{"_id":"674fec0493aee169870c8d49","slug":"malan-bridge-construction-17-months-passed-now-wait-for-four-months-kotdwar-news-c-5-1-gkp1010-562128-2024-12-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"मालन पुल निर्माण : 17 महीने बीत गए, अब चार माह का इंतजार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मालन पुल निर्माण : 17 महीने बीत गए, अब चार माह का इंतजार
विज्ञापन
विज्ञापन
कोटद्वार। कोटद्वार भाबर की लाइफ लाइन भाबर रोड पर मोटाढाक और हल्दूखाता के बीच स्थित मालन नदी का पुल टूटे हुए 17 महीने बीत गए हैं। शासन, प्रशासन और कार्यदायी एजेंसी के दावे पर विश्वास करें तो अब पुल का निर्माण कार्य पूरा होने में केवल 4 माह का इंतजार रह गया है। निर्माणाधीन पुल के 12 में से दो पिलर बनकर तैयार हो चुके हैं, जबकि 7 अन्य पिलर भी आकार लेने लगे हैं। वैकल्पिक मार्ग से हिचकोले खाकर परेशानी में आवाजाही कर रहे क्षेत्रवासियों की निगाह पुल का निर्माण पूरा होने पर टिकी है।13 जुलाई, 2023 को बाढ़ व भू-कटाव से क्षतिग्रस्त हुए मालन नदी के पुल को टूटे हुए 17 महीने बीत चुके हैं। अब तक दिसंबर, 2024 का लक्ष्य लेकर पुल निर्माण में जुटी लोनिवि दुगड्डा ने पुल निर्माण के लिए तीन महीने का समय और बढ़वा दिया है। बरसात के बाद लोनिवि की कार्यदायी एजेंसी के काम में तेजी आई। कार्यदायी एजेंसी अब तक 9 पिलरों के स्लैब हटाकर एप्रोच रोड व तीन पुराने पिलरों पर शिफ्ट कर निर्माण कर रही है। नए पिलर बनने के बाद पुराने तीन पिलरों पर रखे गए स्लैब हटाकर उनमें शिफ्ट किए जाएंगे। तब ये तीन पुराने पिलर ध्वस्त कर नए बनाए जाएंगे।
क्षेत्रवासियों की निगाह पुल के निर्माण पर टिकी
मालन पुल टूटने के बाद से ही मालन पार के आठ वार्डों के साथ ही लालढांग तक की करीब 50 हजार की आबादी, सिडकुल कर्मी, शिक्षक व कर्मचारी समेत सभी लोग रोजमर्रा के काम के लिए वैकल्पिक मार्ग पर हिचकोले खाकर परेशानी में आवाजाही कर रहे हैं। लोगों की नजर पुल के निर्माण पर टिकी है।
वेल तकनीक से बन रहे सभी 12 पिलर
आईआईटी बीएचयू के वैज्ञानिकों की ओर से मालन पुल पर बढ़ते वाहनों के दबाव, नदी के बहाव को देखते हुए पुल के सभी 12 पिलरों को वेल तकनीक से बनाने के लिए तैयार किए गए डिजायन व डीपीआर के हिसाब से काम हो रहा है। मालन पुल पर कुल 13 स्लैब थे। जिसमें एक स्लैब तब नदी में गिरने से टूट गया था। उसे नया बनाया जाएगा। बाकी 12 स्लैब को लिफ्ट व शिफ्ट तकनीक से हटाकर सुरक्षित रखे गए हैं। सभी पिलर वेल तकनीक से बनाए जा रहे हैं।
विज्ञापन
आईआईटी बीएचयू के डिजायन के अनुसार मालन पुल के पिलरों का निर्माण वेल तकनीक से चल रहा है। दो पिलर बनकर तैयार हो गए हैं। सात पिलर भी आकार लेने लगे हैं। 31 मार्च से पहले पुल तैयार कर दिया जाएगा।
-निर्भय सिंह, अधिशासी अभियंता लोनिवि दुगड्डा।
क्षेत्रवासियों की निगाह पुल के निर्माण पर टिकी
मालन पुल टूटने के बाद से ही मालन पार के आठ वार्डों के साथ ही लालढांग तक की करीब 50 हजार की आबादी, सिडकुल कर्मी, शिक्षक व कर्मचारी समेत सभी लोग रोजमर्रा के काम के लिए वैकल्पिक मार्ग पर हिचकोले खाकर परेशानी में आवाजाही कर रहे हैं। लोगों की नजर पुल के निर्माण पर टिकी है।
विज्ञापन
वेल तकनीक से बन रहे सभी 12 पिलर
आईआईटी बीएचयू के वैज्ञानिकों की ओर से मालन पुल पर बढ़ते वाहनों के दबाव, नदी के बहाव को देखते हुए पुल के सभी 12 पिलरों को वेल तकनीक से बनाने के लिए तैयार किए गए डिजायन व डीपीआर के हिसाब से काम हो रहा है। मालन पुल पर कुल 13 स्लैब थे। जिसमें एक स्लैब तब नदी में गिरने से टूट गया था। उसे नया बनाया जाएगा। बाकी 12 स्लैब को लिफ्ट व शिफ्ट तकनीक से हटाकर सुरक्षित रखे गए हैं। सभी पिलर वेल तकनीक से बनाए जा रहे हैं।
विज्ञापन
आईआईटी बीएचयू के डिजायन के अनुसार मालन पुल के पिलरों का निर्माण वेल तकनीक से चल रहा है। दो पिलर बनकर तैयार हो गए हैं। सात पिलर भी आकार लेने लगे हैं। 31 मार्च से पहले पुल तैयार कर दिया जाएगा।
-निर्भय सिंह, अधिशासी अभियंता लोनिवि दुगड्डा।