आर्य प्रतिनिधि सभा उत्तराखंड की ओर से आर्य समाज में चल रहे आर्य महासम्मलेन के दूसरे दिन विभिन्न विषयों पर गोष्ठियां हुईं। इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि गुरुकुल समाज की दिशा व दशा तय करते हैं। उन्होंने भावी पीढ़ी को संस्कारवान और चरित्रवान बनाने के लिए वर्तमान परिवेश में गुरुकुल शिक्षा पद्धति को आवश्यक बताया।
सम्मेलन में ‘वर्तमान परिवेश में गुरुकुल शिक्षा पद्धति की आवश्यकता’ विषय पर गोष्ठी हुई। इस मौके पर आचार्या डॉ. प्रियंवदा वेद भारती ने कहा कि आर्य जगत को गुरुकुलों को लेकर गंभीर होना पड़ेगा। समाज को गुरुकुल की आवश्यकता है। कहा कि सभी मातृभूमि की रक्षा तन, मन व धन से करें। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय हरिद्वार के डॉ. दीनदयाल दयाल विद्यालंकार ने कहा कि आर्य सभाओं को संगठित होने का संकल्प लेना होगा। कर्मयोगी संस्थान नोएडा की संस्थापिका आचार्या डॉ. कल्पना आर्य ने कहा कि हमारी शिक्षा विज्ञान आधारित हो लेकिन विज्ञान के नाम पर अनर्थ न हो। जयंत आनंद स्वामी ने कहा कि गुरुकुल आर्य समाज की जड़ है। कार्यक्रम के दौरान गुरुकुल पौधा और कन्या गुरुकुल नजीबाबाद की ब्रह्मचारिणी छात्राओं ने देशभक्ति के गीतों की प्रस्तुतियां दी गईं। इस अवसर पर कार्यकर्ताओं को सम्मानित भी किया गया। सम्मानित होने वालों में दीपक, आधार, पीयूष, रामवीर पुरोहित, दीपक बत्रा, जसपाल, अंकित आर्य, विभु ग्रोवर, प्रद्युम्न, हरीश वर्मा, कमल, आशुतोष वर्मा शामिल रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता स्वामी प्रणवानंद सरस्वती व संचालन आचार्य धनंजय ने की। मुख्य अतिथि सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा के प्रधान सुरेश चंद्र आर्य, दिल्ली आर्य प्रतिनिधि सभा के मंत्री विनय आर्य रहे। इस मौके पर आर्य कन्या पाठशाला कोटद्वार की छात्राओं ने डोला पालकी आंदोलन पर नाटिका की प्रस्तुति दी। इस मौके पर बाबू राम आर्य, ओमप्रकाश शास्त्री, बलवीर सिंह, पूर्ण सिंह, वासुदेव विमल, देवव्रत, चंद्रप्रकाश आर्य आदि मौजूद रहे। महासम्मेलन का संचालन आनंद प्रकाश आर्य ने किया।