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Kotdwar News: भूमि संबंधी कानून 2003 की विसंगतियों को दूर करे सरकार

Thu, 07 Nov 2024 10:29 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Thu, 07 Nov 2024 10:29 PM IST
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Government should remove anomalies in land related law 2003

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लैंसडौन। वर्ष 2003 के भूमि संबंधी कानून की विसंगतियों के खिलाफ सामाजिक कार्यकर्ता लामबंद हुए हैं। पत्रकारों से बातचीत में सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि भूमि संबंधी कानून में उत्तराखंड में रह रहे वास्तविक लोगों के हितों की अनदेखी की गई है। विसंगतियों को दूर कर भू-कानून का कट ऑफ इयर 1950 करने की मांग की जा रही है।बृहस्पतिवार को पत्रकार वार्ता में सामाजिक कार्यकर्ता महिपाल रावत व लता खंडेलवाल ने कहा कि छावनी क्षेत्र में कई परिवारों को रहते हुए 100 वर्ष से भी अधिक समय हो गया है और ये परिवार ब्रिटिश सरकार के समय से छावनी परिषद की लीज वाली भूमि पर रह रहे हैं। इन परिवारों को भी वर्ष 2003 में लागू भूमि संबंधी अधिनियम के तहत बाहरी माना गया है। ये लोग उत्तराखंड में 250 वर्गमीटर भूमि ही सिर्फ आवास के लिए खरीदने के पात्र माने गए हैं। लैंसडौन छावनी क्षेत्र में ऐसे परिवार भी हैं, जो आजादी से पूर्व यहां आकर बस गए थे और वे रक्षा मंत्रालय की भूमि की लीज संबंधी जटिलताओं के कारण किरायेदारी में ही जीवन-यापन कर रहे हैं। इनके पास कोई भूमि नहीं है। उन्हें भी बाहरी की श्रेणी में शामिल किया गया है।




सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि इसके विपरीत राज्य निर्माण से पूर्व देश के अलग-अलग कोने से संपन्न लोगों ने उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में कई बीघा भूमि खरीद ली थी। उन्हें उत्तराखंडी और राज्य की असीमित भूमि खरीदने का पात्र माना गया है। प्रस्तावित भू-कानून में इस विसंगति को दूर कर राज्य के वास्तविक लोगों के साथ न्याय करने की मांग की जा रही है। इस संबंध में जल्द ही ज्ञापन भेजकर मांग को पुरजोर तरीके से उठाया जाएगा।
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