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Kotdwar News: नवंबर से ड्राइविंग ट्रैक पर टेस्ट के बाद ही बनेंगे लाइसेंस, तैयारी में जुटा विभाग
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कोटद्वार। कोटद्वार भाबर क्षेत्र के अंतर्गत झंडीचौड़ पश्चिमी में 6.50 करोड़ की लागत से 1.12 हेक्टेयर क्षेत्रफल में परिवहन विभाग की ऑटोमेटेड टेस्टिंग लेन (एटीएस) भवन और ड्राइविंग ट्रैक बनकर तैयार हो चुका है। एटीएस में तो मशीनें लगने के बाद ही काम शुरू हो पाएगा, लेकिन आगामी नवंबर माह से ड्राइविंग ट्रैक पर टेस्ट लेकर ही लाइसेंस बनाने की तैयारी चल रही है। इस सिलसिले में सहायक परिवहन आयुक्त और सहायक निदेशक सड़क सुरक्षा ने एटीएस और ट्रैक का निरीक्षण किया। उन्होंने आपदा से क्षतिग्रस्त एटीएस और ड्राइविंग ट्रैक परिसर की चाहरदीवारी और सुरक्षा दीवार बनाने के लिए प्रस्ताव बनाकर संबंधित विभाग को भेजने की बात कही।कोटद्वार में परिवहन विभाग की ऑटोमेटेड टेस्टिंग लेन और ड्राइविंग ट्रैक का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। अब यहां पर केवल मशीनों का आना बाकी है। ट्रैक और एटीएस के निरीक्षण के लिए सहायक परिवहन आयुक्त अनीता चंदोला और सहायक निदेशक सड़क सुरक्षा नरेश सिंघल समेत परिवहन अधिकारी बृहस्पतिवार को यहां पहुंचे थे।
एआरटीओ शशि दूबे, परिवहन अधिकारी हरीश सती और प्राविधिक निरीक्षक विकास सिंह ने उन्हें ऑटोमेटेड टेस्टिंग लेन और ड्राइविंग ट्रैक का निरीक्षण कराया। उन्होंने आपदा से हुए नुकसान का भी जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने ड्राइविंग टेस्टिंग का डेमो भी लिया। बताया कि आगामी नवंबर माह से टेस्टिंग के बाद ही लाइसेंस बनाए जाएंगे। इसके लिए तैयारी की जा रही है।
एआरटीओ शशि दूबे ने बताया कि बरसात से हुई क्षति का आगणन तैयार करने के लिए सिंचाई विभाग को कहा गया है। आगणन तैयार करने के बाद जिला प्रशासन को भेजा जाएगा। केंद्र में नदी की ओर से सुरक्षा दीवार लगाने की दरकार है।
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पूर्व में बनकर तैयार हो चुका ऑटोमेटेड टेस्टिंग लेन और ड्राइविंग ट्रैक
अगस्त, 2021 में भाबर के झंडीचौड़ पश्चिमी में ऑटोमेटेड टेस्टिंग लेन और ड्राइविंग ट्रैक के लिए 1.12 हेक्टेयर सरकारी भूमि चयनित की गई थी। भूमि चयन के बाद शासन की ओर से ऑटोमेटेड टेस्टिंग लेन और ड्राइविंग ट्रैक के निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजा गया था। केंद्र सरकार की ओर से ऑटोमेटेड टेस्टिंग लेन के लिए 1.66 करोड़ और ड्राइविंग ट्रैक के लिए 4.98 करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित की गई। जिसका सिविल वर्क उत्तराखंड पेयजल निगम को सौंपा गया था। कार्यदायी एजेंसी ने सिविल वर्क पूरा कर लिया है। एआरटीओ शशि दूबे ने बताया कि सिविल वर्क पूरा हो चुका है। ट्रैक व इसके लिए बने भवन को हैंडओवर ले लिया गया है।
एआरटीओ शशि दूबे, परिवहन अधिकारी हरीश सती और प्राविधिक निरीक्षक विकास सिंह ने उन्हें ऑटोमेटेड टेस्टिंग लेन और ड्राइविंग ट्रैक का निरीक्षण कराया। उन्होंने आपदा से हुए नुकसान का भी जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने ड्राइविंग टेस्टिंग का डेमो भी लिया। बताया कि आगामी नवंबर माह से टेस्टिंग के बाद ही लाइसेंस बनाए जाएंगे। इसके लिए तैयारी की जा रही है।
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एआरटीओ शशि दूबे ने बताया कि बरसात से हुई क्षति का आगणन तैयार करने के लिए सिंचाई विभाग को कहा गया है। आगणन तैयार करने के बाद जिला प्रशासन को भेजा जाएगा। केंद्र में नदी की ओर से सुरक्षा दीवार लगाने की दरकार है।
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पूर्व में बनकर तैयार हो चुका ऑटोमेटेड टेस्टिंग लेन और ड्राइविंग ट्रैक
अगस्त, 2021 में भाबर के झंडीचौड़ पश्चिमी में ऑटोमेटेड टेस्टिंग लेन और ड्राइविंग ट्रैक के लिए 1.12 हेक्टेयर सरकारी भूमि चयनित की गई थी। भूमि चयन के बाद शासन की ओर से ऑटोमेटेड टेस्टिंग लेन और ड्राइविंग ट्रैक के निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजा गया था। केंद्र सरकार की ओर से ऑटोमेटेड टेस्टिंग लेन के लिए 1.66 करोड़ और ड्राइविंग ट्रैक के लिए 4.98 करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित की गई। जिसका सिविल वर्क उत्तराखंड पेयजल निगम को सौंपा गया था। कार्यदायी एजेंसी ने सिविल वर्क पूरा कर लिया है। एआरटीओ शशि दूबे ने बताया कि सिविल वर्क पूरा हो चुका है। ट्रैक व इसके लिए बने भवन को हैंडओवर ले लिया गया है।