{"_id":"5ebac7668ebc3e90644a4933","slug":"hungry-children-were-not-given-food-and-drink-kotdwar-news-drn344085438","type":"story","status":"publish","title_hn":"गुरूग्राम से लौटे प्रवासियों के साथ स्थानीय लोगों और दुकानदारों ने किया दुर्व्यवहार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गुरूग्राम से लौटे प्रवासियों के साथ स्थानीय लोगों और दुकानदारों ने किया दुर्व्यवहार
विज्ञापन
कोटद्वार। अन्य राज्यों से अपने गांव लौट रहे प्रवासियों के साथ स्थानीय लोग दुर्व्यवहार कर रहे हैं। नैनीडांडा ब्लॉक के कमेड़ा गांव के एक प्रवासी ने बताया कि रथुवाढाब, हल्दूखाल बाजार में स्थानीय लोगों और दुकानदारों ने भूख और प्यास से बिलख रहे उनके बच्चों को खाने पीने का सामान नहीं दिया। इस पीड़ा को प्रवासी ने सोशल मीडिया के माध्यम से शेयर किया है।
नैनीडांडा ब्लॉक के ग्राम कमेड़ा तल्ला निवासी प्रवासी जसपाल रावत ने बताया कि उनका परिवार गुरुग्राम (हरियाणा) में रहता है। उन्होंने गत नौ मई को अपनी पत्नी कविता देवी और दो बच्चों को गुरुग्राम से गांव जाने के लिए कोटद्वार डिपो की बस में बैठाया और वह नौकरी के कारण उनके साथ गांव नहीं आ पाए। शाम पांच बजे उनका परिवार अन्य 20 लोगों के साथ कोटद्वार पहुंचा। 10 मई की सुबह सात बजे बस से उन्हें गंतव्य के लिए रवाना कर दिया। रास्ते में बस करीब आधा घंटा रथुवाढाब बाजार में रुकी। इस बीच चालक, परिचालक और साथ गई पुलिस टीम बस से नीचे उतरे और उन्होंने बाजार में नाश्ता किया, जबकि उनके परिवार और अन्य लोगों को कोरोना संक्रमण फैलने का भय दिखाकर न तो बाथरूम के लिए बस से नीचे उतरने दिया और न ही पीने के लिए पानी ही भरने दिया। बच्चों के लिए खाने-पीने का सामान भी नहीं खरीदने दिया। उन्होंने बताया कि यही हाल हल्दूखाल बाजार में भी हुआ। इस पर दोनों बच्चे और उनकी पत्नी किसी तरह 15 किमी पैदल चलकर गांव पहुंचे।
व्यवहार दुर्भाग्यपूर्ण
सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रमोहन जदली ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि हमारी संस्कृति सभी को प्रेम और सम्मान देने की रही है। बच्चों और बहनों के प्रति ऐसा व्यवहार दुर्भाग्यपूर्ण है।
विज्ञापन
शासन की ओर से प्रवासियों के साथ दुर्व्यवहार न करने की हिदायतें दी गई हैं। यह मामला उनके संज्ञान में नहीं है। शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। -विकास अवस्थी प्रभारी तहसीलदार धुमाकोट
विज्ञापन
नैनीडांडा ब्लॉक के ग्राम कमेड़ा तल्ला निवासी प्रवासी जसपाल रावत ने बताया कि उनका परिवार गुरुग्राम (हरियाणा) में रहता है। उन्होंने गत नौ मई को अपनी पत्नी कविता देवी और दो बच्चों को गुरुग्राम से गांव जाने के लिए कोटद्वार डिपो की बस में बैठाया और वह नौकरी के कारण उनके साथ गांव नहीं आ पाए। शाम पांच बजे उनका परिवार अन्य 20 लोगों के साथ कोटद्वार पहुंचा। 10 मई की सुबह सात बजे बस से उन्हें गंतव्य के लिए रवाना कर दिया। रास्ते में बस करीब आधा घंटा रथुवाढाब बाजार में रुकी। इस बीच चालक, परिचालक और साथ गई पुलिस टीम बस से नीचे उतरे और उन्होंने बाजार में नाश्ता किया, जबकि उनके परिवार और अन्य लोगों को कोरोना संक्रमण फैलने का भय दिखाकर न तो बाथरूम के लिए बस से नीचे उतरने दिया और न ही पीने के लिए पानी ही भरने दिया। बच्चों के लिए खाने-पीने का सामान भी नहीं खरीदने दिया। उन्होंने बताया कि यही हाल हल्दूखाल बाजार में भी हुआ। इस पर दोनों बच्चे और उनकी पत्नी किसी तरह 15 किमी पैदल चलकर गांव पहुंचे।
विज्ञापन
व्यवहार दुर्भाग्यपूर्ण
सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रमोहन जदली ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि हमारी संस्कृति सभी को प्रेम और सम्मान देने की रही है। बच्चों और बहनों के प्रति ऐसा व्यवहार दुर्भाग्यपूर्ण है।
विज्ञापन
शासन की ओर से प्रवासियों के साथ दुर्व्यवहार न करने की हिदायतें दी गई हैं। यह मामला उनके संज्ञान में नहीं है। शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। -विकास अवस्थी प्रभारी तहसीलदार धुमाकोट