{"_id":"66f986d5116b7834bf04128e","slug":"ego-takes-away-intelligence-and-knowledge-acharya-nautiyal-kotdwar-news-c-5-1-gkp1010-513729-2024-09-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"बुद्धि और ज्ञान हर लेता है अहंकार : आचार्य नौटियाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बुद्धि और ज्ञान हर लेता है अहंकार : आचार्य नौटियाल
विज्ञापन
विज्ञापन
कोटद्वार। यह सत्य है कि ज्ञान वह धन है, जिसे कोई चुरा नहीं सकता, लेकिन ये भी सत्य है कि अहंकार ज्ञान और बुद्धि को हर लेता है। मनुष्य के भौतिक, आर्थिक, सामाजिक, नैतिक और चारित्रिक पतन का कारण भी यही अहंकार बनता है। ये बात कथाव्यास भागवताचार्य शिवस्वरूप नौटियाल ने कही। वे श्रीमद्भागवत कथा में प्रवचन कर रहे थे।
नगर के सिम्मलचौड़ में यतिन शाह, निर्मल शाह, शिशुपाल शाह, पुष्कर शाह की ओर से आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा आयोजन के चौथे दिन आचार्य शिवस्वरूप नौटियाल ने कहा कि व्यक्ति को अहंकार नहीं करना चाहिए। अहंकार बुद्धि और ज्ञान का हरण कर लेता है। कथाव्यास ने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का प्रसंग सुनाया कि जब अत्याचारी और अहंकारी कंस के पापों से धरती डोलने लगी, तो भगवान कृष्ण को अवतरित होना पड़ा। सात संतानों के बाद जब देवकी गर्भवती हुईं, तो उन्हें अपनी इस संतान की मृत्यु का भय सता रहा था। भगवान की लीला वे स्वयं ही समझ सकते हैं। भगवान कृष्ण के जन्म लेते ही जेल के सभी बंधन टूट गए और भगवान श्रीकृष्ण गोकुल पहुंच गए। कथाव्यास ने कहा कि जब-जब धरती पर धर्म की हानि होती है, तब-तब भगवान धरती पर अवतरित होते हैं। जैसे ही कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ पूरा पंडाल कृष्ण भगवान की जय-जयकार से गूंजने लगा। वहीं, संगीतमयी वातावरण में भजन प्रस्तुति से वातावरण कृष्णमय हो गया। कथा श्रावण में सिम्मलचौड़, पदमपुर, लालपुर, तड़ियाल चौक एवं आसपास के अनेक लोग शामिल हुए।
नगर के सिम्मलचौड़ में यतिन शाह, निर्मल शाह, शिशुपाल शाह, पुष्कर शाह की ओर से आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा आयोजन के चौथे दिन आचार्य शिवस्वरूप नौटियाल ने कहा कि व्यक्ति को अहंकार नहीं करना चाहिए। अहंकार बुद्धि और ज्ञान का हरण कर लेता है। कथाव्यास ने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का प्रसंग सुनाया कि जब अत्याचारी और अहंकारी कंस के पापों से धरती डोलने लगी, तो भगवान कृष्ण को अवतरित होना पड़ा। सात संतानों के बाद जब देवकी गर्भवती हुईं, तो उन्हें अपनी इस संतान की मृत्यु का भय सता रहा था। भगवान की लीला वे स्वयं ही समझ सकते हैं। भगवान कृष्ण के जन्म लेते ही जेल के सभी बंधन टूट गए और भगवान श्रीकृष्ण गोकुल पहुंच गए। कथाव्यास ने कहा कि जब-जब धरती पर धर्म की हानि होती है, तब-तब भगवान धरती पर अवतरित होते हैं। जैसे ही कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ पूरा पंडाल कृष्ण भगवान की जय-जयकार से गूंजने लगा। वहीं, संगीतमयी वातावरण में भजन प्रस्तुति से वातावरण कृष्णमय हो गया। कथा श्रावण में सिम्मलचौड़, पदमपुर, लालपुर, तड़ियाल चौक एवं आसपास के अनेक लोग शामिल हुए।
विज्ञापन