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मूर्तियां गुरुकुल कांगड़ी विवि को देने पर भड़की समिति
ब्यूरो/अमर उजाला कोटद्वार
Updated Wed, 18 Jan 2017 10:15 PM IST
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मूर्तियां गुरुकुल कांगड़ी विवि को देने पर भड़की समिति
- फोटो : अमर उजाला
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कण्वाश्रम में वर्ष 2012 के मिली पुरातात्विक महत्व की दर्जन भर मूर्तियां लैंसडौन वन प्रभाग ने गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय हरिद्वार के सुपुर्द कर दी हैं। करीब पांच महीने बाद इसकी भनक लगने पर कण्वाश्रम विकास समिति भड़क उठी है। समिति ने स्थानीय प्रशासन और समिति को विश्वास में लिए बगैर मूर्तियों को दूसरी संस्था के सुपुर्द करने का पुरजोर विरोध किया है।
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समिति ने कहा कि मूर्तियां भारतीय पुरातत्व विभाग की संपत्ति और राष्ट्रीय धरोहर हैं, जिन्हें गुपचुप तरीके से किसी को नहीं सौंपा जाना चाहिए था। कण्वाश्रम विकास समिति के अध्यक्ष कमांडर बीएस रावत (से.नि.), महामंत्री आभा डबराल और मंत्री चंद्रप्रकाश नैथानी ने बताया कि कण्वाश्रम क्षेत्र में वर्ष 2012 की बरसात में मृग विहार के गदेरे में निकली मूर्तियों में अधिकतर देव प्रतिमाएं और मंदिरों के स्तंभ थे।
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समिति की ओर से इन मूर्तियों को वन विभाग के संरक्षण में देते हुए इसकी जानकारी पुरातत्व विभाग को दी गई। गढ़वाल विश्वविद्यालय के पुरातत्व विभाग की टीम ने भी तब क्षेत्र का निरीक्षण किया था। समिति तभी से इस क्षेत्र में खुदाई की मांग करती आ रही है। इस बीच मूर्तियों के वहां से गायब होने से क्षेत्रवासी परेशान हैं।
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वन विभाग के कर्मचारियों ने बताया कि तीन अगस्त, 2016 को तत्कालीन डीएफओ के आदेश पर गुरुकुल कांगड़ी विवि के सुपुर्द कर दी गई हैं। तत्कालीन डीएफओ नितीशमणि त्रिपाठी के निर्देश पर मूर्तियों को इस शर्त पर गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के प्रोफेसर देवेंद्र कुमार गुप्ता के सुपुर्द किया गया है कि जरूरत पड़ने पर उन्हें लौटा दिया जाएगा।
कण्वाश्रम विकास समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि एक फरवरी से कण्वाश्रम में बसंत पंचमी का तीन दिवसीय मेला लगने जा रहा है। इस दौरान वहां मूर्तियां देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग एकत्र होते हैं। वन विभाग को इससे पूर्व उक्त मूर्तियां पूर्व की भांति कण्वाश्रम मृग विहार में लानी चाहिए।
मैंने हाल में ही शासन के निर्देश पर डीएफओ लैंसडौन का अतिरिक्त कार्यभार संभाला है। मुझे इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है। इस बारे में जानकारी कर आवश्यक कार्रवाई करेंगे।
-एके त्रिपाठी, डीएफओ लैंसडौन (अतिरिक्त प्रभार)।