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Kotdwar News: हाथियों को जंगल में ही मिलेगा पर्याप्त पीने का पानी, लगेगा सोलर बोरवेल
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कोटद्वार। लैंसडौन वन प्रभाग में अब वन्यजीवों के लिए पीने के पानी की कमी नहीं रहेगी। विभाग की ओर से एक ओर जहां हर रेंज में तालाबों को पुनर्जीवित किया जा रहा है, वहीं सबसे अधिक हाथी प्रभावित क्षेत्र पुलिंडा मार्ग पर हर वक्त पीने का पानी उपलब्ध कराने के लिए सोलर बोरवेल की स्थापना की जा रही है। इससे पुलिंडा मार्ग से खोह नदी और एनएच पर हाथियों की धमक काफी हद तक थमने की उम्मीद है।
वन प्रभाग की ओर से हाथी समेत अन्य जंगली जानवरों को जंगल के भीतर ही पीने का पानी उपलब्ध कराने की कवायद शुरू कर दी गई है। वन विभाग की ओर से विश्व वन्यजीव कोष (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) के सहयोग से पुलिंडा मार्ग पर सोलर बोरवेल स्थापित किया जा रहा है। इससे गर्मियों में पानी की तलाश में हाथी और वन्य जीव खोह नदी का रुख नहीं करेंगे। वहीं, एनएच पर हाथियों की धमक भी रुकेगी। कोटद्वार रेंज में हाथियों की आवाजाही सालभर बनी रहती है। कार्बेट और राजाजी नेशनल पार्क का गलियारा होने के कारण हाथी कोटद्वार रेंज के रास्ते ही आवाजाही करते हैं। कोटद्वार रेंज के जंगलों में अधिकांश बरसाती गदेरे हैं और गर्मियां शुरू होते ही इन गदेरों और प्राकृतिक जल स्रोतों में पानी सूखने के कारण हाथी प्यास बुझाने के लिए खोह नदी पर निर्भर रहते हैं। लैंसडौन वन प्रभाग में करीब 22 वाटर होल और अमृत सरोवर हैं, जिसमें कोटद्वार रेंज में लालपानी, गिंवाई स्रोत, मालन, गूलरझाला और सुखरो में पांच वाटर होल, गिंवाई स्रोत और सुखरो में दो अमृत सरोवर हैं। गर्मियों में इन वाटर होल और अमृत सरोवर में पानी सूख जाता है, जिससे वन विभाग को टैंकरों से इनमें पानी भरना पड़ता है। बजट के अभाव में कई बार पानी की व्यवस्था करना भी विभाग के लिए मुश्किल हो जाता है। जंगल में पानी का अभाव होने पर हाथी गिंवाई बीट के जंगल से कार्बेट टाइगर रिजर्व वन प्रभाग के रिशेप्सन सेंटर के पास एनएच के रास्ते पानी पीने के लिए खोह नदी में उतरते हैं। इससे एनएच पर वन्यजीव-मानव संघर्ष का खतरा बना रहता है। एनएच पर हाथियों की धमक रोकने और उन्हें जंगल के भीतर ही पानी उपलब्ध कराने की कवायद शुरू की गई है। इसके तहत डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के सहयोग से पुलिंडा मार्ग पर जंगल के भीतर सोलर बोरवेल लगाया जाएगा। यह सोलर बोर वैल दिनभर चलेगा और शाम ढलते ही स्वत: बंद हो जाएगा।
गर्मियों में हाथी समेत अन्य वन्य जीवों को जंगल के भीतर ही पानी उपलब्ध कराने के लिए डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की मदद से पुलिंडा मार्ग पर सोलर बोरवेल लगाया जा रहा है। इससे एनएच पर हाथियों की धमक रुकेगी और हाथियों के कारण एनएच पर लगने वाले जाम से भी मुक्ति मिलेगी।
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-एनसी पंत, डीएफओ लैंसडौन वन प्रभाग कोटद्वार।
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वन प्रभाग की ओर से हाथी समेत अन्य जंगली जानवरों को जंगल के भीतर ही पीने का पानी उपलब्ध कराने की कवायद शुरू कर दी गई है। वन विभाग की ओर से विश्व वन्यजीव कोष (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) के सहयोग से पुलिंडा मार्ग पर सोलर बोरवेल स्थापित किया जा रहा है। इससे गर्मियों में पानी की तलाश में हाथी और वन्य जीव खोह नदी का रुख नहीं करेंगे। वहीं, एनएच पर हाथियों की धमक भी रुकेगी। कोटद्वार रेंज में हाथियों की आवाजाही सालभर बनी रहती है। कार्बेट और राजाजी नेशनल पार्क का गलियारा होने के कारण हाथी कोटद्वार रेंज के रास्ते ही आवाजाही करते हैं। कोटद्वार रेंज के जंगलों में अधिकांश बरसाती गदेरे हैं और गर्मियां शुरू होते ही इन गदेरों और प्राकृतिक जल स्रोतों में पानी सूखने के कारण हाथी प्यास बुझाने के लिए खोह नदी पर निर्भर रहते हैं। लैंसडौन वन प्रभाग में करीब 22 वाटर होल और अमृत सरोवर हैं, जिसमें कोटद्वार रेंज में लालपानी, गिंवाई स्रोत, मालन, गूलरझाला और सुखरो में पांच वाटर होल, गिंवाई स्रोत और सुखरो में दो अमृत सरोवर हैं। गर्मियों में इन वाटर होल और अमृत सरोवर में पानी सूख जाता है, जिससे वन विभाग को टैंकरों से इनमें पानी भरना पड़ता है। बजट के अभाव में कई बार पानी की व्यवस्था करना भी विभाग के लिए मुश्किल हो जाता है। जंगल में पानी का अभाव होने पर हाथी गिंवाई बीट के जंगल से कार्बेट टाइगर रिजर्व वन प्रभाग के रिशेप्सन सेंटर के पास एनएच के रास्ते पानी पीने के लिए खोह नदी में उतरते हैं। इससे एनएच पर वन्यजीव-मानव संघर्ष का खतरा बना रहता है। एनएच पर हाथियों की धमक रोकने और उन्हें जंगल के भीतर ही पानी उपलब्ध कराने की कवायद शुरू की गई है। इसके तहत डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के सहयोग से पुलिंडा मार्ग पर जंगल के भीतर सोलर बोरवेल लगाया जाएगा। यह सोलर बोर वैल दिनभर चलेगा और शाम ढलते ही स्वत: बंद हो जाएगा।
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गर्मियों में हाथी समेत अन्य वन्य जीवों को जंगल के भीतर ही पानी उपलब्ध कराने के लिए डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की मदद से पुलिंडा मार्ग पर सोलर बोरवेल लगाया जा रहा है। इससे एनएच पर हाथियों की धमक रुकेगी और हाथियों के कारण एनएच पर लगने वाले जाम से भी मुक्ति मिलेगी।
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-एनसी पंत, डीएफओ लैंसडौन वन प्रभाग कोटद्वार।