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पूरे स्कूल भवन का बजट खपा दिया एक मंजिल में
बैजरो
Updated Thu, 14 Jan 2016 05:13 PM IST
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2007 में जिस विद्यालय भवन के जीर्ण-शीर्ण होने के कारण दो मंजिला नया भवन बनाने के लिए 83 लाख 60 हजार रुपये स्वीकृत हुए थे, उसकी पूरी राशि कार्यदायी संस्था ने महज एक मंजिल में ही खर्च कर दी। अब पिछले चार साल से कार्य बंद है और बच्चों को टपकती छत के नीचे बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। राजकीय इंटर कॉलेज बैजरो की ये हालत विभागीय दावों की पोल खोल रहा है।
बता दें कि इस स्कूल में आज अलग-अलग कक्षा के 275 विद्यार्थी पढ़ते हैं। पूरे भवन में कुल आठ कक्षाएं बननी थीं लेकिन केवल भवन का ढांचा खड़ा कर छोड़ दिया गया। आठ साल पहले जब भवन जर्जर अवस्था में हो गया तो विद्यालय के निर्माण के लिए उत्तर प्रदेश निर्माण निगम ने 83 लाख 60 हजार का बजट दिया। लेकिन कार्यदाई संस्था पूरी लागत एक मंजिल में ही खपाकर चलती बनी। वर्तमान में आलम यह है कि चार साल से विद्यालय का कार्य बंद है। अब बच्चों को आधे-अधूरे जर्जर भवन में बैठकर पढ़ना पड़ रहा है। बारिश होने पर यहां छतों से पानी टपकता है। शिक्षा विभाग के पास इस मामले की पूरी जानकारी होने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।
कनिष्ठ प्रमुख लक्ष्मी देवी, बैजरो के प्रधान अरविंद सिंह, व्यापार संघ बैजरो के अध्यक्ष विनोद रावत, योगेश बंगारी, हर्षपाल चंद, शशिदेवी ने विभाग पर बच्चों के भविष्य और स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। कहा कि विभागीय अधिकारियों, विधायक से लेकर सांसद व मुख्यमंत्री तक कई बार गुहार लगा चुकी है, लेकिन भवन निर्माण में कार्रवाई नहीं हो रही है। विगत चार वर्षों से निर्माण कार्य ठप है कक्षा कक्षों की कमी के चलते छात्रों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।
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प्रधानाचार्य राजेंद्र सिंह रावत ने बताया कि विद्यालय के भवन के लिए आला अधिकारियों को अवगत कराया जाता है, लेकिन भवन निर्माण को लेकर कार्रवाई नहीं हो रही है।
कोट
- आरएस सैनी, उत्तर प्रदेश निर्माण निगम के सहायक अभियंता
बजट पहले भेजा जा चुका था, लेकिन जब काम शुरू किया गया तो पता चला कि भवन की नींव कमजोर थी। उसमें ज्यादा धनराशि खर्च हो गई। इससे बजट राशि बीच में ही खत्म हो गई। अब आगे और बजट मिला तो काम पूरा करा दिया जाएगा।
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बता दें कि इस स्कूल में आज अलग-अलग कक्षा के 275 विद्यार्थी पढ़ते हैं। पूरे भवन में कुल आठ कक्षाएं बननी थीं लेकिन केवल भवन का ढांचा खड़ा कर छोड़ दिया गया। आठ साल पहले जब भवन जर्जर अवस्था में हो गया तो विद्यालय के निर्माण के लिए उत्तर प्रदेश निर्माण निगम ने 83 लाख 60 हजार का बजट दिया। लेकिन कार्यदाई संस्था पूरी लागत एक मंजिल में ही खपाकर चलती बनी। वर्तमान में आलम यह है कि चार साल से विद्यालय का कार्य बंद है। अब बच्चों को आधे-अधूरे जर्जर भवन में बैठकर पढ़ना पड़ रहा है। बारिश होने पर यहां छतों से पानी टपकता है। शिक्षा विभाग के पास इस मामले की पूरी जानकारी होने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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कनिष्ठ प्रमुख लक्ष्मी देवी, बैजरो के प्रधान अरविंद सिंह, व्यापार संघ बैजरो के अध्यक्ष विनोद रावत, योगेश बंगारी, हर्षपाल चंद, शशिदेवी ने विभाग पर बच्चों के भविष्य और स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। कहा कि विभागीय अधिकारियों, विधायक से लेकर सांसद व मुख्यमंत्री तक कई बार गुहार लगा चुकी है, लेकिन भवन निर्माण में कार्रवाई नहीं हो रही है। विगत चार वर्षों से निर्माण कार्य ठप है कक्षा कक्षों की कमी के चलते छात्रों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।
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प्रधानाचार्य राजेंद्र सिंह रावत ने बताया कि विद्यालय के भवन के लिए आला अधिकारियों को अवगत कराया जाता है, लेकिन भवन निर्माण को लेकर कार्रवाई नहीं हो रही है।
कोट
- आरएस सैनी, उत्तर प्रदेश निर्माण निगम के सहायक अभियंता
बजट पहले भेजा जा चुका था, लेकिन जब काम शुरू किया गया तो पता चला कि भवन की नींव कमजोर थी। उसमें ज्यादा धनराशि खर्च हो गई। इससे बजट राशि बीच में ही खत्म हो गई। अब आगे और बजट मिला तो काम पूरा करा दिया जाएगा।