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भवन के कब्जे को लेकर दो पक्ष भिड़े, दो गिरफ्तार
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कोटद्वार। गोविंदनगर में भवन के कब्जे को लेकर दो पक्षों में विवाद हो गया। पुलिस ने शांति भंग की आशंका को देखते हुए दोनों पक्षों के दो युवकों को गिरफ्तार कर उनका चालान कर दिया है।
बाजार चौकी प्रभारी सतेंद्र भंडारी ने बताया कि रविवार सुबह जानकारी मिली कि गोविंदनगर में भवन के कब्जे को लेकर दो पक्षों में विवाद हो रहा है। सूचना पर पहुंची पुलिस ने दोनों पक्षों को काफी समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे नहीं माने। मामले में पुलिस ने दोनों पक्षों के प्रियांश उर्फ काकू पुत्र स्व. आरपी वार्ष्णेय और अर्पित पुत्र ओमप्रकाश गुप्ता को गिरफ्तार कर धारा 151 में उनका चालान कर दिया है। उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों ने कुछ समय पूर्व गोविंदनगर में मकान खरीदा। मकान की रजिस्ट्रियां रेनू वार्णेय और सुषमा गुप्ता के नाम पर हैं। दोनों पक्षों के बीच मकान के कब्जे को लेकर कई बार विवाद हो चुका है। मामले में जहां प्रियांश वार्ष्णेय का कहना है कि वे गत 28 वर्षों से मकान में रह रहे हैं।
भंडारी ने बताया कि रविवार सुबह ओम प्रकाश गुप्ता 40-50 लोगों के साथ पहुंचे और उनके घर के सभी कमरों के कुंदे तोड़ दिए। इस दौरान उन्होंने प्रियांश के साथ मारपीट भी की। वहीं दूसरी ओर ओमप्रकाश गुप्ता ने उन पर लगाए गए सभी आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि आरपी वार्ष्णेय और वह अच्छे दोस्त थे। इस दौरान उन्होंने गोविंदनगर में एक भवन को खरीदा। भवन की रजिस्ट्रियां उनकी पत्नियों के नाम पर हैं। आरपी वार्ष्णेय का परिवार उक्त भवन पर रहता है, जबकि वह परिवार समेत बरेली में रहते हैं। वह भवन में कब्जे को लेकर गत कई सालों से प्रयास कर रहे हैं, लेकिन आरपी वार्ष्णेय का परिवार उन्हें कब्जा नहीं दे रहा है। मामले में दोनों पक्षों के बीच दो बार समझौता हो चुका है। समझौते के तहत आरपी वार्ष्णेय के पुत्र ने 42 लाख रुपये में उनके हिस्से की प्रापर्टी खरीदना तय किया, लेकिन दोनों ही बार उन्होंने उन्हें रकम नहीं दी, जिससे मामला नहीं सुलझ सका।
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बाजार चौकी प्रभारी सतेंद्र भंडारी ने बताया कि रविवार सुबह जानकारी मिली कि गोविंदनगर में भवन के कब्जे को लेकर दो पक्षों में विवाद हो रहा है। सूचना पर पहुंची पुलिस ने दोनों पक्षों को काफी समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे नहीं माने। मामले में पुलिस ने दोनों पक्षों के प्रियांश उर्फ काकू पुत्र स्व. आरपी वार्ष्णेय और अर्पित पुत्र ओमप्रकाश गुप्ता को गिरफ्तार कर धारा 151 में उनका चालान कर दिया है। उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों ने कुछ समय पूर्व गोविंदनगर में मकान खरीदा। मकान की रजिस्ट्रियां रेनू वार्णेय और सुषमा गुप्ता के नाम पर हैं। दोनों पक्षों के बीच मकान के कब्जे को लेकर कई बार विवाद हो चुका है। मामले में जहां प्रियांश वार्ष्णेय का कहना है कि वे गत 28 वर्षों से मकान में रह रहे हैं।
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भंडारी ने बताया कि रविवार सुबह ओम प्रकाश गुप्ता 40-50 लोगों के साथ पहुंचे और उनके घर के सभी कमरों के कुंदे तोड़ दिए। इस दौरान उन्होंने प्रियांश के साथ मारपीट भी की। वहीं दूसरी ओर ओमप्रकाश गुप्ता ने उन पर लगाए गए सभी आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि आरपी वार्ष्णेय और वह अच्छे दोस्त थे। इस दौरान उन्होंने गोविंदनगर में एक भवन को खरीदा। भवन की रजिस्ट्रियां उनकी पत्नियों के नाम पर हैं। आरपी वार्ष्णेय का परिवार उक्त भवन पर रहता है, जबकि वह परिवार समेत बरेली में रहते हैं। वह भवन में कब्जे को लेकर गत कई सालों से प्रयास कर रहे हैं, लेकिन आरपी वार्ष्णेय का परिवार उन्हें कब्जा नहीं दे रहा है। मामले में दोनों पक्षों के बीच दो बार समझौता हो चुका है। समझौते के तहत आरपी वार्ष्णेय के पुत्र ने 42 लाख रुपये में उनके हिस्से की प्रापर्टी खरीदना तय किया, लेकिन दोनों ही बार उन्होंने उन्हें रकम नहीं दी, जिससे मामला नहीं सुलझ सका।
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