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Kotdwar News: वीर शहीदों को नमन कर मनाया जीआरआरसी का स्थापना दिवस
Thu, 01 Oct 2026 06:52 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
Updated Thu, 01 Oct 2026 06:52 PM IST
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पद्मश्री बसंती बिष्ट ने लोक संस्कृति की छटा बिखेरी
लैंसडौन। गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंटल सेंटर (जीआरआरसी) का 106वां स्थापना दिवस मंगलवार को हर्षोल्लास और गौरव के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सेंटर के कमांडेंट ब्रिगेडियर विनोद सिंह नेगी, विशिष्ट सेवा मेडल ने की। कार्यक्रम की शुरुआत रेजिमेंटल मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और प्रार्थना से हुई। इसके बाद वार मेमोरियल पर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई और विशेष सैनिक सम्मेलन आयोजित किया गया।
कमांडेंट ब्रिगेडियर नेगी ने रेजिमेंट के अधिकारियों, जेसीओ, अन्य रैंक के जवानों और उनके परिजनों को स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने जवानों से देश सेवा में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए निरंतर प्रेरित रहने का आह्वान किया। गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंटल सेंटर की स्थापना एक अक्तूबर 1921 को लैंसडौन में हुई थी। उस समय रेजिमेंट 18वें इंडियन इन्फेंट्री ग्रुप का हिस्सा बनी थी।
रेजिमेंट में चार बटालियन थीं। बाद में चौथी बटालियन को रेजिमेंट की अन्य बटालियनों के लिए नव नियुक्त रंगरूटों को प्रशिक्षण देने की जिम्मेदारी दी गई। वर्ष 1922 में इसका नाम बदलकर 10वीं बटालियन कर दिया गया और इसकी कमान लेफ्टिनेंट कर्नल के. हेंडरसन ने संभाली।
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समारोह में उत्तराखंड की लोक संस्कृति और जागर परंपरा की प्रतिनिधि पद्मश्री डॉ. बसंती बिष्ट ने सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। डॉ. बिष्ट को वर्ष 2017 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। उन्हें राष्ट्रीय देवी अहिल्या सम्मान, प्रथम लेडीज अवार्ड, उत्तराखंड गौरव सम्मान और तीलू रौतेली पुरस्कार समेत कई सम्मान मिल चुके हैं।
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लैंसडौन। गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंटल सेंटर (जीआरआरसी) का 106वां स्थापना दिवस मंगलवार को हर्षोल्लास और गौरव के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सेंटर के कमांडेंट ब्रिगेडियर विनोद सिंह नेगी, विशिष्ट सेवा मेडल ने की। कार्यक्रम की शुरुआत रेजिमेंटल मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और प्रार्थना से हुई। इसके बाद वार मेमोरियल पर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई और विशेष सैनिक सम्मेलन आयोजित किया गया।
कमांडेंट ब्रिगेडियर नेगी ने रेजिमेंट के अधिकारियों, जेसीओ, अन्य रैंक के जवानों और उनके परिजनों को स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने जवानों से देश सेवा में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए निरंतर प्रेरित रहने का आह्वान किया। गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंटल सेंटर की स्थापना एक अक्तूबर 1921 को लैंसडौन में हुई थी। उस समय रेजिमेंट 18वें इंडियन इन्फेंट्री ग्रुप का हिस्सा बनी थी।
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रेजिमेंट में चार बटालियन थीं। बाद में चौथी बटालियन को रेजिमेंट की अन्य बटालियनों के लिए नव नियुक्त रंगरूटों को प्रशिक्षण देने की जिम्मेदारी दी गई। वर्ष 1922 में इसका नाम बदलकर 10वीं बटालियन कर दिया गया और इसकी कमान लेफ्टिनेंट कर्नल के. हेंडरसन ने संभाली।
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समारोह में उत्तराखंड की लोक संस्कृति और जागर परंपरा की प्रतिनिधि पद्मश्री डॉ. बसंती बिष्ट ने सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। डॉ. बिष्ट को वर्ष 2017 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। उन्हें राष्ट्रीय देवी अहिल्या सम्मान, प्रथम लेडीज अवार्ड, उत्तराखंड गौरव सम्मान और तीलू रौतेली पुरस्कार समेत कई सम्मान मिल चुके हैं।