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कोटद्वार में दुग्धशाला खुली तो श्रीनगर डेरी पर संकट

Sat, 26 Mar 2016 10:12 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Sat, 26 Mar 2016 10:12 PM IST
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 एक ओर करोड़ों का घाटा, दूसरी ओर कर्मचारियों की बार-बार हड़ताल। उस पर एक ही जनपद में दूसरी दुग्धशाला खोलने की तैयारी। ऐसे में गढ़वाल दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ (आंचल डेरी) की हालात सुधरने से रही। डेरी विकास विभाग फिर कोटद्वार में दुग्धशाला खोलने जा रहा है। खास बात यह है कि आंचल डेरी की श्रीनगर में लगभग 80 फीसदी दूध कोटद्वार से ही सप्लाई होता है। रुद्रप्रयाग और पौड़ी के शेष हिस्से से मात्र 20 फीसदी दूध मिल पाता है। ऐसी स्थितियों में आंचल डेरी श्रीनगर के हालात सुधरने की उम्मीदें कम हो जाएगी।
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यहां बता दे कि वर्ष 1976 में कोटद्वार में चिलिंग सेंटर (दुग्ध अवशीतन केंद्र) की स्थापना की गई थी। वर्ष 1985 में इस केंद्र को सुदृढ़कर विपणन कार्य होने लगा। वर्ष 1991 में श्रीनगर में 20 हजार लीटर (20 केएल) की फीडर बैलेसिंग डेरी की स्थापना के साथ ही कोटद्वार की समितियों का इसमें विलय कर दिया गया।
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वर्तमान में आंचल डेरी श्रीनगर में औसतन प्रतिदिन 5200 से 5500 लीटर दूध एकत्रित होता है। डेरी में  कोटद्वार चिलिंग सेंटर से सबसे अधिक दूध बिक्री के लिए पहुंचता है। अकेले कोटद्वार से यहां करीब 4500 लीटर दूध आता है। जबकि पौड़ी जिले के शेष भाग और रुद्रप्रयाग जिले से लगभग 900 लीटर दूध ही उपलब्ध होता है।
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ऐसे में श्रीनगर डेरी पूर्ण रूप से कोटद्वार पर निर्भर है। इसे देखते हुए डेरी विकास विभाग ने कोटद्वार में पांच केएल क्षमता की दुग्धशाला खोलने का निर्णय लिया है। हाल में इसका शिलान्यास भी हो गया है। कोटद्वार में दुग्धशाला खुलने से सिर्फ एक हजार लीटर दूध के भरोसे श्रीनगर डेरी का चलना मुश्किल है। यहां 20 केएल की डेरी चलाने, कर्मचारियों की तनख्वाह और बिजली-पानी के खर्चे पर प्रतिमाह 30 लाख रुपये तक खर्चा आता है।


कोट-
कोटद्वार में डेरी खोलने का फैसला उच्च स्तर पर लिया गया है। एक बार गांवों से कोटद्वार चिलिंग सेंटर में दूध एकत्रित करने,  श्रीनगर भेजने और डेरी से पैकिंग के बाद फिर कोटद्वार में बिक्री के लिए भेजने पर भी लागत ज्यादा आ रही है।-  जीएस मौर्य प्रधान प्रबंधक, आंचल डेरी श्रीनगर
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