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व्यापारिक प्रतिष्ठानों में बाल संरक्षण आयोग ने मारा छापा, हड़कंप
Updated Wed, 06 Dec 2017 10:42 PM IST
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कोटद्वार। बाल संरक्षण आयोग उत्तराखंड की ओर से कोटद्वार की दुकानों में तबाड़तोड़ छापेमारी की गई। इसमें तीन दुकानों में काम कर रहे छह बाल श्रमिक पाए गए। दुकान मालिकों के चालान काटते हुए श्रम विभाग ने आगे ऐसा नहीं करने की चेतावनी दी।
बुधवार को कोटद्वार शहर में उस समय हड़कंप मच गया, जब बाल संरक्षण आयोग उत्तराखंड के सदस्य शैलेंद्र शेखर कगरेती ने सहायक श्रमायुक्त और पुलिस फोर्स के साथ शहर में मिठाइयों की दुकानों में छापे मारने शुरू किए। इस दौरान कई दुकानदारों ने अपनी दुकान में काम कर रहे बच्चों को दुकान से बाहर कर दिया, लेकिन तीन दुकानों पर बच्चे काम करते हुए पाए गए।
बाल संरक्षण आयोग उत्तराखंड के सदस्य शैलेंद्र शेखर कगरेती ने बताया कि कोटद्वार के होटलों, दुकानों में बाल श्रम की पहले भी शिकायतें आती रही हैं। यहां के एक स्कूल ने अपनी ऊपरी मंजिल में टीन की शेड डलकर उसके नीचे बच्चों को बैठाने का मामला भी देखा गया है। विद्यालय को टीन हटाने और बच्चों के लिए बैठने की उचित व्यवस्था करने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है।
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सहायक श्रमायुक्त केके गुप्ता ने बताया कि बाल श्रम अधिनियम के तहत सिद्धबली बाबा स्वीट, निरंकारी स्वीट शॉप और आहूजा स्वीट शॉप में कुल छह बच्चे काम करते हुए पाए गए हैं। दुकान मालिकों का चालान काटे गए हैं।
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-फोटो
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बुधवार को कोटद्वार शहर में उस समय हड़कंप मच गया, जब बाल संरक्षण आयोग उत्तराखंड के सदस्य शैलेंद्र शेखर कगरेती ने सहायक श्रमायुक्त और पुलिस फोर्स के साथ शहर में मिठाइयों की दुकानों में छापे मारने शुरू किए। इस दौरान कई दुकानदारों ने अपनी दुकान में काम कर रहे बच्चों को दुकान से बाहर कर दिया, लेकिन तीन दुकानों पर बच्चे काम करते हुए पाए गए।
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बाल संरक्षण आयोग उत्तराखंड के सदस्य शैलेंद्र शेखर कगरेती ने बताया कि कोटद्वार के होटलों, दुकानों में बाल श्रम की पहले भी शिकायतें आती रही हैं। यहां के एक स्कूल ने अपनी ऊपरी मंजिल में टीन की शेड डलकर उसके नीचे बच्चों को बैठाने का मामला भी देखा गया है। विद्यालय को टीन हटाने और बच्चों के लिए बैठने की उचित व्यवस्था करने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है।
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सहायक श्रमायुक्त केके गुप्ता ने बताया कि बाल श्रम अधिनियम के तहत सिद्धबली बाबा स्वीट, निरंकारी स्वीट शॉप और आहूजा स्वीट शॉप में कुल छह बच्चे काम करते हुए पाए गए हैं। दुकान मालिकों का चालान काटे गए हैं।
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