव नहीं हो पाता है। ऐसे में कई बार स्टाफ और यात्रियों के बीच टकराव की स्थिति बन जाती है।
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पौड़ी से दिल्ली का सफर कर रहे अनिरुद्ध ने बताया कि भूलवश उनका पर्स घर छूट गया। अन्य सभी काम तो वह पेटीएम से करते हैं। जब उन्होंने परिचालक से ऑनलाइन टिकट देने की बात कही तो उसने मना कर दिया। मजबूरन उन्हें कोटद्वार में एक परिचित से धनराशि की व्यवस्था करनी पड़ी। यात्री सीडी शर्मा ने बताया कि यह दिक्कत केवल कोटद्वार की ही बसों में है, अन्य बसों में आसानी से टिकट बन जाते हैं।
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न तो कभी किसी यात्री ने शिकायत दर्ज कराई और न ही कभी किसी परिचालक ने इस पर चर्चा की। यह अब मामला संज्ञान में आया है। इसे प्रभावी बनाने के लिए बेहतर व्यवस्था जुटाई जाएगी। -अनुराग पुरोहित, एआरएम, कोटद्वार डिपो
कोटद्वार रोडवेज डिपो से प्रतिदिन 20 से ज्यादा बसें दिल्ली के लिए चलाई जाती हैं।
अन्य बसें दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्र और हरिद्वार, देहरादून, कालागढ़ आदि पर्वतीय एवं मैदानी क्षेत्रों के लिए चलती हैं। इन सभी बसों में इलेक्ट्रिक मशीनों में डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, पेटीएम आदि अन्य ऑनलाइन माध्यम से टिकट बनाने की सुविधा तो है, लेकिन परिचालकों द्वारा टिकट नहीं बनाए जाते हैं। उनका तर्क रहता है कि नेटवर्क न होने पर मशीन से टिकट नहीं बन पाता है। यात्री के खाते से टिकट की धनराशि कट जाती है। टिकट नहीं बनने पर यात्री को बस में सफर कराना संभव नहीं हो पाता है। ऐसे में कई बार स्टाफ और यात्रियों के बीच टकराव की स्थिति बन जाती है।
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पौड़ी से दिल्ली का सफर कर रहे अनिरुद्ध ने बताया कि भूलवश उनका पर्स घर छूट गया। अन्य सभी काम तो वह पेटीएम से करते हैं। जब उन्होंने परिचालक से ऑनलाइन टिकट देने की बात कही तो उसने मना कर दिया। मजबूरन उन्हें कोटद्वार में एक परिचित से धनराशि की व्यवस्था करनी पड़ी। यात्री सीडी शर्मा ने बताया कि यह दिक्कत केवल कोटद्वार की ही बसों में है, अन्य बसों में आसानी से टिकट बन जाते हैं।
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न तो कभी किसी यात्री ने शिकायत दर्ज कराई और न ही कभी किसी परिचालक ने इस पर चर्चा की। यह अब मामला संज्ञान में आया है। इसे प्रभावी बनाने के लिए बेहतर व्यवस्था जुटाई जाएगी। -अनुराग पुरोहित, एआरएम, कोटद्वार डिपो