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3.5 किमी सड़क बनाकर चलता बना विभाग, स्वीकृत है 10 किमी
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कोटद्वार। वर्ष 2006 में स्वीकृत देवीखाल-जुगरसैंण-फतेहपुर मोटर मार्ग पर 3.5 किमी रोड कटिंग के बाद विभाग चलता बना। रोड कटिंग का काम पूरा नहीं होने से लोगों में लोनिवि के खिलाफ रोष है।
वर्ष 2006 में दुगड्डा ब्लॉक के कई गांव को सड़क से जोड़ने के लिए 10 किमी देवीखाल-जुगरसैंण-फतेहपुर मोटर मार्ग के निर्माण को स्वीकृति मिली थी। मार्ग निर्माण के लिए लोनिवि दुगड्डा को कार्यदायी संस्था बनाया गया, लेकिन कड़े वन कानूनों के चलते वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया की उलझनों में ही कई साल लग गए। हाल यह है कि 13 सालों से मार्ग के निर्माण की प्रक्रिया अधर में लटकी रही, जिससे इन 11 गांवों के लोगों को मुख्य मार्ग तक पहुंचने के लिए पांच से सात किमी की दूरी नापनी पड़ रही है। दो बार के वन भूमि हस्तांतरण के प्रस्तावों को जब अनुमति नहीं मिली, तो ग्रामीणों ने सड़क निर्माण के लिए अपनी नापखेत जमीन देने का प्रस्ताव लोनिवि दुगड्डा को दिया। इस प्रस्ताव पर भी विवाद होने से सड़क निर्माण खटाई में पड़ा रहा। 13 साल बाद गत 10 मई 2019 को लोनिवि दुगड्डा ने रोड कटिंग का काम शुरू किया, लेकिन लोनिवि दुगड्डा 3.5 किमी. रोड कटिंग करने के बाद चलता बना।
जुगरसैंण की ग्राम प्रधान सुमित्रा देवी, हरीश कुमार ध्यानी, नरेंद्र ध्यानी, पीतांबर ध्यानी, सुरेंद्र प्रसाद बौंठियाल, कपिल ध्यानी, सुरेश बौंठियाल ने लोनिवि दुगड्डा से जल्द सड़क निर्माण की मांग उठाई है। कहा कि सड़क सुविधा न मिलने से उनके गांवों में विकास ठप पड़े हैं। एई सुदेश बिंजोला का कहना है कि वर्ष 2006 में स्वीकृत मार्ग के लिए 14 लाख की धनराशि स्वीकृत की गई थी। देवीखाल से मेरूवा तक नापखेत की भूमि में रोड कटिंग का कार्य पूरा कर दिया गया है। इससे आगे वन भूमि पड़ रही है। वन भूमि के हस्तांतरण की प्रक्रिया गतिमान है।
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वर्ष 2006 में दुगड्डा ब्लॉक के कई गांव को सड़क से जोड़ने के लिए 10 किमी देवीखाल-जुगरसैंण-फतेहपुर मोटर मार्ग के निर्माण को स्वीकृति मिली थी। मार्ग निर्माण के लिए लोनिवि दुगड्डा को कार्यदायी संस्था बनाया गया, लेकिन कड़े वन कानूनों के चलते वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया की उलझनों में ही कई साल लग गए। हाल यह है कि 13 सालों से मार्ग के निर्माण की प्रक्रिया अधर में लटकी रही, जिससे इन 11 गांवों के लोगों को मुख्य मार्ग तक पहुंचने के लिए पांच से सात किमी की दूरी नापनी पड़ रही है। दो बार के वन भूमि हस्तांतरण के प्रस्तावों को जब अनुमति नहीं मिली, तो ग्रामीणों ने सड़क निर्माण के लिए अपनी नापखेत जमीन देने का प्रस्ताव लोनिवि दुगड्डा को दिया। इस प्रस्ताव पर भी विवाद होने से सड़क निर्माण खटाई में पड़ा रहा। 13 साल बाद गत 10 मई 2019 को लोनिवि दुगड्डा ने रोड कटिंग का काम शुरू किया, लेकिन लोनिवि दुगड्डा 3.5 किमी. रोड कटिंग करने के बाद चलता बना।
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जुगरसैंण की ग्राम प्रधान सुमित्रा देवी, हरीश कुमार ध्यानी, नरेंद्र ध्यानी, पीतांबर ध्यानी, सुरेंद्र प्रसाद बौंठियाल, कपिल ध्यानी, सुरेश बौंठियाल ने लोनिवि दुगड्डा से जल्द सड़क निर्माण की मांग उठाई है। कहा कि सड़क सुविधा न मिलने से उनके गांवों में विकास ठप पड़े हैं। एई सुदेश बिंजोला का कहना है कि वर्ष 2006 में स्वीकृत मार्ग के लिए 14 लाख की धनराशि स्वीकृत की गई थी। देवीखाल से मेरूवा तक नापखेत की भूमि में रोड कटिंग का कार्य पूरा कर दिया गया है। इससे आगे वन भूमि पड़ रही है। वन भूमि के हस्तांतरण की प्रक्रिया गतिमान है।
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