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बाईस साल बाद भी नहीं हुआ वन भूमि का हस्तांतरण, कैसे खेलगा और बढ़ेगा इंडिया
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कोटद्वार। एक ओर केंद्र सरकार छिपी खेल प्रतिभाओं को उभारने के लिए महत्वाकांक्षी योजना ‘खेलेगा इंडिया, बढ़ेगा इंडिया’ संचालित कर रही है। वहीं जनप्रतिनिधियों और प्रदेश सरकार की उदासीनता के चलते क्षेत्र की खेल प्रतिभाएं दम तोड़ रही हैं। जी हां चार हजार छात्र संख्या वाले पीजी कॉलेज कोटद्वार के पास अभी तक खेल मैदान नहीं है। दरअसल खेल मैदान के लिए महाविद्यालय से सटी लैंसडौन वन प्रभाग की 0.93 हेक्टेयर भूमि का हस्तांरण अभी तक नहीं हो पाया है।
कोटद्वार और आसपास के पर्वतीय क्षेत्र के युवाओं के लिए उच्च शिक्षा की सुविधा नहीं होने के कारण वर्ष 1976 में राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय की स्थापना की गई। पूर्व में भवन के अभाव में बुद्धा पार्क के पीछे डिग्री कॉलेज का संचालन किया जाता था। बाद में शासन की ओर से लैंसडौन वन प्रभाग के कोटद्वार रेंज कार्यालय से सटी भूमि चयनित कर कॉलेज का भवन तैयार किया गया। महाविद्यालय का अपना खेल मैदान नहीं होने के कारण वर्ष 1998 में शासन की ओर से एक हेक्टेयर भूमि खेल मैदान के लिए उपलब्ध कराई गई, लेकिन उक्त भूमि खेल मैदान के लिए पर्याप्त नहीं थी, जिससे आधा-अधूरा मैदान ही तैयार हो पाया। तब उम्मीद थी कि वन विभाग जल्द ही अवशेष 0.93 हेक्टयेर वन भूमि भी महाविद्यालय प्रशासन को हस्तांतरित कर देगा, लेकिन जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा के चलते 22 साल भी उक्त चयनित वन भूमि का हस्तांतरण नहीं हो पाया है।
छात्रसंघ अध्यक्ष हिमांशु बहुखंडी ने कहा कि खेल के मैदान के लिए वन भूमि के हस्तांतरण को राजस्व और वन विभाग की संयुक्त टीमें दो बार सर्वे कर चुकी हैं। इसके साथ ही प्रमुख वन संरक्षक से भी भूमि हस्तांतरण करने की मांग की गई थी, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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उधर, लैंसडौन वन प्रभाग के डीएफओ अखिलेश तिवाड़ी ने कहा कि महाविद्यालय प्रशासन की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई प्रस्ताव नहीं मिला है। महाविद्यालय की ओर से प्रस्ताव मिलने पर उच्चाधिकारियों को प्रस्ताव प्रेषित किया जाएगा।
-फोटो
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कोटद्वार और आसपास के पर्वतीय क्षेत्र के युवाओं के लिए उच्च शिक्षा की सुविधा नहीं होने के कारण वर्ष 1976 में राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय की स्थापना की गई। पूर्व में भवन के अभाव में बुद्धा पार्क के पीछे डिग्री कॉलेज का संचालन किया जाता था। बाद में शासन की ओर से लैंसडौन वन प्रभाग के कोटद्वार रेंज कार्यालय से सटी भूमि चयनित कर कॉलेज का भवन तैयार किया गया। महाविद्यालय का अपना खेल मैदान नहीं होने के कारण वर्ष 1998 में शासन की ओर से एक हेक्टेयर भूमि खेल मैदान के लिए उपलब्ध कराई गई, लेकिन उक्त भूमि खेल मैदान के लिए पर्याप्त नहीं थी, जिससे आधा-अधूरा मैदान ही तैयार हो पाया। तब उम्मीद थी कि वन विभाग जल्द ही अवशेष 0.93 हेक्टयेर वन भूमि भी महाविद्यालय प्रशासन को हस्तांतरित कर देगा, लेकिन जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा के चलते 22 साल भी उक्त चयनित वन भूमि का हस्तांतरण नहीं हो पाया है।
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छात्रसंघ अध्यक्ष हिमांशु बहुखंडी ने कहा कि खेल के मैदान के लिए वन भूमि के हस्तांतरण को राजस्व और वन विभाग की संयुक्त टीमें दो बार सर्वे कर चुकी हैं। इसके साथ ही प्रमुख वन संरक्षक से भी भूमि हस्तांतरण करने की मांग की गई थी, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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उधर, लैंसडौन वन प्रभाग के डीएफओ अखिलेश तिवाड़ी ने कहा कि महाविद्यालय प्रशासन की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई प्रस्ताव नहीं मिला है। महाविद्यालय की ओर से प्रस्ताव मिलने पर उच्चाधिकारियों को प्रस्ताव प्रेषित किया जाएगा।
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