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डीएफओ के निलंबन पर भड़के कर्मचारी

Tue, 03 Jan 2017 10:18 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, कोटद्वार
ब्यूरो/ अमर उजाला, कोटद्वार Updated Tue, 03 Jan 2017 10:18 PM IST
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DFO employee's suspension broke on.
डीएफओ के निलंबन के विरोध में कोटद्वार रेंज कार्यालय में बैठक करते विभिन्न वन कर्मचारी संगठन के पदाधिकारी। - फोटो : amar ujala.

लैंसडौन वन प्रभाग के रिजर्व फारेस्ट के गेस्ट हाउस प्रकरण में लैंसडौन के प्रभागीय वनाधिकारी के निलंबन का उत्तराखंड के आठ वन कर्मचारी संगठनों ने विरोध किया है। वन कर्मचारी संगठन खुलकर निलंबित डीएफओ मयंक शेखर झा के पक्ष में आ गए हैं। उन्होंने बुधवार से कार्यबहिष्कार कर आंदोलन की चेतावनी दी है।      

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मंगलवार को लैंसडौन वन प्रभाग के डीएफओ के निलंबन पर पनियाली स्थित प्रभागीय वनाधिकारी कोटद्वार कार्यालय में आठ वन संगठनों के पदाधिकारी एकत्र हो गए। बैठक में वक्ताओं ने शासन द्वारा डीएफओ के निलंबन के फैसले का विरोध करते हुए निंदा की। कहा कि डीएफओ मयंक शेखर झा ईमानदार और कर्मठ अधिकारी हैं।
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बिना कारण बताओ नोटिस जारी किए इस प्रकार का फरमान औचित्यहीन है। ऐसे में कोई भी वन कर्मचारी और अधिकारी कैसे काम कर पाएगा। आठ वन कर्मचारी संगठनों ने मुख्यमंत्री से डीएफओ का निलंबन वापस लेने की मांग की है। निलंबन वापस न लेने पर बुधवार सुबह दस बजे से कार्य बहिष्कार करने और डीएफओ कार्यालय के समक्ष धरना प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है।      
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बैठक में वन क्षेत्राधिकारी संघ के सचिव सत्य प्रकाश कंडवाल, फेडरेशन ऑफ मिनिस्ट्रीयल एसोसिएशन के अध्यक्ष किशोरी लाल, वन प्राविधिक संघ के मंडलीय सचिव वीरेंद्र सिंह लिंगवाल, फारेस्ट मिनिस्ट्रीयल एसोसिएशन के संरक्षक संजय कुमार, अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह चौहान, संगठन मंत्री कपिल थपलियाल, शिवालिक संघ के वृत्त मंत्री विलोचन सिंह राणा,  सहायक वन कर्मचारी संघ के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह बिष्ट, सचिव अनुराग जुयाल, वन बीट अधिकारी संघ के उपाध्यक्ष राकेश बेदवाल, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संघ के दामोदर प्रसाद, रघुवीर सिंह सहित अनेक वन कर्मी मौजूद थे।      


उधर, जिला पंचायत उपाध्यक्ष सुमन कोटनाला समेत कई जनप्रतिनिधियों ने कोल्हूचौड़ प्रकरण में डीएफओ के निलंबन की निंदा की है। कार्रवाई करने से पहले मामले की गहन जांच की जानी चाहिए थी। कहा कि जनप्रतिनिधि वन कर्मचारी संगठनों के आंदोलन का समर्थन करेंगे।   

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