शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में आयाम स्थापित कर चुका स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय (एसआरएचयू) अब पहाड़ में किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रशिक्षित कर रहा है। इसके लिए सतपुली के पास तोली गांव में स्थित गौरी हिमालयन कॉलेज ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी संस्थान में क्षेत्र के काश्तकारों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। एसआरएचयू के कुलपति डा. विजय धस्माना ने कहा कि व्यावसायिक खेती अपनाकर काश्तकार आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा सकते हैं।
गौरी हिमालयन कॉलेज ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी संस्थान में बुधवार को ग्राम्या कृषक गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में एसआरएचयू के कुलपति डा. विजय धस्माना ने कहा कि विश्वविद्यालय किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सेंटर फॉर एरोमेटिक प्लांट्स (सीएपी) के साथ मिलकर किसानों के लिए ट्रेनिंग कार्यक्रम चला रहा है, जिसमें भौगोलिक संरचना के अनुसार फसलों के चयन के साथ कृषि में इस्तेमाल होने वाली तकनीक व आधुनिक यंत्रों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। तोली क्षेत्र में मुख्यत: लैमन ग्रास, रोजमैरी की खेती, लहसुन, अदरक व हल्दी की खेती और नर्सरी के कार्यों को बढ़ावा देने पर जोर है। इसके अलावा नींबू का उत्पादन बड़े स्तर पर करने का प्रयास किया गया है। गोष्ठी में शामिल किसानों से जहां उनके अनुभव साझा किए गए, वहीं उन्हें सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम में ग्राम प्रधान विपिन धस्माना, आरडीआई के उपनिदेशक डा. राजीव बिजल्वाण, प्रधानाचार्य अरुण पांथरी, कमल जोशी, पूर्व प्रधानाचार्य परमानंद बलोधी और शिवम ढौंडियाल समेत कई लोग मौजूद रहे।