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Kotdwar News: पांच दशक बाद भी अधूरी द्वारीखाल-बांघाट सड़क की आस
Thu, 08 Oct 2026 04:28 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
Updated Thu, 08 Oct 2026 04:28 PM IST
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कोटद्वार/दुगड्डा। द्वारीखाल से बांघाट तक मोटर मार्ग की ग्रामीणों की पांच दशक पुरानी मांग अब भी सरकारी फाइलों में अटकी है। सड़क निर्माण को लेकर लोनिवि प्रांतीय खंड लैंसडौन की ओर से शासन को कई बार प्रस्ताव और पत्राचार भेजा जा चुका है लेकिन अंतिम स्वीकृति नहीं मिलने से सड़क निर्माण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई।
ब्रिटिश शासनकाल में दुगड्डा गढ़वाल की प्रमुख मंडी हुआ करती थी। उस दौर में सड़क सुविधा नहीं होने के कारण गढ़वाल के व्यापारी द्वारीखाल-बांघाट के रास्ते पैदल दुगड्डा पहुंचते थे। सामान ढोने के लिए भेड़, बकरी और घोड़ों का इस्तेमाल किया जाता था। अविभाजित उत्तर प्रदेश के समय से ही ग्रामीण इस पुराने पैदल मार्ग को मोटर मार्ग में बदलने की मांग करते आ रहे हैं।
लोनिवि प्रांतीय खंड लैंसडौन ने अधीक्षण अभियंता, 12वें वृत्त लोनिवि पौड़ी को भेजे प्रस्ताव में ग्वीन-बाजागांव-बांघाट मोटर मार्ग के छह किलोमीटर हिस्से के नव निर्माण की योजना भेजी थी। प्रस्ताव के अनुसार पहले चरण में सड़क निर्माण पर 43.50 लाख रुपये और पूरी परियोजना पर 354.30 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है।
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ग्राम ग्वीन निवासी कल्याण सिंह रावत और उपेंद्र सिंह का कहना है कि लंबे समय से मांग किए जाने के बावजूद ग्रामीणों की समस्या की लगातार अनदेखी हो रही है। सड़क बनने से क्षेत्र के लोगों को आवागमन की सुविधा मिलने के साथ कोटद्वार और पौड़ी के बीच दूरी और सफर दोनों आसान होंगे।
1975 में ग्रामीणों ने पारित किया था प्रस्ताव
ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 1975 में बैठक कर द्वारीखाल-बांघाट सड़क निर्माण का प्रस्ताव पारित किया गया था। इसके बाद लोनिवि ने मार्ग का सर्वे भी किया था। ग्रामीणों का दावा है कि यह मार्ग कोटद्वार और पौड़ी के बीच सबसे सुगम रास्ता साबित हो सकता है। सड़क बनने से करीब 40 हजार की आबादी को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद है।
द्वारीखाल-बांघाट पैदल मार्ग को मोटर मार्ग में बदलने की प्रक्रिया शासन स्तर पर गतिमान है। शासन से स्वीकृति मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- उमाशंकर कुकरेती, एएई, लोनिवि लैंसडौन
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ब्रिटिश शासनकाल में दुगड्डा गढ़वाल की प्रमुख मंडी हुआ करती थी। उस दौर में सड़क सुविधा नहीं होने के कारण गढ़वाल के व्यापारी द्वारीखाल-बांघाट के रास्ते पैदल दुगड्डा पहुंचते थे। सामान ढोने के लिए भेड़, बकरी और घोड़ों का इस्तेमाल किया जाता था। अविभाजित उत्तर प्रदेश के समय से ही ग्रामीण इस पुराने पैदल मार्ग को मोटर मार्ग में बदलने की मांग करते आ रहे हैं।
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लोनिवि प्रांतीय खंड लैंसडौन ने अधीक्षण अभियंता, 12वें वृत्त लोनिवि पौड़ी को भेजे प्रस्ताव में ग्वीन-बाजागांव-बांघाट मोटर मार्ग के छह किलोमीटर हिस्से के नव निर्माण की योजना भेजी थी। प्रस्ताव के अनुसार पहले चरण में सड़क निर्माण पर 43.50 लाख रुपये और पूरी परियोजना पर 354.30 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है।
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ग्राम ग्वीन निवासी कल्याण सिंह रावत और उपेंद्र सिंह का कहना है कि लंबे समय से मांग किए जाने के बावजूद ग्रामीणों की समस्या की लगातार अनदेखी हो रही है। सड़क बनने से क्षेत्र के लोगों को आवागमन की सुविधा मिलने के साथ कोटद्वार और पौड़ी के बीच दूरी और सफर दोनों आसान होंगे।
1975 में ग्रामीणों ने पारित किया था प्रस्ताव
ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 1975 में बैठक कर द्वारीखाल-बांघाट सड़क निर्माण का प्रस्ताव पारित किया गया था। इसके बाद लोनिवि ने मार्ग का सर्वे भी किया था। ग्रामीणों का दावा है कि यह मार्ग कोटद्वार और पौड़ी के बीच सबसे सुगम रास्ता साबित हो सकता है। सड़क बनने से करीब 40 हजार की आबादी को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद है।
द्वारीखाल-बांघाट पैदल मार्ग को मोटर मार्ग में बदलने की प्रक्रिया शासन स्तर पर गतिमान है। शासन से स्वीकृति मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- उमाशंकर कुकरेती, एएई, लोनिवि लैंसडौन