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Kotdwar News: छात्र-छात्राओं को दी मौन पालन के बारे में जानकारी
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कोटद्वार। उत्तराखंड विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान केंद्र (यूसर्क) की ओर से भारत सिंह रावत राजकीय महाविद्यालय रिखणीखाल व केवीआईसी के सहयोग से महाविद्यालय के देवभूमि उद्यमिता केंद्र में उद्यमिता विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत मौन पालन (एपीकल्चर) विषय पर साप्ताहिक प्रशिक्षण कार्यशाला शुरू हुई। पहले दिन छात्रों को मौन पालन के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
कार्यशाला का उद्घाटन यूसर्क की निदेशक प्रो. अनीता रावत ने वर्चुअली किया। कहा कि मौन पालन एक ऐसा परंपरागत व्यवसाय है, जो मानव जाति को लगातार लाभान्वित कर रहा है। यह एक कम खर्चीला घरेलू उद्योग है। इसमें आय, रोजगार व वातावरण शुद्ध रखने की क्षमता है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. बीपी उनियाल ने प्रशिक्षण को विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण एवं आत्मनिर्भर बनने में महत्वपूर्ण बताया।
कहा कि यह एक ऐसा रोजगार है, जिसे समाज के प्रत्येक वर्ग के लोग अपनाकर लाभान्वित हो सकते हैं। मधुमक्खी पालन कृषि व बागवानी उत्पादन को बढ़ाने की क्षमता भी रखता है। यूसर्क की वैज्ञानिक डॉ. मंजू सुंद्रियाल ने यूसर्क की समस्त वैज्ञानिक गतिविधियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने मौन पालन प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्देश्यों से भी अवगत कराया।
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उन्होंने जैवविविधता के संरक्षण में मधुमक्खियों के महत्व, मानवता के लिए पारिस्थितिकी तंत्र में उनकी सेवाएं और मधुमक्खी व अनुकूल वनस्पतियों की भूमिका पर जोर दिया। महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. मनोज उप्रेती ने कहा कि मधुमक्खी पालन, कृषि व बागवानी उत्पादन बढ़ाने की क्षमता भी रखता है।
देवभूमि उद्यमिता योजना के नोडल अधिकारी एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम समन्वयक डॉ. विपिन पंवार ने कहा कि बेरोजगार युवक युवतियां छोटे या बड़े व्यवसाय के रूप में इसे अपनाकर अपनी बेरोजगारी को दूर कर सकते हैं। कार्यक्रम में 85 प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया।
कार्यशाला का उद्घाटन यूसर्क की निदेशक प्रो. अनीता रावत ने वर्चुअली किया। कहा कि मौन पालन एक ऐसा परंपरागत व्यवसाय है, जो मानव जाति को लगातार लाभान्वित कर रहा है। यह एक कम खर्चीला घरेलू उद्योग है। इसमें आय, रोजगार व वातावरण शुद्ध रखने की क्षमता है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. बीपी उनियाल ने प्रशिक्षण को विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण एवं आत्मनिर्भर बनने में महत्वपूर्ण बताया।
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कहा कि यह एक ऐसा रोजगार है, जिसे समाज के प्रत्येक वर्ग के लोग अपनाकर लाभान्वित हो सकते हैं। मधुमक्खी पालन कृषि व बागवानी उत्पादन को बढ़ाने की क्षमता भी रखता है। यूसर्क की वैज्ञानिक डॉ. मंजू सुंद्रियाल ने यूसर्क की समस्त वैज्ञानिक गतिविधियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने मौन पालन प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्देश्यों से भी अवगत कराया।
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उन्होंने जैवविविधता के संरक्षण में मधुमक्खियों के महत्व, मानवता के लिए पारिस्थितिकी तंत्र में उनकी सेवाएं और मधुमक्खी व अनुकूल वनस्पतियों की भूमिका पर जोर दिया। महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. मनोज उप्रेती ने कहा कि मधुमक्खी पालन, कृषि व बागवानी उत्पादन बढ़ाने की क्षमता भी रखता है।
देवभूमि उद्यमिता योजना के नोडल अधिकारी एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम समन्वयक डॉ. विपिन पंवार ने कहा कि बेरोजगार युवक युवतियां छोटे या बड़े व्यवसाय के रूप में इसे अपनाकर अपनी बेरोजगारी को दूर कर सकते हैं। कार्यक्रम में 85 प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया।