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औषधीय पौधों से महकने लगी है नर्सरी
पौड़ी
Updated Thu, 21 Jan 2016 08:21 PM IST
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खेती और बागवानी से मुंह मोड़ने वालों के लिए बुंगीधार चौथान क्षेत्र के कांडई गांव निवासी बच्ची राम ढौंडियाल एक मिसाल बन गए हैं। उन्होंने अपनी नर्सरी में विभिन्न प्रजातियों की बीस हजार से भी ज्यादा पौध तैयार की है। उसमें औषधीय पौधों के अलावा चीड़, देवदार, बांज और पांगर आदि वनजाति के पौधे भी शामिल हैं।
पिछले 28 वर्षों से इस काम में जुटे बच्ची राम चौथान क्षेत्र की जगतपुरी बाजार में फोटोग्राफर थे। वर्ष 1987 में उन्होंने गढ़वाल वन प्रभाग के तत्कालीन डीएफओ कैलाश चौधरी के कहने पर अपनी नर्सरी में पौध तैयार करने का काम शुरू किया। पहले उन्होंने चीड़, देवदार, बांज, पांगर आदि वन जाति के पौध तैयार की। पहले साल उन्होंने करीब सात हजार पौध तैयार की। अपनी नर्सरी में उत्पादित पौधों को ग्राम पंचायतों, वन पंचायतों और वन विभाग को बेचना शुरू किया।
वह बताते हैं कि उस दौरान पचास पैसा प्रति पौध बिकता था। अच्छा मुनाफा मिलने पर नर्सरी को बढ़ाना शुरू कर दिया। वर्तमान में वह करीब बीस नाली जमीन में नर्सरी बनाकर बागवानी कर रहे हैं। अब वह आंवला, एलोवेरा, सतावर, तेजपत्ता, बड़ी इलायची जैसी औषधीय प्रजाति की पौध भी तैयार कर रहे हैं। उनकी नर्सरी में दो महिलाएं भी काम करती हैं।
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अल्मोड़ा तक जाती है पौध
बच्ची राम बताते हैं कि वह अपनी नर्सरी में तैयार पौधों को पौड़ी जिले के थलीसैण, बीरोंखाल, अल्मोड़ा के स्याल्दे, चमोली जिले गैरसैण ब्लाक में बेचते हैं। उनका कहना है कि पहाड़ में नर्सरी, बागवानी और सब्जी उत्पादन में अच्छी आय की काफी संभावनाएं है। लगन और मेहनत से कार्य करने की जरूरत है।
कोट
विभिन्न प्रजातियों की पौध के साथ औषधीय पौधों को बढ़ावा देना अन्य किसानों के लिए प्रेरणादायी है। बच्चीराम ने बड़ी इलायची के पांच सौ पौधे लगाए हैं जो अब फल देने लगे हैं। यह आय का भी अच्छा स्रोत है। - डा. नरेंद्र कुमार, जिला उद्यान अधिकारी-पौड़ी गढ़वाल
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पिछले 28 वर्षों से इस काम में जुटे बच्ची राम चौथान क्षेत्र की जगतपुरी बाजार में फोटोग्राफर थे। वर्ष 1987 में उन्होंने गढ़वाल वन प्रभाग के तत्कालीन डीएफओ कैलाश चौधरी के कहने पर अपनी नर्सरी में पौध तैयार करने का काम शुरू किया। पहले उन्होंने चीड़, देवदार, बांज, पांगर आदि वन जाति के पौध तैयार की। पहले साल उन्होंने करीब सात हजार पौध तैयार की। अपनी नर्सरी में उत्पादित पौधों को ग्राम पंचायतों, वन पंचायतों और वन विभाग को बेचना शुरू किया।
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वह बताते हैं कि उस दौरान पचास पैसा प्रति पौध बिकता था। अच्छा मुनाफा मिलने पर नर्सरी को बढ़ाना शुरू कर दिया। वर्तमान में वह करीब बीस नाली जमीन में नर्सरी बनाकर बागवानी कर रहे हैं। अब वह आंवला, एलोवेरा, सतावर, तेजपत्ता, बड़ी इलायची जैसी औषधीय प्रजाति की पौध भी तैयार कर रहे हैं। उनकी नर्सरी में दो महिलाएं भी काम करती हैं।
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अल्मोड़ा तक जाती है पौध
बच्ची राम बताते हैं कि वह अपनी नर्सरी में तैयार पौधों को पौड़ी जिले के थलीसैण, बीरोंखाल, अल्मोड़ा के स्याल्दे, चमोली जिले गैरसैण ब्लाक में बेचते हैं। उनका कहना है कि पहाड़ में नर्सरी, बागवानी और सब्जी उत्पादन में अच्छी आय की काफी संभावनाएं है। लगन और मेहनत से कार्य करने की जरूरत है।
कोट
विभिन्न प्रजातियों की पौध के साथ औषधीय पौधों को बढ़ावा देना अन्य किसानों के लिए प्रेरणादायी है। बच्चीराम ने बड़ी इलायची के पांच सौ पौधे लगाए हैं जो अब फल देने लगे हैं। यह आय का भी अच्छा स्रोत है। - डा. नरेंद्र कुमार, जिला उद्यान अधिकारी-पौड़ी गढ़वाल