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Legends of War audience enthralled
ब्यूरो/ अमर उजाला, श्रीनगर
Updated Wed, 30 Mar 2016 10:25 PM IST
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विश्व रंगमंच के दिवस के उपलक्ष्य में उत्सव ग्रुप की ओर से आयोजित गढ़वाली नाटक चक्र शकट व्यूह (कमलव्यूह) को जोरदार मंचन हुआ। कौरव सेना व पांडवों के बीच युद्ध और अर्जुन की ओर से सारे महारथियों को पराजित कर जयद्रथ वध करने के दृश्य से दर्शक रोमांचित हो उठे। ढोल-दमाऊं के थाप के साथ अन्य वाद्य यंत्रों की धुन और महायोद्धाओं के ललकार भरे शब्दों को बीच दर्शकों को कई बार ऐसा महसूस हुआ कि जैसे वह स्वयं युद्ध लड़ रहे हो। कुल मिलाकर चक्र शकट व्यूह नाटक दर्शक खींचने में सफल रहा।
उत्सव ग्रु्प की ओर से आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रमों के समापन अवसर पर जीआईटीआई मैदान में महाभारत के युद्ध पर आधारित चक्र शकट व्यूह नाटक का मंचन किया गया। यह व्यूह रचना कौरव सेनापति गुरु द्रोणाचार्य सिंध नरेश जयद्रथ को बचाने के लिए करते हैं। महाभारत युद्ध के 13 वें दिन चक्रव्यूह में कौरव सेना अर्जुन पुत्र 16 वर्षीय अभिमन्यु का छल से वध कर देती है। पूरी घटना का खलनायक जयद्रथ होता है। यहां तक कि वह वीरगति को प्राप्त हो चुके अभिमन्यु के सिर पर लात मारता है। जयद्रथ के इस कृत्य से क्षुब्ध अर्जुन प्रतिज्ञा करता है कि कल सूर्यास्त होने से पहले जयद्रथ का वध नहीं कर पाया, तो स्वयं चिता में भस्म हो जाएंगे।
जयद्रथ को अर्जुन प्रतिज्ञा से बचाने के लिए गुरु द्रोण चक्र शकट व्यूह की रचना कर जयद्रथ को छिपा देते हैं। यह व्यूह 24 कोस लंबा और पृष्ठ भाग में 10 कोस तक फैला हुआ था। इसी के भीतर पद्मगर्भ नाम व्यूह था। पद्मगर्भ के भीतर सूचिमुख नाम की गुप्त व्यूह रचना की गई। जयद्रथ को यही छिपाया गया था।
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व्यूह इतना विशाल था कि सूर्यास्त तक अर्जुन जयद्रथ तक नहीं पहुंच सकता था। अर्जुन कौरव महारथियों से लड़ता हुआ दोपहर ढलने तक जयद्रथ तक नहीं पहुंच पाया। स्थिति को भांपते हुए भगवान श्रीकृष्ण येागमाया से सूर्य को ढक देते हैं। सूर्यास्त के भ्रम में जयद्रथ बाहर निकल आता है। इसी बीच फिर सूर्य दिखने लगता है और अर्जुन उसका वध कर देता है।
सजीव मंचन ने बढ़ाया आकर्षण
श्रीनगर। नाटक के मंचन में कपड़ों की मदद से मैदान में व्यूह रचना की गई थी। जो काफी आकर्षक थी। व्यूह निर्माण/ सेट गंगा चौहान, राधा कुंवर, हरीश पुरी और अभिषेक बहुगुणा ने तैयार किया था। जबकि निर्देशन डा. राकेश भट्ट, मनीष खाली, भावना भट्ट, दीपक कुमार व पंकज नैथानी ने किया। नाटक की पटकथा शैलेंद्र तिवारी ने गढ़वाली में लिखी है।
अभिनय
जयद्रथ(देवेंद्र गौड़), अर्जुन (लखपत राणा), कृष्ण (अजय प्रताप सिंह), द्रोणाचार्य (मनमोहन भट्ट), कर्ण (दिलवर रावत), दुर्योधन(हरीश पुरी) आदि।
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उत्सव ग्रु्प की ओर से आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रमों के समापन अवसर पर जीआईटीआई मैदान में महाभारत के युद्ध पर आधारित चक्र शकट व्यूह नाटक का मंचन किया गया। यह व्यूह रचना कौरव सेनापति गुरु द्रोणाचार्य सिंध नरेश जयद्रथ को बचाने के लिए करते हैं। महाभारत युद्ध के 13 वें दिन चक्रव्यूह में कौरव सेना अर्जुन पुत्र 16 वर्षीय अभिमन्यु का छल से वध कर देती है। पूरी घटना का खलनायक जयद्रथ होता है। यहां तक कि वह वीरगति को प्राप्त हो चुके अभिमन्यु के सिर पर लात मारता है। जयद्रथ के इस कृत्य से क्षुब्ध अर्जुन प्रतिज्ञा करता है कि कल सूर्यास्त होने से पहले जयद्रथ का वध नहीं कर पाया, तो स्वयं चिता में भस्म हो जाएंगे।
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जयद्रथ को अर्जुन प्रतिज्ञा से बचाने के लिए गुरु द्रोण चक्र शकट व्यूह की रचना कर जयद्रथ को छिपा देते हैं। यह व्यूह 24 कोस लंबा और पृष्ठ भाग में 10 कोस तक फैला हुआ था। इसी के भीतर पद्मगर्भ नाम व्यूह था। पद्मगर्भ के भीतर सूचिमुख नाम की गुप्त व्यूह रचना की गई। जयद्रथ को यही छिपाया गया था।
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व्यूह इतना विशाल था कि सूर्यास्त तक अर्जुन जयद्रथ तक नहीं पहुंच सकता था। अर्जुन कौरव महारथियों से लड़ता हुआ दोपहर ढलने तक जयद्रथ तक नहीं पहुंच पाया। स्थिति को भांपते हुए भगवान श्रीकृष्ण येागमाया से सूर्य को ढक देते हैं। सूर्यास्त के भ्रम में जयद्रथ बाहर निकल आता है। इसी बीच फिर सूर्य दिखने लगता है और अर्जुन उसका वध कर देता है।
सजीव मंचन ने बढ़ाया आकर्षण
श्रीनगर। नाटक के मंचन में कपड़ों की मदद से मैदान में व्यूह रचना की गई थी। जो काफी आकर्षक थी। व्यूह निर्माण/ सेट गंगा चौहान, राधा कुंवर, हरीश पुरी और अभिषेक बहुगुणा ने तैयार किया था। जबकि निर्देशन डा. राकेश भट्ट, मनीष खाली, भावना भट्ट, दीपक कुमार व पंकज नैथानी ने किया। नाटक की पटकथा शैलेंद्र तिवारी ने गढ़वाली में लिखी है।
अभिनय
जयद्रथ(देवेंद्र गौड़), अर्जुन (लखपत राणा), कृष्ण (अजय प्रताप सिंह), द्रोणाचार्य (मनमोहन भट्ट), कर्ण (दिलवर रावत), दुर्योधन(हरीश पुरी) आदि।