कारगिल युद्ध में परमवीर चक्र विजेता शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा की बहादुरी पर आधारित फिल्म शेरशाह की कहानी में लैंसडौन निवासी ले. कर्नल चंद्रपाल सिंह पटवाल (रि.) का जिक्र आने और फिल्म के अंत में उनकी फोटो को दिखाने से वे लोकप्रिय हो गए हैं। लैंसडौन पहुंचे पर्यटक उनके साथ सेल्फी ले रहे हैं।
ले. कर्नल चंद्रपाल सिंह ने बताया कि वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान वे 13वीं जम्मू-कश्मीर राइफल्स में लेफ्टिनेंट के पद पर कार्यरत थे। कारगिल युद्ध में पाक घुसपैठियों ने दरास क्षेत्र के प्वाइंट 5140 और 4875 टोलोलिंग रेंज पर कब्जा कर लिया था। 15 हजार से 18 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित इन प्वाइंटों से दुश्मन सेना को खदेड़कर उनके कब्जे से इन पहाड़ियों को खाली कराने का दायित्व उनकी रेजीमेंट को दिया गया, जिसमें कैप्टन विक्रम बत्रा ने अपनी सेना की टुकड़ी को साथ लेकर अदम्य साहस का परिचय देकर दुश्मनों को मार गिराया था। इस युद्ध में 5 जुलाई 1999 को वे शहीद हो गए थे। उनके शानदार पराक्रम के लिए मरणोपरांत उन्हें सेना के सर्वोच्च वीरता पदक परमवीर चक्र से नवाजा गया। वे वीर शहीद के पार्थिव शरीर को उनके गृह स्थल पालमपुर हिमाचल तक ले जाने वाली टीम के प्रमुख सदस्यों में थे। बताया कि शेरशाह फिल्म में कैप्टन विक्रम बत्रा की वीरता की कहानी को दिखाया गया है, जिसमें उन्हें भी कहानी में शामिल करते हुए फिल्म के अंत में उनका फोटो प्रदर्शित किया गया है।