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सुखरो नदी के कटाव से निंबूचौड़-सत्तीचौड़ मार्ग बहा

Sat, 28 Aug 2021 09:59 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sat, 28 Aug 2021 09:59 PM IST
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Nimbuchaur-Satichaur road shed due to the erosion of Sukhro river
उफनाई सुखरो नदी से बहा निंबूचौड़-सत्तीचौड़ संपर्क मार्ग। - फोटो : KOTDWAR
क्षेत्र में भारी बारिश से उफनाई सुखरो और ग्वालगढ़ नदियों ने अपने तटवर्ती इलाके में भारी तबाही मचा दी है। सुखरो नदी के कारण हुए कटाव से जहां निंबूचौड़-सत्तीचौड़ संपर्क मार्ग बह गया है, वहीं सुखरो मोटर पुल के पिलरों को भी खतरा बना हुआ है।
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शुक्रवार रात से हो रही बारिश से कोटद्वार क्षेत्र की सभी नदियां उफान पर हैं। सबसे ज्यादा नुकसान सुखरो और खोह नदी से हुआ है। सुखरो और उसकी सहायक ग्वालगढ़ नदी ने मवाकोट से लेकर सत्तीचौड़, निंबूचौड़ और खूनीबड़ तक बड़े पैमाने पर कटाव कर दिया। इससे तटवर्ती इलाके को खतरा पैदा हो गया है। पार्षद गीता नेगी और नागरिक उमेश नौटियाल ने जिला प्रशासन और वन विभाग से ग्वालगढ़ और सुखरो नदी का रुख बीचोंबीच डायवर्ट करने की मांग की है। उनका कहना है कि जिस क्षेत्र में खतरा बना हुआ है, वह क्षेत्र लैंसडौन वन प्रभाग की आरक्षित वन भूमि में पड़ता है। सुखरो नदी के कटाव से नदी पर बने दोनों मोटर पुलों पर भी खतरा बना हुआ है। सबसे ज्यादा खतरा सिमलचौड़-निंबूचौड़ वाले पुल को है। 385 मीटर स्पान का यह पुल वर्ष 2011-12 में बनकर तैयार हुआ था जिससे कोटद्वार भाबर की दो लाख की आबादी के साथ ही सिडकुल के जशोधरपुर और सिगड्डी इंडस्ट्रियल एरिया को आवागमन की सुविधा मिलती है। आगे चलकर यही मार्ग लालढांग-हरिद्वार मार्ग से मिलता है।
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पार्षद गीता नेगी, उमेश नौटियाल, स्थानीय नागरिक जगमोहन सिंह रावत, अमरदीप सिंह रावत, सुरेंद्र ध्यानी ने जिला प्रशासन, शासन और सरकार से जल्द ही सुखरो नदी पर सुरक्षा कार्य करवाने व निंबूचौड़ से खूनीबड़ तक मजबूत सुरक्षा दीवार बनाने की मांग की। एसडीएम योगेश मेहरा ने कहा कि लोनिवि और सिंचाई विभाग को फौरी इंतजाम करने के लिए कह दिया गया है।
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कोट:
सुखरो मोटर पुल पर बाढ़ और भू-कटाव से हुए नुकसान का निरीक्षण कर लिया गया है। पुल पर लगातार निगरानी की जा रही है। पुल के पिलरों की मिट्टी बही है। खतरे को देखते हुए वायर क्रेट और सुरक्षात्मक प्रबंध किए जा रहे हैं।-निर्भय सिंह, अधिशासी अभियंता लोनिवि दुगड्डा
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