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Kotdwar News: मटियाल गांव के आपदा प्रभावितों ने की विस्थापन और पुनर्वास की मांग
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संवाद न्यूज एजेंसी
कोटद्वार। दुगड्डा ब्लॉक के घाड़ क्षेत्र के ग्राम पंचायत बल्ली के तोक गांव मटियाल में आपदा से पांच आवासीय भवन क्षतिग्रस्त हो गए हैं। जिससे प्रभावित परिवार खेतों में टैंटों में रहने को मजबूर हैं। प्रभावित परिवारों ने उपजिलाधिकारी सोहन सिंह सैनी को ज्ञापन सौंपकर उनके विस्थापन और पुनर्वास की मांग की है।
ग्रामीण हरेंद्र सिंह, हीरा सिंह, बासुदेव सिंह, बचन सिंह और शंकर सिंह ने ज्ञापन में कहा कि विगत 13 अगस्त को आई आपदा में उनके आवासीय भवन क्षतिग्रस्त हो गए हैँ। प्रशासन द्वारा उन्हें प्राथमिक विद्यालय बल्ली में शिफ्ट किया जा रहा था, लेकिन स्कूल गांव से तीन किमी. दूर है। उनकी गोशालाओं में गाय और बकरियां हैं। उनकी आजीविका का मुख्य साधन पशुपालन ही है। ऐसे में वह उन्हें छोड़कर नहीं जा सकते हैं।
प्रशासन की ओर से उन्हें टैंट और राशन उपलब्ध कराया गया है। जिस पर बेघर हुए सभी पांच परिवार खेतों में टैंट लगाकर रह रहे हैं। कानूनगो राकेश डबराल और राजस्व उपनिरीक्षक हर्षवर्द्धन नौटियाल आपदा से हुए नुकसान का निरीक्षण भी कर चुके हैं।
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प्रभावित परिवारों का कहना है कि आपदा के बाद उनके बच्चे पढ़ाई से वंचित हैं। टैंटों में बिजली का साधन नहीं है। साथ ही उनके पास कैरोसिन की व्यवस्था तक नहीं है। प्रशासन की ओर से उन्हें मोमबत्ती दी गई है, लेकिन टैंटों के भीतर मोमबत्तियां जलाने में दिक्कतें आ रही हैं। कहा कि प्रभावित परिवार आपदा के बाद नारकीय जीवन जी रहे हैं। ज्ञापन में उन्होंने विस्थापन और पुनर्वास की मांग की है।
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कोटद्वार। दुगड्डा ब्लॉक के घाड़ क्षेत्र के ग्राम पंचायत बल्ली के तोक गांव मटियाल में आपदा से पांच आवासीय भवन क्षतिग्रस्त हो गए हैं। जिससे प्रभावित परिवार खेतों में टैंटों में रहने को मजबूर हैं। प्रभावित परिवारों ने उपजिलाधिकारी सोहन सिंह सैनी को ज्ञापन सौंपकर उनके विस्थापन और पुनर्वास की मांग की है।
ग्रामीण हरेंद्र सिंह, हीरा सिंह, बासुदेव सिंह, बचन सिंह और शंकर सिंह ने ज्ञापन में कहा कि विगत 13 अगस्त को आई आपदा में उनके आवासीय भवन क्षतिग्रस्त हो गए हैँ। प्रशासन द्वारा उन्हें प्राथमिक विद्यालय बल्ली में शिफ्ट किया जा रहा था, लेकिन स्कूल गांव से तीन किमी. दूर है। उनकी गोशालाओं में गाय और बकरियां हैं। उनकी आजीविका का मुख्य साधन पशुपालन ही है। ऐसे में वह उन्हें छोड़कर नहीं जा सकते हैं।
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प्रशासन की ओर से उन्हें टैंट और राशन उपलब्ध कराया गया है। जिस पर बेघर हुए सभी पांच परिवार खेतों में टैंट लगाकर रह रहे हैं। कानूनगो राकेश डबराल और राजस्व उपनिरीक्षक हर्षवर्द्धन नौटियाल आपदा से हुए नुकसान का निरीक्षण भी कर चुके हैं।
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प्रभावित परिवारों का कहना है कि आपदा के बाद उनके बच्चे पढ़ाई से वंचित हैं। टैंटों में बिजली का साधन नहीं है। साथ ही उनके पास कैरोसिन की व्यवस्था तक नहीं है। प्रशासन की ओर से उन्हें मोमबत्ती दी गई है, लेकिन टैंटों के भीतर मोमबत्तियां जलाने में दिक्कतें आ रही हैं। कहा कि प्रभावित परिवार आपदा के बाद नारकीय जीवन जी रहे हैं। ज्ञापन में उन्होंने विस्थापन और पुनर्वास की मांग की है।