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ग्वालगढ़ और सुखरो नदी वन क्षेत्र से आज से हटेगा मलबा
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क्षेत्र में भारी बारिश से उपजे बाढ़ और भूकटाव के खतरे को देखते हुए लैंसडौन वन प्रभाग ने वन क्षेत्र में पड़ने वाले ग्वालगढ़, सुखरो और मालन नदी के अपर स्ट्रीम में बुधवार से मलबा हटाने (चैनलाइजेशन) का काम शुरू कर दिया जाएगा। जिलाधिकारी के निर्देश पर एसडीएम योगेश मेहरा ने राजस्व टीम के साथ सुखरो और ग्वालगढ़ गदेरे का निरीक्षण किया।
एसडीएम योगेश मेहरा ने बताया कि लैंसडौन वन प्रभाग के आरक्षित वन क्षेत्र में होने के कारण ग्वालगढ़, सुखरो नदियों की अपर स्ट्रीम क्षेत्र से कई सालों से मलबा नहीं हटा है, जिसके कारण नदी का तल ऊंचा हो गया है। भारी बरसात के दौरान इन दोनों नदियों का पानी जहां आबादी में घुसकर नुकसान पहुंचा रहा है, वहीं भूकटाव और सुरक्षा दीवारों को भी खतरा पैदा हो गया है। उन्होंने बताया कि मंगलवार सुबह के हालात को देखते हुए डीएम ने डीएफओ लैंसडौन को वन क्षेत्र की नदियों से बाढ़ रोकने के लिए नदियों से मलबा हटाने (चैनलाइजेशन) का निर्देश दिया है, ताकि आबादी में पानी न घुसे। डीएफओ दीपक सिंह ने बताया कि ग्वालगढ़ और सुखरो क्षेत्र में नदी के बीच जमा मलबे को हटाकर एक ओर कर दिया जाएगा, जिससे सिमलचौड़ समेत आसपास की आबादी को बाढ़ नुकसान न पहुंचा सके। बताया कि मालन नदी के तट पर मलबा हटाने का काम पहले ही शुरू कर दिया गया था। बुधवार से सुखरो में सुरक्षात्मक कदम उठाए जाएंगे। सुखरो नदी में मलबा हटाने से ध्रुवपुर से लेकर सिमलचौड़ मोटर पुल तक के आसपास की आबादी को राहत मिलेगी। उधर, मालन नदी के उफान पर बहने से कण्वाश्रम से लेकर कोटला, गोरखपुर, नंदपुर, पदमपुर मोटाढांक और देवरामपुर तक बाढ़ और भूकटाव का खतरा बना रहता है। इस क्षेत्र में वन विभाग की ओर से चैनलाइजेशन कराया जा रहा है।
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एसडीएम योगेश मेहरा ने बताया कि लैंसडौन वन प्रभाग के आरक्षित वन क्षेत्र में होने के कारण ग्वालगढ़, सुखरो नदियों की अपर स्ट्रीम क्षेत्र से कई सालों से मलबा नहीं हटा है, जिसके कारण नदी का तल ऊंचा हो गया है। भारी बरसात के दौरान इन दोनों नदियों का पानी जहां आबादी में घुसकर नुकसान पहुंचा रहा है, वहीं भूकटाव और सुरक्षा दीवारों को भी खतरा पैदा हो गया है। उन्होंने बताया कि मंगलवार सुबह के हालात को देखते हुए डीएम ने डीएफओ लैंसडौन को वन क्षेत्र की नदियों से बाढ़ रोकने के लिए नदियों से मलबा हटाने (चैनलाइजेशन) का निर्देश दिया है, ताकि आबादी में पानी न घुसे। डीएफओ दीपक सिंह ने बताया कि ग्वालगढ़ और सुखरो क्षेत्र में नदी के बीच जमा मलबे को हटाकर एक ओर कर दिया जाएगा, जिससे सिमलचौड़ समेत आसपास की आबादी को बाढ़ नुकसान न पहुंचा सके। बताया कि मालन नदी के तट पर मलबा हटाने का काम पहले ही शुरू कर दिया गया था। बुधवार से सुखरो में सुरक्षात्मक कदम उठाए जाएंगे। सुखरो नदी में मलबा हटाने से ध्रुवपुर से लेकर सिमलचौड़ मोटर पुल तक के आसपास की आबादी को राहत मिलेगी। उधर, मालन नदी के उफान पर बहने से कण्वाश्रम से लेकर कोटला, गोरखपुर, नंदपुर, पदमपुर मोटाढांक और देवरामपुर तक बाढ़ और भूकटाव का खतरा बना रहता है। इस क्षेत्र में वन विभाग की ओर से चैनलाइजेशन कराया जा रहा है।
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