आर्य प्रतिनिधि सभा उत्तराखंड और आर्य समाज उत्तराखंड की ओर से आर्य समाज मंदिर में आर्य महासम्मेलन शुरू हुआ। महासम्मेलन का उद्घाटन मुख्य अतिथि पतंजलि योगपीठ हरिद्वार के आचार्य बालकृष्ण ने किया। मुख्य अतिथि आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि गुरुकुल आश्रमों के माध्यम से भावी पीढ़ी को संस्कारवान और चरित्रवान बनाने की जरूरत है। वेदों की शिक्षा का प्रचार कर ही भारत पुन: विश्वगुरु बन सकता है। स्वामी दयानंद सरस्वती के विचारों और वेदों की शिक्षा का प्रचार भी किया जाना चाहिए।
इस मौके पर आचार्य बालकृष्ण ने पांच पीढ़ियों से आर्य समाज मंदिर में सक्रिय भूमिका निभाने वाले परिवारों को सम्मानित किया। सम्मानित होने वालों में आनंद प्रकाश, राजेंद्र ग्रोवर, सुशील कुमार गुप्ता के परिवार शामिल रहे। आर्य कन्या इंटर कॉलेज कोटद्वार की छात्राओं ने स्वामी दयानंद सरस्वती के जीवन के अंतिम क्षणों पर आधारित लघु नाटिका की प्रस्तुति दी। स्वामी प्रणवानंद सरस्वती ने कहा कि आर्य समाज संस्कारों की पाठशाला है। इससे पूर्व प्रथम सत्र में योगाचार्य योगेंद्र मेधावी और सह संयोजक यज्ञदत्त आर्य के सानिध्य में योगाभ्यास एवं ध्यान साधना कार्यक्रम हुआ। आचार्या डॉ. प्रियंवदा वेद भारती और कन्या गुरुकुल नजीबाबाद की ब्रह्मचारिणी छात्राओं ने संध्या एवं यज्ञ किया। अंकित शास्त्री ने भजनों की प्रस्तुतियां दीं। सम्मेलन में नेपाल से आए 52 आर्य समाज के लोगों का दल भी प्रतिभाग कर रहा है। दोपहर में आर्य समाज की ओर से नगर में बैंड बाजों के साथ शोभायात्रा निकाली गई। इस मौके पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद, डॉ. योगेश शास्त्री, महेंद्र आहुजा, डीपी यादव, दयानंद तिवारी, यशपाल शास्त्री और गो सेवा आयोग के अध्यक्ष पंडित राजेंद्र अणथ्वाल आदि मौजूद रहे।