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लैंसडौन छावनी को भंग करने की उठी मांग
ब्यूरो/ अमर उजाला, कोटद्वार
Updated Wed, 01 Mar 2017 10:11 PM IST
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हिमाचल प्रदेश की योल छावनी को भंग कर नगर निगम या पंचायत में शामिल करने की केंद्र सरकार की सैद्धांतिक मंजूरी के बाद उत्तराखंड की लैंसडौन छावनी को भंग करने की मांग जोर पकड़ने लगी है।
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उपाध्यक्ष कैंट डा. एसपी नैथानी ने कहा कि योल कैंट के बाद अब लैंसडौन छावनी के लोगों को भी छावनी से मुक्ति की आस जगी है। उन्होंने कहा कि भारत में डिफेंस लैंड का मात्र 0.83 प्रतिशत भू भाग सिविल एरिया में आता है। ऐसे में सरकार सिविल एरिया को कैंट से मुक्त कर छावनी के वाशिंदों को बड़ी राहत दे सकती है। कहा कि योल की तर्ज पर लैंसडौन छावनी को भी भंग कर इसे नगर निगम का दर्जा दिलाने की मांग उठाई जाएगी।
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छावनी परिषद के सदस्य राजेश ध्यानी, इंद्रा रावत, दिनेश रावत, राजेंद्र राना, सुमित्रा नेगी ने कहा कि छावनी परिषद के लोगों को प्रदेश सरकार की ओर से किसी भी प्रकार की योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता। यहां के लोग अच्छे घर बनाना चाहते हैं, पर छावनी के जटिल नियमों के कारण दिक्कतें आती है। लोगों को रोजगार के अवसर नहीं मिल पाते।
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सामाजिक कार्यकर्ता हितेश शर्मा व महिपाल रावत ने कहा कि लैंसडौन पर्यटक नगरी के रूप में विख्यात है, लेकिन छावनी के नियमों के चलते यहां का विकास नहीं हो पा रहा है। लोग मकान, रोजगार के लिए तरस रहे हैं। केंद्र सरकार से लैंसडौन छावनी को सरकार के अधीन लाए जाने की मांग की जाएगी।