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एक घंटे बंद लिफ्ट में फंसे मरीज और तीमारदार
ब्यूरो/ अमर उजाला कोटद्वार
Updated Thu, 18 Feb 2016 08:49 PM IST
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राजकीय संयुक्त चिकित्सालय कोटद्वार के ट्रामा सेंटर की लिफ्ट एक घंटे बंद होने पर उसमें एक मरीज और तीमारदार फंसे रहे। एक घंटे की लंबी जद्दोजहद के बाद किसी तरह इलेक्ट्रीशियन ने लिफ्ट खोलकर उन्हें बाहर निकाला।
बृहस्पतिवार को दुगड्डा निवासी संजय कुमार गर्ग अपनी भाभी राधा को दिखाने के लिए ट्रामा सेंटर पहुंचे। वहां जब उन्हें डॉक्टर नहीं मिले तो वे साढे़ नौ बजे लिफ्ट से नीचे की ओर आ रहे थे। नीचे आने पर लिफ्ट का दरवाजा नहीं खुला। उन्होंने लिफ्ट में लगा अलार्म बजाया लेकिन किसी ने नहीं सुना। उसके बाद उन्होंने दरवाजे भी खटखटाया पर किसी ने भी उनकी आवाज नहीं सुनी। उसके बाद उन्होंने किसी परिचित को फोन किया तब जाकर परिचित ने अस्पताल प्रशासन को सूचना दी। उसके बाद इलेक्ट्रीशियन ने किसी तरह लिफ्ट को खोलकर उनको बाहर निकाला।
हो सकता था बड़ा हादसा
संजय कुमार गर्ग ने बताया कि लिफ्ट रुकने से उनकी भाभी की सांस फूलने लगी थी। वह बार-बार लिफ्ट खुलवाने को कह रही थी। यदि एक घंटे के बाद भी लिफ्ट नहीं खोली जाती कोई बड़ा हादसा हो सकता था। उन्होंने कहा कि आपातकाल जैसी स्थिति के लिए लिफ्ट के अंदर अलार्म लगाया है लेकिन जब उस अलार्म को सुनने वाला ही कोई नहीं है तो इसका फायदा क्या है। अस्पताल प्रशासन की इस तरह की लापरवाही मरीजों की जान पर भारी पड़ सकती है।
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सीएमएस आईएस सामंत का कहना है कि कई बार इस तरह की दिक्कतें आ जाती हैं लेकिन उसको समय रहते ठीक करवा दिया जाता है। अलार्म सुनने वाला व्यक्ति जेनरेटर और बिजली के कई काम करता है, इसलिए वह अलार्म को सुन नहीं पाया होगा।
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बृहस्पतिवार को दुगड्डा निवासी संजय कुमार गर्ग अपनी भाभी राधा को दिखाने के लिए ट्रामा सेंटर पहुंचे। वहां जब उन्हें डॉक्टर नहीं मिले तो वे साढे़ नौ बजे लिफ्ट से नीचे की ओर आ रहे थे। नीचे आने पर लिफ्ट का दरवाजा नहीं खुला। उन्होंने लिफ्ट में लगा अलार्म बजाया लेकिन किसी ने नहीं सुना। उसके बाद उन्होंने दरवाजे भी खटखटाया पर किसी ने भी उनकी आवाज नहीं सुनी। उसके बाद उन्होंने किसी परिचित को फोन किया तब जाकर परिचित ने अस्पताल प्रशासन को सूचना दी। उसके बाद इलेक्ट्रीशियन ने किसी तरह लिफ्ट को खोलकर उनको बाहर निकाला।
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हो सकता था बड़ा हादसा
संजय कुमार गर्ग ने बताया कि लिफ्ट रुकने से उनकी भाभी की सांस फूलने लगी थी। वह बार-बार लिफ्ट खुलवाने को कह रही थी। यदि एक घंटे के बाद भी लिफ्ट नहीं खोली जाती कोई बड़ा हादसा हो सकता था। उन्होंने कहा कि आपातकाल जैसी स्थिति के लिए लिफ्ट के अंदर अलार्म लगाया है लेकिन जब उस अलार्म को सुनने वाला ही कोई नहीं है तो इसका फायदा क्या है। अस्पताल प्रशासन की इस तरह की लापरवाही मरीजों की जान पर भारी पड़ सकती है।
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सीएमएस आईएस सामंत का कहना है कि कई बार इस तरह की दिक्कतें आ जाती हैं लेकिन उसको समय रहते ठीक करवा दिया जाता है। अलार्म सुनने वाला व्यक्ति जेनरेटर और बिजली के कई काम करता है, इसलिए वह अलार्म को सुन नहीं पाया होगा।